4 जुलाई 2026
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अमरनाथ यात्रा 2026: पहले दिन 12,340 श्रद्धालुओं ने किए बाबा बर्फानी के दर्शन, तीसरा जत्था जम्मू से रवाना

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अमरनाथ यात्रा 2026: पहले दिन 12,340 श्रद्धालुओं ने किए बाबा बर्फानी के दर्शन, तीसरा जत्था जम्मू से रवाना

सारांश

अमरनाथ यात्रा 2026 का आगाज़ भव्य रहा — पहले ही दिन 12,340 श्रद्धालुओं ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए और तीसरा जत्था जम्मू से रवाना हो गया। 57 दिनों की यह यात्रा 28 अगस्त को रक्षाबंधन पर संपन्न होगी, लेकिन बिना पंजीकरण पहुँचने वाले श्रद्धालुओं को लेकर प्रशासन ने सख्त एडवाइजरी जारी की है।

मुख्य बातें

4 जुलाई 2026 को यात्रा के पहले दिन 12,340 श्रद्धालुओं ने अमरनाथ गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन किए।
4,800 से अधिक श्रद्धालुओं का तीसरा जत्था भगवती नगर यात्री निवास, जम्मू से बालटाल और नुनवान के लिए रवाना हुआ।
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने एडवाइजरी जारी कर श्रद्धालुओं को केवल निर्धारित तिथि पर यात्रा करने का निर्देश दिया।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत प्रतिदिन यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की अधिकतम संख्या तय की गई है।
57 दिवसीय अमरनाथ यात्रा 28 अगस्त 2026 को श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन पर संपन्न होगी।

अमरनाथ यात्रा 2026 के पहले दिन शुक्रवार, 4 जुलाई को देशभर से आए 12,340 श्रद्धालुओं ने अमरनाथ गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। इसके अगले दिन शनिवार तड़के 4,800 से अधिक श्रद्धालुओं का तीसरा जत्था कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जम्मू से कश्मीर घाटी के लिए रवाना हुआ। 57 दिनों तक चलने वाली इस वार्षिक यात्रा का समापन 28 अगस्त 2026 को श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन के अवसर पर होगा।

मुख्य घटनाक्रम

अधिकारियों के अनुसार, श्रद्धालु बालटाल और नुनवान (पहलगाम) — दोनों आधार शिविरों से पवित्र गुफा तक पहुँचे। पूरे मार्ग पर 'बम-बम भोले', 'हर-हर महादेव' और 'जय बर्फानी बाबा' के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

शुक्रवार सुबह गुफा क्षेत्र में आंशिक बादल छाए रहे और कुछ समय के लिए हल्की बारिश भी हुई, लेकिन अधिकारियों के अनुसार इसका यात्रा पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ा। सुबह के समय श्रद्धालुओं की संख्या अपेक्षाकृत कम रही, परंतु दोपहर बाद भीड़ तेज़ी से बढ़ी और देर शाम तक दर्शन का सिलसिला जारी रहा।

तीसरे जत्थे की रवानगी

शनिवार तड़के जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से 4,800 से अधिक श्रद्धालुओं का तीसरा जत्था दो सुरक्षा काफिलों में बालटाल और नुनवान आधार शिविरों के लिए रवाना किया गया। प्रशासन ने जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग, दोनों यात्रा मार्गों और पवित्र गुफा क्षेत्र में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की है।

भगवती नगर यात्री निवास और तवी नदी के तट पर भी विशेष सुरक्षा तैनाती की गई है, जहाँ श्रद्धालुओं के लिए तत्काल (ऑन-द-स्पॉट) पंजीकरण और टोकन वितरण की प्रक्रिया भी जारी है।

प्रशासन की एडवाइजरी

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी करते हुए श्रद्धालुओं से केवल अपनी पंजीकरण की निर्धारित तिथि पर ही यात्रा करने की अपील की है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी श्रद्धालु को तय तारीख से पहले यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी।

प्रशासन ने यह भी बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार प्रतिदिन यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की अधिकतम संख्या तय की गई है, और सुरक्षा एवं सुचारू संचालन के लिए इस सीमा का पालन अनिवार्य है। बिना पंजीकरण के पहुँचने वाले श्रद्धालुओं को तत्काल पंजीकरण के ज़रिए समायोजित करना संभव नहीं बताया गया है।

