पंजाब के 3,600 सरकारी स्कूलों में मासिक धर्म स्वास्थ्य पाठ्यक्रम लागू, 3.4 लाख छात्राओं को मिलेगा लाभ
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब सरकार ने 28 मई 2025 को मेंस्ट्रुअल हाइजीन डे के अवसर पर राज्य के 23 जिलों के सभी सरकारी हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में मासिक धर्म स्वास्थ्य पाठ्यक्रम लागू करने की घोषणा की। यह पहल 3,600 से अधिक सरकारी स्कूलों में कक्षा 6 से 10 तक पढ़ने वाली करीब 3.4 लाख छात्राओं को सीधे लाभ पहुँचाएगी। पहला सत्र 29 मई से शुरू हो चुका है।
पाठ्यक्रम में क्या है खास
यह पाठ्यक्रम एक अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी संस्था के सहयोग से तैयार किया गया है और इसे विशेष रूप से पंजाबी भाषा में ढाला गया है, ताकि छात्राएँ विषय से सहज जुड़ाव महसूस कर सकें। कक्षाओं में 'रूबी' नाम की 10 वर्षीय काल्पनिक किरदार के माध्यम से कहानी-आधारित, इंटरैक्टिव शिक्षण पद्धति अपनाई जाएगी। समूह चर्चा और गतिविधियों के ज़रिए सीखने की प्रक्रिया को सुरक्षित, सरल और रोचक बनाया गया है।
सत्रों में छात्राओं को मासिक धर्म, शरीर में होने वाले बदलाव, स्वच्छता, आत्म-देखभाल, आत्मविश्वास और सकारात्मक विद्यालय वातावरण से जुड़ी जानकारी दी जाएगी। पूरा कार्यक्रम तीन चरणों वाले विशेष मॉडल पर आधारित है, जिसमें उम्र के अनुसार उपयुक्त सामग्री शामिल है।
शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण
कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए पंजाब सरकार अब तक करीब 7,200 शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दे चुकी है। अधिकारियों के अनुसार, यह प्रशिक्षण इसलिए आवश्यक था ताकि शिक्षक संवेदनशीलता और आत्मविश्वास के साथ इस विषय को कक्षा में प्रस्तुत कर सकें — एक ऐसा विषय जिसे समाज में लंबे समय से चुप्पी, झिझक और सामाजिक कलंक से जोड़कर देखा जाता रहा है।
सरकार का उद्देश्य और सामाजिक संदर्भ
पंजाब सरकार का कहना है कि इस पहल का मूल उद्देश्य एक ऐसा आधुनिक और समावेशी शिक्षा तंत्र तैयार करना है जहाँ लड़कियों को जागरूकता, आत्मविश्वास, सम्मान और सही स्वास्थ्य जानकारी मिल सके। अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि मासिक धर्म कभी भी किसी लड़की की पढ़ाई, स्कूल में उपस्थिति या उसके मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य में बाधा नहीं बनना चाहिए।
गौरतलब है कि यह पहल सर्वोच्च न्यायालय की उन टिप्पणियों की भावना के अनुरूप मानी जा रही है, जिनमें कहा गया था कि मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता का विषय सीधे तौर पर किशोरियों की गरिमा, शिक्षा और समानता से जुड़ा है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में किशोरी स्वास्थ्य शिक्षा को लेकर नीतिगत बहस तेज़ हो रही है। पंजाब का यह मॉडल — पंजाबी भाषा में तैयार पाठ्यक्रम, प्रशिक्षित शिक्षक और कहानी-आधारित शिक्षण — अन्य राज्यों के लिए एक संदर्भ बिंदु बन सकता है। कार्यक्रम की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि तीन चरणों वाला मॉडल ज़मीनी स्तर पर कितनी निरंतरता के साथ लागू होता है।