कुकड़ा माई मंदिर: CM पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर साझा की बागेश्वर के इस पावन धाम की महिमा
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 12 जुलाई 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बागेश्वर जिले के कुकड़ा माई मंदिर की आध्यात्मिक और प्राकृतिक विशेषताओं को उजागर करते हुए एक पोस्ट साझा की। उन्होंने इस मंदिर को आस्था, प्रकृति और आध्यात्मिक शांति का अद्भुत संगम बताया और देशभर के श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को यहाँ आने का आमंत्रण दिया।
मुख्यमंत्री का संदेश
धामी ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा, 'बागेश्वर जनपद में काफल, देवदार और चीड़ के घने वनों के बीच स्थित कुकड़ा माई मंदिर आस्था, प्रकृति और आध्यात्मिक शांति का अद्भुत संगम है। शांत एवं मनमोहक वातावरण से घिरा यह पावन धाम स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ देशभर से आने वाले पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित करता है।'
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यह मंदिर ट्रेकिंग प्रेमियों के लिए भी एक लोकप्रिय और रोमांचक गंतव्य है। मुख्यमंत्री ने सभी से आग्रह किया कि बागेश्वर आगमन पर इस पावन धाम के दर्शन अवश्य करें।
मंदिरों को बढ़ावा देने की श्रृंखला
गौरतलब है कि यह पोस्ट मुख्यमंत्री धामी द्वारा उत्तराखंड के विभिन्न धार्मिक स्थलों को सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचारित करने की एक सतत श्रृंखला का हिस्सा है। इससे पूर्व उन्होंने रुद्रप्रयाग जिले के ऊखीमठ में स्थित श्री अष्ट भैरव मंदिर को लेकर भी एक्स पर पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने इस स्थल को अत्यंत प्राचीन, सिद्ध एवं आस्था का प्रमुख केंद्र बताया था।
अपनी पोस्ट में धामी ने लिखा था, 'मान्यता है कि इसी पावन स्थल पर भगवान शिव ने अष्टभैरव के दिव्य स्वरूपों को प्रकट किया था।' उन्होंने रुद्रप्रयाग आने वाले श्रद्धालुओं से इस धाम में दर्शन-पूजन करने का आग्रह किया।
अगनेरी माता मंदिर का भी किया उल्लेख
10 जुलाई को मुख्यमंत्री ने अल्मोड़ा के चौखुटिया में रामगंगा नदी के तट पर स्थित अगनेरी माता मंदिर को लेकर भी एक्स पर पोस्ट किया था। उन्होंने इसे कत्यूरी काल की ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा प्राचीन मंदिर बताते हुए इसकी दिव्यता, आध्यात्मिक वातावरण और सांस्कृतिक महत्ता की सराहना की।
पर्यटन और आस्था को जोड़ने की कोशिश
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड सरकार धार्मिक पर्यटन को राज्य की अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख स्तंभ बनाने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है। मुख्यमंत्री की यह पहल राज्य के दूरदराज के धार्मिक स्थलों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और वहाँ श्रद्धालुओं व पर्यटकों का आगमन बढ़ाने का प्रयास है। आने वाले समय में इस तरह की और पोस्टों के माध्यम से उत्तराखंड के अनदेखे धार्मिक स्थलों को प्रकाश में लाने की उम्मीद है।