पंजीकरण व्यवस्था

यात्रा शुरू होने से पहले ही देशभर की बैंक शाखाओं और ऑनलाइन माध्यमों से अग्रिम पंजीकरण की व्यवस्था की गई थी। अधिकांश श्रद्धालु इस सुविधा का लाभ उठाकर पहले ही पंजीकरण करा चुके हैं, जिससे तत्काल पंजीकरण की सीटें बेहद सीमित रह गई हैं।

कुछ यात्रियों ने सुझाव दिया है कि रोज़ाना बड़ी संख्या में पहुँच रहे श्रद्धालुओं को देखते हुए श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड (SASB) को तत्काल पंजीकरण काउंटरों की संख्या बढ़ानी चाहिए। वहीं, अधिकांश श्रद्धालुओं ने SASB और जम्मू-कश्मीर प्रशासन की समग्र व्यवस्थाओं की सराहना की है।

यात्रा का आगामी कार्यक्रम

प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि प्रत्येक श्रद्धालु को बाबा बर्फानी के दर्शन का अवसर मिलेगा, लेकिन यह निर्धारित प्रक्रिया और उपलब्ध क्षमता के अनुसार ही संभव होगा। 57 दिवसीय यह यात्रा 28 अगस्त 2026 को श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन के पावन पर्व के साथ संपन्न होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

340 श्रद्धालुओं का आँकड़ा प्रशासनिक तैयारियों की सफलता को दर्शाता है, लेकिन तत्काल पंजीकरण काउंटरों की कमी और बिना पंजीकरण पहुँचने वाले श्रद्धालुओं की समस्या यह संकेत देती है कि माँग और क्षमता के बीच की खाई अभी पूरी तरह नहीं पटी है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तय दैनिक सीमा पर्यावरणीय और सुरक्षा दोनों कारणों से ज़रूरी है, परंतु इसका प्रभावी संचार श्रद्धालुओं तक पहले से पहुँचना चाहिए था। यात्रा मार्ग पर बहुस्तरीय सुरक्षा तैनाती सराहनीय है, किंतु 57 दिनों की लंबी यात्रा में मौसम और भीड़ प्रबंधन की असली परीक्षा आने वाले हफ्तों में होगी।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमरनाथ यात्रा 2026 कब शुरू हुई और कब समाप्त होगी?
अमरनाथ यात्रा 2026 का आरंभ 4 जुलाई को हुआ और यह 57 दिनों तक चलेगी। यात्रा का समापन 28 अगस्त 2026 को श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन के पावन अवसर पर होगा।
अमरनाथ यात्रा के पहले दिन कितने श्रद्धालुओं ने दर्शन किए?
यात्रा के पहले दिन शुक्रवार, 4 जुलाई 2026 को देशभर से आए 12,340 श्रद्धालुओं ने अमरनाथ गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन किए। श्रद्धालु बालटाल और नुनवान (पहलगाम) दोनों आधार शिविरों से पहुँचे।
अमरनाथ यात्रा के लिए पंजीकरण कैसे होता है और क्या बिना पंजीकरण यात्रा हो सकती है?
यात्रा के लिए देशभर की बैंक शाखाओं और ऑनलाइन माध्यमों से अग्रिम पंजीकरण की व्यवस्था है। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना पंजीकरण के पहुँचने वाले श्रद्धालुओं को तत्काल पंजीकरण के ज़रिए समायोजित करना संभव नहीं है और उन्हें अपनी बारी का इंतज़ार करना होगा।
अमरनाथ यात्रा 2026 में प्रतिदिन कितने श्रद्धालु जा सकते हैं?
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार प्रतिदिन यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की अधिकतम संख्या तय की गई है। सुरक्षा और यात्रा के सुचारू संचालन के लिए इस सीमा का पालन अनिवार्य है, हालाँकि प्रशासन ने सटीक दैनिक संख्या सार्वजनिक रूप से नहीं बताई है।
अमरनाथ यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कैसी है?
प्रशासन ने जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग, बालटाल और पहलगाम दोनों यात्रा मार्गों तथा पवित्र गुफा क्षेत्र में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। भगवती नगर यात्री निवास और तवी नदी के तट पर भी विशेष सुरक्षा तैनाती की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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