अमरनाथ यात्रा 2026: 4.14 लाख श्रद्धालुओं ने किए बाबा बर्फानी के दर्शन, 24 दिनों में बड़ा पड़ाव
सारांश
मुख्य बातें
अमरनाथ यात्रा 2026 ने 26 जुलाई को एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार किया, जब 3 जुलाई से शुरू हुई इस पवित्र तीर्थयात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं की कुल संख्या 4.14 लाख से अधिक हो गई। कश्मीर हिमालय में 3,880 मीटर की ऊँचाई पर स्थित इस गुफा मंदिर तक पहुँचने का सिलसिला बिना रुके जारी है, और श्रद्धालुओं का उत्साह किसी भी चुनौती के सामने कम नहीं पड़ा।
मुख्य घटनाक्रम
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, जो श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड (SASB) के अध्यक्ष भी हैं, ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, "भगवान शिव की कृपा से, पवित्र श्री अमरनाथ जी यात्रा ने एक अहम पड़ाव पार कर लिया है और 4 लाख से ज़्यादा तीर्थयात्रियों ने यह पवित्र यात्रा पूरी कर ली है।" उन्होंने आगे कहा, "अब तक 4.14 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं। मैं इस आशीर्वाद के लिए बाबा अमरनाथ को नमन करता हूँ और उन सभी का दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ, जिन्होंने इस यात्रा को सभी के लिए सचमुच एक दिव्य अनुभव बनाने में मदद की।"
रविवार को 4,474 यात्रियों का एक नया जत्था जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से उत्तरी कश्मीर के बालटाल बेस कैंप के लिए रवाना हुआ। अब तक के कुल श्रद्धालुओं में से लगभग 1.20 लाख तीर्थयात्रियों ने जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप से अपनी यात्रा आरंभ की थी।
यात्रा मार्ग और सुरक्षा व्यवस्था
यात्री दो मार्गों से गुफा मंदिर तक पहुँच सकते हैं — 47 किमी लंबा पारंपरिक नुनवान (पहलगाम) रूट और 14 किमी लंबा बालटाल बेस कैंप रूट। बालटाल रूट से जाने वाले श्रद्धालु दर्शन के बाद उसी दिन वापस लौट सकते हैं, जबकि पहलगाम रूट से गुफा तक पहुँचने में चार दिन का समय लगता है।
फ़िलहाल रास्ते के रखरखाव कार्य के कारण दक्षिण कश्मीर के पहलगाम रूट से यात्रा अस्थायी रूप से रोक दी गई है। जम्मू बेस कैंप से रवाना होने वाले तीर्थयात्रियों को कड़े सुरक्षा इंतज़ामों के बीच सुरक्षा काफ़िले में कश्मीर ले जाया जाता है। इसके अतिरिक्त, सुरक्षा कारणों से दोनों बेस कैंप के आगे के क्षेत्र को 'नो-फ्लाई ज़ोन' घोषित किए जाने के कारण इस वर्ष तीर्थयात्रियों के लिए कोई हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध नहीं है।
बाबा बर्फानी की महिमा
समुद्र तल से 3,880 मीटर की ऊँचाई पर स्थित इस गुफा मंदिर में बर्फ से निर्मित एक प्राकृतिक संरचना है, जो चंद्रमा की कलाओं के साथ घटती-बढ़ती रहती है। श्रद्धालुओं की आस्था है कि यह बर्फ की संरचना भगवान शिव की अलौकिक शक्तियों का प्रतीक है। यह यात्रा हर वर्ष लाखों भक्तों को आकर्षित करती है और हिंदू धर्म की सबसे कठिन एवं पवित्र तीर्थयात्राओं में से एक मानी जाती है।
यात्रा का समापन और आगे की राह
यह पवित्र यात्रा 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन के पर्व के अवसर पर संपन्न होगी। यात्रा के शेष सप्ताहों में श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है, विशेषकर पहलगाम मार्ग के पुनः खुलने के बाद।