ईरानी विदेश मंत्री अराघची और लेबनान के स्पीकर बेरी ने इजरायली हमलों को बताया 'क्रूर', वैश्विक हस्तक्षेप की अपील
सारांश
Key Takeaways
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और लेबनान की संसद के स्पीकर नबीह बेरी ने 1 मई 2026 को टेलीफोन पर हुई बातचीत में दक्षिणी लेबनान में इजरायल की "क्रूर" कार्रवाइयों की कड़ी निंदा करते हुए इन्हें तत्काल रोकने के लिए वैश्विक प्रयासों की अपील की। ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन हमलों में हजारों लोग मारे गए और घायल हुए हैं, रिहायशी इलाकों और बुनियादी ढाँचे को व्यापक नुकसान पहुँचा है और बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं।
बातचीत में क्या हुआ
ईरान के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने लेबनान और पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति, ईरान-अमेरिका के बीच जारी शांति वार्ता और अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। दोनों ने आपसी परामर्श और समन्वय जारी रखने पर भी सहमति जताई।
अराघची ने स्पष्ट किया कि लेबनान के खिलाफ इजरायल की "आक्रामकता" को रोकना ईरान और अमेरिका के बीच हुए युद्धविराम समझौते का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि भविष्य में किसी भी कूटनीतिक प्रक्रिया में ईरान इस मुद्दे को केंद्रीय महत्व देगा। वहीं, नबीह बेरी ने लेबनान में इजरायल की कार्रवाइयों के लिए उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेह ठहराने की आवश्यकता पर जोर दिया।
युद्धविराम की पृष्ठभूमि
इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम 16-17 अप्रैल की मध्यरात्रि से लागू हुआ, जो कई हफ्तों तक चली सीमा-पार झड़पों के बाद संभव हो सका। 23 अप्रैल को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि मौजूदा 10 दिन का युद्धविराम तीन हफ्तों के लिए बढ़ाया जाएगा।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने तेहरान और अन्य ईरानी शहरों पर संयुक्त हमले किए थे, जिनमें ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई, वरिष्ठ कमांडर और आम नागरिक मारे गए थे। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल व ड्रोन हमले किए और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ कड़ी कर दी।
होर्मुज़ और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चिंता
एक अलग बातचीत में अराघची ने अपने स्विस समकक्ष इग्नाज़ियो कासिस से कहा कि क्षेत्रीय समुद्री मार्गों — खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य — में असुरक्षा, अमेरिका और इजरायल की "आक्रामकता" का सीधा परिणाम है। कासिस ने युद्ध समाप्त करने और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए कूटनीतिक रास्ते का समर्थन करने की स्विट्ज़रलैंड की नीति दोहराई।
यह ऐसे समय में आया है जब 8 अप्रैल से ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच युद्धविराम लागू हुआ और इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका प्रतिनिधियों के बीच लंबी वार्ताएँ हुईं, लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं हो सका। इसके बाद अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नाकेबंदी का ऐलान कर दिया।
अमेरिकी दूतावास का रुख
इसी बीच, लेबनान में अमेरिकी दूतावास ने एक अलग बयान में कहा कि वह लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच संभावित बैठक का समर्थन करता है। यह कदम संकेत देता है कि अमेरिका लेबनान और इजरायल के बीच सीधे कूटनीतिक संपर्क को प्रोत्साहित करने की कोशिश कर रहा है, भले ही ज़मीनी हालात अस्थिर बने हुए हों।
आगे क्या
क्षेत्र में तनाव कम होने के कोई स्पष्ट संकेत अभी नहीं हैं। ईरान और लेबनान दोनों इजरायल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की कोशिश में हैं, जबकि अमेरिका कूटनीतिक समाधान की दिशा में अपनी भूमिका को संतुलित करने का प्रयास कर रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर नाकेबंदी और चल रही वार्ताओं के बीच, इस पूरे क्षेत्र का भविष्य आने वाले हफ्तों में तय होगा।