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'निर्भय चेतना' से प्रशिक्षित होंगे 17.5 लाख पुरुष जनप्रतिनिधि, पंचायती राज मंत्रालय की ऐतिहासिक पहल

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'निर्भय चेतना' से प्रशिक्षित होंगे 17.5 लाख पुरुष जनप्रतिनिधि, पंचायती राज मंत्रालय की ऐतिहासिक पहल

सारांश

केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय की 'निर्भय चेतना' पहल दुनिया की सबसे बड़ी लैंगिक संवेदनशीलता मुहिम बताई जा रही है — 28,500 मास्टर ट्रेनरों के ज़रिए 17.5 लाख पुरुष जनप्रतिनिधियों तक पहुँचने का लक्ष्य। छह राज्यों के पायलट बैच से शुरू यह अभियान 'विकसित भारत' की नींव में लैंगिक न्याय को स्थापित करने की कोशिश है।

मुख्य बातें

पंचायती राज मंत्रालय ने 20 जून 2025 को नई दिल्ली में 'निर्भय चेतना' पर तीन दिवसीय टीओटी कार्यक्रम आयोजित किया।
पहल का लक्ष्य देशभर के 17.5 लाख से अधिक पुरुष निर्वाचित प्रतिनिधियों को लैंगिक संवेदनशीलता पर प्रशिक्षित करना है।
राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर 28,500 मास्टर ट्रेनरों का कैडर तैयार किया जा रहा है।
पायलट बैच में असम, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तराखंड के लगभग 40 प्रशिक्षक शामिल रहे।
'निर्भय रहो' पहल के तीन घटक हैं — निर्भय नेत्री (महिला प्रतिनिधि), निर्भय चेतना (पुरुष प्रतिनिधि) और निर्भय दृष्टि (सीसीटीवी अवसंरचना)।
यह पहल 11 मार्च को शुरू हुई और 'निर्भया फंड' के अंतर्गत वित्तपोषित है।

केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय ने 20 जून 2025 को नई दिल्ली में 'निर्भया फंड' परियोजना के तहत 'निर्भय चेतना' विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षक प्रशिक्षण (टीओटी) कार्यक्रम का आयोजन किया। इस पहल को दुनियाभर में अपनी तरह की सबसे बड़ी मुहिम बताया जा रहा है, जिसका लक्ष्य देशभर के 17.5 लाख से अधिक पुरुष निर्वाचित प्रतिनिधियों को महिला सुरक्षा और लैंगिक समानता के प्रति संवेदनशील बनाना है। यह कार्यक्रम जमीनी स्तर पर लैंगिक रूप से संवेदनशील शासन को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में 'ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया' द्वारा विकसित 'निर्भय चेतना' प्रशिक्षण मॉड्यूल का औपचारिक शुभारंभ किया गया। पायलट बैच में असम, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तराखंड — इन छह राज्यों के लगभग 40 कुशल प्रशिक्षक शामिल रहे। मंत्रालय के अनुसार यह पायलट बैच एक ऐसे प्रशिक्षण मॉडल की नींव रखेगा, जिसे आगे चलकर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक विस्तारित किया जाएगा।

कार्यक्रम में विशेषज्ञ सत्रों, समूह चर्चाओं, केस स्टडी और अनुभवात्मक शिक्षण के माध्यम से सहभागी दृष्टिकोण अपनाया गया। प्रमुख विषयों में सकारात्मक पुरुषत्व, सामुदायिक भागीदारी और पंचायतों की भूमिका शामिल रही।

सरकार की प्रतिक्रिया और दृष्टिकोण

पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने उद्घाटन सत्र में कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और समान भागीदारी सुनिश्चित किए बिना 'विकसित भारत' का विजन पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने पंचायतों को सामाजिक और लोकतांत्रिक बदलाव की धुरी बताते हुए कहा कि यह पहल महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और अवसरों को विकास के अनिवार्य स्तंभों के रूप में स्थापित करती है।

मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव सुशील कुमार लोहानी ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा को एक सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि 'निर्भय चेतना' का उद्देश्य पुरुष निर्वाचित प्रतिनिधियों में जागरूकता, संवेदनशीलता और जवाबदेही का निर्माण करना है, ताकि वे अपने समुदायों में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें।

'निर्भय रहो' पहल के तीन स्तंभ

गौरतलब है कि 'निर्भय चेतना', 11 मार्च को शुरू की गई व्यापक 'निर्भय रहो' पहल का एक अभिन्न अंग है। इस पहल के तीन पूरक घटक हैं — 'निर्भय नेत्री' निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की क्षमता निर्माण और कानूनी जागरूकता पर केंद्रित है; 'निर्भय चेतना' पुरुष निर्वाचित प्रतिनिधियों को लैंगिक समानता के प्रति संवेदनशील बनाने का कार्य करती है; और 'निर्भय दृष्टि' के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में रणनीतिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाकर प्रौद्योगिकी-आधारित सुरक्षा अवसंरचना को मजबूत करने की परिकल्पना है।

विस्तार की योजना और आगे की राह

'निर्भय चेतना' के तहत राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर 28,500 मास्टर ट्रेनरों का एक समर्पित कैडर तैयार किया जा रहा है, जो देशभर में 17.5 लाख से अधिक पुरुष निर्वाचित प्रतिनिधियों तक यह प्रशिक्षण पहुँचाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण शासन में महिलाओं की भागीदारी और सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय विमर्श तेज हो रहा है। पायलट चरण की सफलता के बाद इस मॉडल को शेष राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किए जाने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यह संरचनागत समस्या महज एक तीन दिवसीय टीओटी से नहीं बदलेगी। जब तक इस प्रशिक्षण के असर को मापने का कोई स्वतंत्र और पारदर्शी तंत्र नहीं बनता, यह पहल संख्याओं की उपलब्धि तो दर्ज करेगी, पर ज़मीनी बदलाव की गारंटी नहीं दे पाएगी।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'निर्भय चेतना' पहल क्या है?
'निर्भय चेतना' केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय की एक राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य पंचायती राज संस्थाओं के पुरुष निर्वाचित प्रतिनिधियों को महिला सुरक्षा, लैंगिक समानता और महिला नेतृत्व के प्रति संवेदनशील बनाना है। यह 'निर्भया फंड' के अंतर्गत वित्तपोषित है और 11 मार्च को शुरू हुई 'निर्भय रहो' पहल का एक प्रमुख घटक है।
'निर्भय चेतना' से कितने लोगों को प्रशिक्षित किया जाएगा?
इस पहल के तहत देशभर में 17.5 लाख से अधिक पुरुष निर्वाचित प्रतिनिधियों तक पहुँचने का लक्ष्य है। इसके लिए राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर 28,500 मास्टर ट्रेनरों का एक कैडर तैयार किया जा रहा है।
'निर्भय रहो' पहल के तीन घटक कौन से हैं?
'निर्भय रहो' पहल के तीन घटक हैं — 'निर्भय नेत्री' जो निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की क्षमता निर्माण और कानूनी जागरूकता पर केंद्रित है; 'निर्भय चेतना' जो पुरुष निर्वाचित प्रतिनिधियों को लैंगिक संवेदनशीलता पर प्रशिक्षित करती है; और 'निर्भय दृष्टि' जो ग्रामीण क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से प्रौद्योगिकी-आधारित सुरक्षा अवसंरचना मजबूत करती है।
इस पहल का पायलट कार्यक्रम किन राज्यों में चलाया गया?
पायलट बैच में असम, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तराखंड के लगभग 40 कुशल प्रशिक्षक शामिल थे। मंत्रालय के अनुसार इस मॉडल को आगे सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विस्तारित किया जाएगा।
इस कार्यक्रम का 'विकसित भारत' विजन से क्या संबंध है?
पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और समान भागीदारी सुनिश्चित किए बिना 'विकसित भारत' का विजन पूरा नहीं किया जा सकता। यह पहल लैंगिक संवेदनशीलता को विकास की प्राथमिकता के रूप में स्थापित करने की कोशिश है।
राष्ट्र प्रेस
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