नीति आयोग 30 जून को जारी करेगा ग्राम सभा भागीदारी पर राष्ट्रीय अध्ययन रिपोर्ट, 26 राज्यों में हुआ सर्वेक्षण
सारांश
मुख्य बातें
नीति आयोग के सदस्य डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम 30 जून 2026 को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अध्ययन रिपोर्ट जारी करेंगे, जो देश भर में ग्राम सभाओं में नागरिकों की कम भागीदारी के कारणों और समाधानों पर केंद्रित है। पंचायती राज मंत्रालय के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह रिपोर्ट राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (NIRDPR) ने तैयार की है और इसमें 26 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की करीब 400 ग्राम पंचायतों में व्यापक सर्वेक्षण किया गया है।
रिपोर्ट का दायरा और सर्वेक्षण की व्यापकता
इस राष्ट्रीय अध्ययन के लिए करीब 7,790 लोगों से बातचीत की गई। सर्वेक्षण में पेसा (PESA) क्षेत्रों और महिला नेतृत्व वाली ग्राम पंचायतों को विशेष रूप से शामिल किया गया, जिससे अध्ययन की समावेशिता सुनिश्चित हो सके। रिपोर्ट का विषय है — 'राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ग्राम सभाओं में कम भागीदारी।'
गौरतलब है कि संविधान के अनुच्छेद 243ए के तहत ग्राम सभा को स्थानीय स्तर पर सहभागी लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण इकाई माना गया है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर नागरिकों की उपस्थिति अपेक्षा से कम बनी हुई है।
किन पहलुओं का अध्ययन किया गया
रिपोर्ट में ग्राम सभाओं में भागीदारी को प्रभावित करने वाले कई आयामों की पड़ताल की गई है — जिनमें नागरिकों की जागरूकता, सूचना प्रसार की व्यवस्था, सभी वर्गों की समान भागीदारी, संस्थागत जवाबदेही, प्रशासनिक कार्यप्रणाली, बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता और नागरिकों की मानसिकता शामिल हैं।
इसका मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए व्यावहारिक और नीति-उन्मुख सुझाव देना है, जो संस्थागत सुधारों में भी सहायक हो सकें।
डिजिटल शासन में पंचायतों की प्रगति
रिपोर्ट ऐसे समय में आ रही है जब भारत की ग्राम पंचायतें डिजिटल शासन में उल्लेखनीय प्रगति कर रही हैं। ई-ग्रामस्वराज प्लेटफॉर्म के माध्यम से अब तक ₹3 लाख करोड़ से अधिक के भुगतान सीधे विक्रेताओं और सेवा प्रदाताओं के खातों में रियल टाइम में किए जा चुके हैं।
इसके अलावा, एआई-संचालित 'सभासार' मीटिंग टूल अब 23 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है। यह प्लेटफॉर्म पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) से भी जुड़ा है, जिससे ग्राम पंचायतों में योजना निर्माण, लेखांकन और व्यय की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हो गई है।
रिपोर्ट के संभावित प्रभाव
यह अध्ययन नीति निर्माताओं को ग्राम सभाओं को अधिक सक्रिय, समावेशी और जवाबदेह बनाने की दिशा में ठोस रोडमैप प्रदान कर सकता है। रिपोर्ट में दिए गए सुझाव पंचायती राज संस्थाओं को देश भर में और सशक्त बनाने में सहायक होने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में मंत्रालय इन सिफारिशों के आधार पर नीतिगत कदम उठा सकता है।