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रुपए की स्थिरता और बेहतर मैक्रो से एफपीआई का भरोसा लौटा, 1-10 जुलाई में ₹15,156 करोड़ का निवेश

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रुपए की स्थिरता और बेहतर मैक्रो से एफपीआई का भरोसा लौटा, 1-10 जुलाई में ₹15,156 करोड़ का निवेश

सारांश

रुपए की स्थिरता और डेट टैक्स सुधारों ने एफपीआई को भारत की ओर मोड़ा — 1 से 10 जुलाई के बीच ₹15,156 करोड़ का निवेश हुआ। लेकिन पश्चिम एशिया का तनाव और ब्रेंट क्रूड की अस्थिरता इस सकारात्मक रुझान के लिए सबसे बड़ा जोखिम बनी हुई है।

मुख्य बातें

एफपीआई ने 1 से 10 जुलाई के बीच भारतीय बाज़ारों में कुल ₹15,156 करोड़ का निवेश किया।
इक्विटी में ₹5,155 करोड़ और 'प्राइमरी मार्केट व अन्य' श्रेणी में ₹10,001 करोड़ का निवेश दर्ज।
डेट बाज़ार में 'जनरल लिमिट' से ₹3,228 करोड़ और 'फुली एक्सेसिबल रूट' से ₹6,619 करोड़ का प्रवाह।
सरकार के डेट निवेश टैक्स नियमों में बदलाव और रुपए की स्थिरता को विशेषज्ञों ने मुख्य कारण बताया।
ब्रेंट क्रूड हफ्ते के दौरान 80 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर गया, बाद में 76 डॉलर पर आया।
आगामी हफ्ते में आर्थिक आंकड़े , कंपनियों की कमाई और भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाज़ार की दिशा तय करेंगे।

भारत के मज़बूत होते मैक्रो-इकोनॉमिक बुनियाद और रुपए की स्थिरता ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को एक बार फिर भारतीय बाज़ारों की ओर आकर्षित किया है। 1 से 10 जुलाई के बीच एफपीआई ने कुल ₹15,156 करोड़ का निवेश किया, जो इस साल की शुरुआत में देखी गई बिकवाली के बाद एक उल्लेखनीय पलटाव है। विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार द्वारा डेट निवेश के टैक्स नियमों में किए गए बदलाव भी इस सकारात्मक रुझान में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

निवेश का विवरण: इक्विटी और डेट दोनों में प्रवाह

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार के अनुसार, 1 से 10 जुलाई के दौरान एफपीआई ने इक्विटी में ₹5,155 करोड़ का निवेश किया। इसके अतिरिक्त, 'प्राइमरी मार्केट और अन्य' श्रेणी के ज़रिए ₹10,001 करोड़ का निवेश हुआ, जिससे कुल निवेश ₹15,156 करोड़ पर पहुँच गया।

डॉ. विजयकुमार ने इसे 'एक सकारात्मक खबर' बताया। डेट बाज़ार में भी एफपीआई का रुझान उत्साहजनक रहा — जुलाई में अब तक 'जनरल लिमिट' के ज़रिए ₹3,228 करोड़ और 'फुली एक्सेसिबल रूट' (एफएआर) के ज़रिए ₹6,619 करोड़ का निवेश दर्ज किया गया है।

डेट निवेश में बढ़ती हिस्सेदारी: एक अहम रुझान

विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत में एफपीआई निवेश में सबसे उल्लेखनीय बदलाव डेट की हिस्सेदारी का लगातार बढ़ना है। सरकार द्वारा डेट निवेश के टैक्स नियमों में किए गए सुधारों ने विदेशी निवेशकों को भारतीय बॉन्ड बाज़ार में प्रवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया है।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर दक्षिण कोरिया जैसे उभरते बाज़ारों में एफपीआई बिकवाली कर रहे हैं और चिप ट्रेड में कमज़ोरी के कारण वहाँ से पूँजी का पुनर्आवंटन हो रहा है। भारत इस पूँजी के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बनकर उभरा है।

भू-राजनीतिक जोखिम: बाज़ार पर मंडराती छाया

हालाँकि, बाज़ार विशेषज्ञ सतर्क भी हैं। पिछले हफ्ते पश्चिम एशिया में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी के कारण बाज़ार में चार हफ्तों से चली आ रही बढ़त का सिलसिला टूट गया और बाज़ार मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ।

अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान द्वारा खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की खबरों के बाद ईरान-अमेरिका तनाव फिर से उभरा। रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के रिसर्च एसवीपी अजीत मिश्रा ने कहा, "इस नए टकराव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें कुछ समय के लिए 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से ऊपर चली गईं, लेकिन हफ्ते के अंत तक ये 76 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गईं, जिससे आयातित महंगाई और बाहरी सेक्टर के जोखिमों को लेकर कुछ चिंताएँ कम हुईं।"

सेक्टर प्रदर्शन: रियल्टी आगे, आईटी और मेटल पीछे

अलग-अलग सेक्टर का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। बेहतर सेंटीमेंट और चुनिंदा शेयरों की खरीदारी के दम पर रियल्टी सेक्टर सबसे आगे रहा। इसके बाद आईटी और मेटल सेक्टर का स्थान रहा, जबकि बाज़ार में खास शेयरों में ही ज़्यादा हलचल दिखी।

आगे क्या: तीन कारक तय करेंगे बाज़ार की दिशा

बाज़ार विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले हफ्ते में तीन प्रमुख कारक बाज़ार का मूड तय करेंगे — आर्थिक आंकड़े, कंपनियों की तिमाही कमाई, और भू-राजनीतिक घटनाक्रम। बाज़ार पर नज़र रखने वालों का कहना है कि जब तक पश्चिम एशिया में हालात और खराब नहीं होते, एफपीआई निवेश का यह सकारात्मक रुझान बना रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

156 करोड़ का यह प्रवाह उत्साहजनक है, लेकिन यह पूरी तरह से भारत की ताकत की कहानी नहीं है — इसमें दक्षिण कोरिया जैसे प्रतिस्पर्धी बाज़ारों की कमज़ोरी का भी बड़ा योगदान है। डेट टैक्स सुधार सही दिशा में उठाया गया कदम है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या भारत तब भी एफपीआई को रोक पाएगा जब वैश्विक जोखिम-भूख वापस आएगी। पश्चिम एशिया का तनाव और कच्चे तेल की अस्थिरता — जो भारत के चालू खाते के घाटे को सीधे प्रभावित करती है — इस सकारात्मक कथा की सबसे बड़ी कमज़ोरी है, जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जुलाई 2025 में एफपीआई ने भारत में कितना निवेश किया?
1 से 10 जुलाई के बीच एफपीआई ने भारतीय बाज़ारों में कुल ₹15,156 करोड़ का निवेश किया, जिसमें इक्विटी में ₹5,155 करोड़ और प्राइमरी मार्केट व अन्य श्रेणी में ₹10,001 करोड़ शामिल हैं।
एफपीआई निवेश वापस आने के पीछे मुख्य कारण क्या हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार द्वारा डेट निवेश के टैक्स नियमों में किए गए बदलाव, रुपए की स्थिरता और भारत के बेहतर होते मैक्रो-इकोनॉमिक हालात मुख्य कारण हैं। दक्षिण कोरिया जैसे बाज़ारों में एफपीआई की बिकवाली से भी भारत को फायदा हुआ है।
भारत के डेट बाज़ार में एफपीआई का निवेश कितना रहा?
जुलाई में अब तक एफपीआई ने 'जनरल लिमिट' के ज़रिए ₹3,228 करोड़ और 'फुली एक्सेसिबल रूट' (एफएआर) के ज़रिए ₹6,619 करोड़ का निवेश डेट बाज़ार में किया है।
पश्चिम एशिया के तनाव का भारतीय बाज़ार पर क्या असर पड़ा?
ईरान-अमेरिका तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड कुछ समय के लिए 80 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया, जिससे बाज़ार में चार हफ्तों की बढ़त का सिलसिला टूट गया। हफ्ते के अंत तक कीमतें 76 डॉलर के आसपास आ गईं, जिससे आयातित महंगाई की चिंताएँ कुछ कम हुईं।
आने वाले हफ्ते में भारतीय बाज़ार की दिशा क्या होगी?
बाज़ार विश्लेषकों के अनुसार, आर्थिक आंकड़े, कंपनियों की तिमाही कमाई और भू-राजनीतिक घटनाक्रम — विशेष रूप से पश्चिम एशिया की स्थिति — अगले हफ्ते बाज़ार का रुख तय करेंगे। जब तक हालात और नहीं बिगड़ते, एफपीआई निवेश का सकारात्मक रुझान बने रहने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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