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बेरूत पर हमले की सूरत में ईरान देगा सैन्य जवाब, अराघची की इजरायल को दो टूक चेतावनी

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बेरूत पर हमले की सूरत में ईरान देगा सैन्य जवाब, अराघची की इजरायल को दो टूक चेतावनी

सारांश

बेरूत पर इजरायली हमले की आहट के बीच ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने सीधा सैन्य जवाब देने की चेतावनी दी है। साथ ही उन्होंने माना कि अमेरिका से पाकिस्तान की मध्यस्थता वाली वार्ता जारी है, लेकिन कोई बड़ी प्रगति नहीं। आईआरजीसी के कुवैत-बहरीन हमलों ने तनाव और बढ़ा दिया है।

मुख्य बातें

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बेरूत पर इजरायली हमले की सूरत में सैन्य जवाब देने की चेतावनी दी।
बयान 4 जून को लेबनानी चैनल अल मयादीन को दिए इंटरव्यू में दिया गया।
तेहरान-वॉशिंगटन वार्ता पाकिस्तान की मध्यस्थता से जारी, एमओयू पर काम चल रहा है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वार्ता रुकने की रिपोर्टों का खंडन किया।
आईआरजीसी ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल-ड्रोन हमले का दावा किया।

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 4 जून को साफ चेतावनी दी कि अगर इजरायल ने बेरूत पर हमला किया, तो तेहरान सैन्य जवाबी कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि ईरान ने सभी पक्षों को स्पष्ट कर दिया है कि लेबनान की राजधानी पर किसी भी हमले को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसा कदम क्षेत्र में फिर से पूर्ण युद्ध भड़काने का कारण बन सकता है।

अराघची का बयान और संदर्भ

लेबनानी टीवी चैनल अल मयादीन को बुधवार (स्थानीय समयानुसार) दिए इंटरव्यू में अराघची ने कहा कि ईरानी सेना पूरी तरह तैयार है और बेरूत पर हमले की स्थिति में इजरायल के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायल ने हाल के दिनों में ईरान और लेबनान — दोनों मोर्चों पर युद्धविराम का उल्लंघन किया है।

ईरान-लेबनान की जुड़ी हुई स्थिति

अराघची ने कहा कि मौजूदा संघर्ष में ईरान और लेबनान की स्थिति एक-दूसरे से जुड़ी हुई है, इसलिए किसी भी युद्धविराम या समझौते में दोनों देशों को शामिल किया जाना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्रीय तनाव कथित तौर पर एक नए चरण की ओर बढ़ रहा है।

अमेरिका के साथ बातचीत का हाल

विदेश मंत्री ने बताया कि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच संदेशों के आदान-प्रदान के जरिए बातचीत जारी है, लेकिन अभी तक कोई बड़ी प्रगति नहीं हुई है। दोनों पक्ष आपस में भेजे गए मसौदों की समीक्षा कर रहे हैं और अंतिम समझौते का स्वरूप तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं।

अराघची ने दोहराया कि ईरान ‘सम्मान और गरिमा पर आधारित शांति और सुरक्षा’ चाहता है और युद्ध नहीं चाहता। उन्होंने यह भी जोड़ा कि तेहरान ने बातचीत के प्रस्तावों का सकारात्मक जवाब दिया है, हालांकि ईरानी सेना किसी भी समय सैन्य अभियान शुरू करने और लंबे समय तक युद्ध लड़ने की क्षमता रखती है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता और ट्रंप का खंडन

पिछले कुछ हफ्तों में ईरान और अमेरिका ने पाकिस्तान की मध्यस्थता के जरिए शांति की शर्तों से जुड़े कई प्रस्तावों का आदान-प्रदान किया है। दोनों देश युद्ध समाप्त करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) को अंतिम रूप देने पर काम कर रहे बताए जा रहे हैं।

ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने सोमवार को रिपोर्ट दी थी कि लेबनान में इजरायल की ताज़ा कार्रवाइयों के विरोध में तेहरान ने वॉशिंगटन के साथ मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान रोक दिया है। कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस खबर का खंडन करते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत तेज़ी से जारी है।

आईआरजीसी की जवाबी कार्रवाई

इससे पहले बुधवार को ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया कि उसने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। यह कार्रवाई ईरान के दक्षिणी केश्म द्वीप पर स्थित आईआरजीसी के एक संचार टावर पर अमेरिका द्वारा रात में किए गए कथित हमले के जवाब में की गई।

आने वाले दिनों में बेरूत मोर्चे पर इजरायली रुख और तेहरान-वॉशिंगटन वार्ता की दिशा ही तय करेगी कि क्षेत्र में युद्धविराम बचेगा या टकराव और गहराएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी ओर आईआरजीसी कुवैत-बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा कर रहा है — यह दोहरी रणनीति वार्ता की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है। पाकिस्तान की मध्यस्थ-भूमिका भी कूटनीतिक रूप से उल्लेखनीय है, क्योंकि यह पारंपरिक खाड़ी मध्यस्थों से अलग एक नया अक्ष बना रही है। ट्रंप का खंडन और तस्नीम की रिपोर्ट के बीच का अंतर बताता है कि ज़मीनी हालात और सार्वजनिक संदेश में फासला बढ़ रहा है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अब्बास अराघची ने बेरूत को लेकर क्या चेतावनी दी है?
ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने कहा है कि अगर इजरायल ने बेरूत पर हमला किया, तो ईरान सैन्य जवाबी कार्रवाई करेगा। उन्होंने यह बयान 4 जून को लेबनानी चैनल अल मयादीन को दिए इंटरव्यू में दिया।
ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत किसकी मध्यस्थता से हो रही है?
दोनों देशों के बीच बातचीत पाकिस्तान की मध्यस्थता के जरिए चल रही है। पिछले कुछ हफ्तों में शांति की शर्तों से जुड़े कई प्रस्तावों का आदान-प्रदान हुआ है और एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) को अंतिम रूप देने पर काम जारी है।
आईआरजीसी ने हाल में किन देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा किया है?
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने बुधवार को कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया। यह कार्रवाई दक्षिणी केश्म द्वीप पर आईआरजीसी के एक संचार टावर पर अमेरिका के कथित हमले के जवाब में बताई गई।
क्या ईरान-अमेरिका वार्ता रुकी हुई है?
ईरानी एजेंसी तस्नीम ने सोमवार को रिपोर्ट दी थी कि तेहरान ने वॉशिंगटन से मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान रोक दिया है। हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसका खंडन करते हुए कहा कि बातचीत तेज़ी से जारी है।
ईरान बेरूत पर हमले को ‘रेड लाइन’ क्यों मान रहा है?
अराघची के अनुसार, मौजूदा संघर्ष में ईरान और लेबनान की स्थिति आपस में जुड़ी हुई है। इसी वजह से तेहरान का कहना है कि किसी भी युद्धविराम या समझौते में दोनों देशों को शामिल किया जाना चाहिए और बेरूत पर हमला पूर्ण युद्ध की वजह बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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