क्या यूएस-इजरायल फिर से हमला करेंगे? ईरान जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार: अराघची
सारांश
Key Takeaways
- ईरान अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध नहीं चाहता।
- दोबारा हमले पर जवाब देने के लिए तैयार हैं।
- बातचीत आपसी सम्मान पर आधारित होनी चाहिए।
- ईरान में बढ़ती महंगाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
- अमेरिका का हस्तक्षेप ईरान के आंतरिक मामलों में विवादास्पद है।
बेरूत, ८ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि उनका देश इजरायल या अमेरिका के साथ युद्ध नहीं चाहता, लेकिन यदि पुनः हमला हुआ तो वे जवाब देने के लिए तैयार हैं।
गुरुवार को बेरूत पहुंचने पर अब्बास अराघची ने संवाददाताओं से कहा कि ईरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर अमेरिका के साथ बातचीत के लिए भी तत्पर है, बशर्ते यह बातचीत वॉशिंगटन के "हुक्म" के बजाय आपसी सम्मान पर आधारित हो।
अराघची की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब कई लोग चिंतित हैं कि यह जून में हुए १२ दिन के इजरायल-ईरान संघर्ष जैसा हो सकता है, जिसमें अमेरिका ने ईरान की महत्वपूर्ण न्यूक्लियर इकाइयों पर हमले किए थे।
लेबनान के दो दिन के दौरे की शुरुआत में, बेरूत में अराघची ने दावा किया, "अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर अपने हमले को परीक्षण किया। लेकिन यह हमला और रणनीति पूरी तरह से विफल रही। यदि वे इसे दोहराते हैं, तो उन्हें वही परिणाम भुगतने होंगे।"
अराघची ने यह भी कहा, "हम किसी भी विकल्प के लिए तैयार हैं। हम युद्ध नहीं चाहते लेकिन हम इसके लिए तैयार हैं।"
उन्होंने कहा कि तेहरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बातचीत के लिए तैयार है, "लेकिन मेरा कहना है कि बातचीत आपसी सम्मान और आपसी हितों पर आधारित होनी चाहिए।"
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा, "हम मानते हैं कि जब अमेरिकी इस नतीजे पर पहुंचेंगे कि हुक्म चलाने के बजाय रचनात्मक और सकारात्मक बातचीत ही सही मार्ग है, तो इसके परिणाम लाभदायक होंगे।"
ईरान में लोग बढ़ती महंगाई और अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर हैं। लगातार दूसरे सप्ताह विरोध प्रदर्शन जारी हैं, जिसमें गोलीबारी भी हुई है। बिगड़ते हालात पर अमेरिका ने हाल ही में टिप्पणी की। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा था कि अगर ईरानी सरकार अपनी कार्रवाई नहीं रोकती है, तो ईरानी नागरिकों की सुरक्षा के लिए अमेरिका हस्तक्षेप कर सकता है।
तेहरान ने इस बयान पर नाराजगी जताई है और इसे अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप और भ्रामक करार दिया है।