NPT 11वें समीक्षा सम्मेलन में चीन की दो-टूक: अमेरिका परमाणु अराजकता का सबसे बड़ा स्रोत

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NPT 11वें समीक्षा सम्मेलन में चीन की दो-टूक: अमेरिका परमाणु अराजकता का सबसे बड़ा स्रोत

सारांश

NPT के 11वें समीक्षा सम्मेलन में चीन ने बिना लाग-लपेट के अमेरिका को परमाणु व्यवस्था की बर्बादी का ज़िम्मेदार ठहराया और जापान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को वास्तविक खतरा करार दिया। यह वैश्विक परमाणु निरस्त्रीकरण की राह में नए टकराव का संकेत है।

Key Takeaways

चीनी प्रतिनिधिमंडल ने 29 अप्रैल 2026 को NPT के 11वें समीक्षा सम्मेलन में भाग लिया। चीन ने कहा कि अमेरिका पिछले 20 से अधिक वर्षों में एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल संधि , INF संधि और ओपन स्काईज संधि से हट चुका है। अमेरिका को परमाणु हथियार नियंत्रण क्षेत्र में अराजकता का सबसे बड़ा स्रोत बताया गया। साने ताकाइची के नेतृत्व में जापान की परमाणु गतिविधियों को वास्तविक खतरा करार दिया गया। चीन ने सम्मेलन में कार्य दस्तावेज़ प्रस्तुत कर जापान की परमाणु गतिविधियों के सत्यापन की माँग की।

चीनी प्रतिनिधिमंडल ने 29 अप्रैल 2026 को नाभिकीय अप्रसार संधि (NPT) के 11वें समीक्षा सम्मेलन में कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिका पर परमाणु हथियार नियंत्रण व्यवस्था को कमज़ोर करने का सीधा आरोप लगाया। चीनी प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, अमेरिका परमाणु हथियार नियंत्रण और रणनीतिक स्थिरता के क्षेत्र में अराजकता का सबसे बड़ा स्रोत बन चुका है।

अमेरिका पर संधि तोड़ने के आरोप

चीनी प्रतिनिधिमंडल ने सम्मेलन में कहा कि पिछले 20 से अधिक वर्षों में अमेरिका क्रमशः एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल संधि, इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेज (INF) संधि और ओपन स्काईज संधि जैसी प्रमुख शस्त्र नियंत्रण संधियों से एकतरफा रूप से हट चुका है। इसके अलावा, अमेरिका ने सामरिक शस्त्र कटौती संधि (START) को समाप्त होने और अमान्य होने दिया। चीनी प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, इन कदमों ने अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा और परमाणु हथियार नियंत्रण प्रणाली को गंभीर नुकसान पहुँचाया है।

चीन की परमाणु नीति पर अमेरिकी आरोपों का खंडन

चीनी प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने हाल के भाषणों में जानबूझकर चीन के रुख और विचारों की गलत व्याख्या की तथा चीन की परमाणु नीति एवं प्रतिरक्षा बल के निर्माण पर निराधार आरोप लगाए। चीन ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि अमेरिका को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चिंताओं का सक्रिय रूप से जवाब देना होगा। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में पहले से ही गहरी अनिश्चितता बनी हुई है।

जापान पर चीन की गंभीर चेतावनी

चीनी प्रतिनिधिमंडल ने इस सम्मेलन में जापान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी तीखी चिंता जताई। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, साने ताकाइची के पद संभालने के बाद से जापान का परमाणु मुद्दा एक वास्तविक खतरा बन गया है, न कि केवल संभावित खतरा। चीन ने कहा कि यह स्थिति द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था और परमाणु अप्रसार व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती प्रस्तुत करती है।

कार्य दस्तावेज़ और आगे की राह

चीन ने इस मुद्दे पर सम्मेलन में एक कार्य दस्तावेज़ प्रस्तुत किया है और सभी पक्षों से इसका ध्यानपूर्वक अध्ययन करने का आग्रह किया है। गौरतलब है कि चीन ने वर्तमान समीक्षा सम्मेलन में जापान की परमाणु गतिविधियों के सत्यापन और पर्यवेक्षण को मज़बूत करने की माँग की है। आने वाले दिनों में इस विषय पर सदस्य देशों के बीच गहन चर्चा अपेक्षित है, जिसके परिणाम वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था की दिशा तय कर सकते हैं।

(साभार: चाइना मीडिया ग्रुप, बीजिंग)

Point of View

जो चीनी सरकार का मुखपत्र है, इसलिए इसे एकपक्षीय नज़रिए से देखना ज़रूरी है। अमेरिका और जापान का पक्ष इस रिपोर्ट में अनुपस्थित है। वैश्विक परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में जब भी बड़े देश एक-दूसरे पर उँगली उठाते हैं, असली नुकसान उस बहुपक्षीय व्यवस्था का होता है जिसे NPT जैसी संधियाँ बनाए रखने की कोशिश करती हैं।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

NPT का 11वाँ समीक्षा सम्मेलन क्या है?
नाभिकीय अप्रसार संधि (NPT) के तहत हर पाँच वर्ष पर एक समीक्षा सम्मेलन आयोजित होता है, जिसमें सदस्य देश संधि के क्रियान्वयन की समीक्षा करते हैं। 11वाँ समीक्षा सम्मेलन 2026 में आयोजित हो रहा है, जिसमें परमाणु निरस्त्रीकरण और अप्रसार पर चर्चा हो रही है।
चीन ने अमेरिका पर क्या आरोप लगाए?
चीन ने कहा कि अमेरिका पिछले 20 से अधिक वर्षों में एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल संधि, INF संधि और ओपन स्काईज संधि से हट चुका है और START संधि को समाप्त होने दिया। चीन के अनुसार, अमेरिका परमाणु हथियार नियंत्रण और रणनीतिक स्थिरता के क्षेत्र में अराजकता का सबसे बड़ा स्रोत है।
जापान के परमाणु मुद्दे पर चीन की क्या चिंता है?
चीन ने कहा कि साने ताकाइची के पद संभालने के बाद जापान का परमाणु मुद्दा एक वास्तविक खतरा बन गया है। चीन का मानना है कि यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था और परमाणु अप्रसार व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है।
चीन ने सम्मेलन में क्या कार्य दस्तावेज़ प्रस्तुत किया?
चीन ने जापान की परमाणु गतिविधियों के सत्यापन और पर्यवेक्षण को मज़बूत करने से संबंधित एक कार्य दस्तावेज़ सम्मेलन में प्रस्तुत किया है। चीन ने सभी सदस्य देशों से इसका ध्यानपूर्वक अध्ययन करने और इस पर गहन चर्चा करने का आग्रह किया है।
इस बयान का स्रोत क्या है और इसे कैसे देखें?
यह बयान चाइना मीडिया ग्रुप (CMG) के माध्यम से आया है, जो चीनी सरकार का आधिकारिक मीडिया संगठन है। इसलिए यह चीन का एकपक्षीय दृष्टिकोण है; अमेरिका और जापान की प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट में शामिल नहीं है।
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