अमेरिकी रक्षा मंत्री हेगसेथ का बड़ा बयान: ट्रंप को 60 दिन बाद युद्ध के लिए संसद की मंजूरी जरूरी नहीं

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अमेरिकी रक्षा मंत्री हेगसेथ का बड़ा बयान: ट्रंप को 60 दिन बाद युद्ध के लिए संसद की मंजूरी जरूरी नहीं

सारांश

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कांग्रेस की सुनवाई में दावा किया कि ईरान के साथ सीजफायर ने वॉर पावर्स एक्ट की 60 दिन की घड़ी रोक दी है, इसलिए ट्रंप को संसदीय मंजूरी की जरूरत नहीं। यह बयान अमेरिकी संसद में राष्ट्रपति की युद्ध शक्तियों को लेकर नई बहस छेड़ सकता है।

Key Takeaways

रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने 1 मई 2026 को कहा कि ट्रंप को ईरान युद्ध जारी रखने के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी नहीं। हेगसेथ का तर्क — 7 अप्रैल के सीजफायर ने वॉर पावर्स एक्ट की 60 दिन की समय सीमा रोक दी; संघर्ष करीब 40 दिन चला। 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरानी सुप्रीम लीडर अली खामेनेई और बड़ी संख्या में नागरिक मारे गए थे। पुतिन ने ट्रंप से फोन पर सीजफायर विस्तार का समर्थन किया; चेतावनी दी कि दोबारा हमला हुआ तो वैश्विक परिणाम होंगे। डेमोक्रेटिक सेनेटर टिम केन ने कांग्रेस की मंजूरी न लेने पर सवाल उठाए।

अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने 1 मई 2026 को अमेरिकी संसद (कांग्रेस) की सुनवाई में कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 60 दिन से अधिक युद्ध जारी रखने के लिए कांग्रेस की मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं है। यह बयान तब आया जब डेमोक्रेटिक सेनेटर टिम केन ने हेगसेथ से पूछा कि क्या ट्रंप प्रशासन वॉर पावर्स एक्ट के तहत ईरान के साथ युद्ध के 60 दिन पूरे होने पर कांग्रेस से इजाजत माँगेगा।

हेगसेथ का तर्क: सीजफायर ने रोकी 60 दिन की घड़ी

हेगसेथ ने अपने बचाव में कहा कि ईरान के साथ हुए संघर्ष विराम (सीजफायर) ने 60 दिन की समय सीमा को रोक दिया है। उनके अनुसार, अमेरिका-ईरान संघर्ष 7 अप्रैल को रुक गया था, जिसका अर्थ है कि सक्रिय युद्ध करीब 40 दिन चला। इस तर्क के आधार पर उन्होंने कहा कि वॉर पावर्स एक्ट की 60 दिन की बाध्यता अभी पूरी नहीं हुई है।

कैसे शुरू हुआ था संघर्ष

सिन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने मिलकर तेहरान और ईरान के अन्य शहरों पर हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के तत्कालीन सुप्रीम लीडर अली खामेनेई, वरिष्ठ कमांडर और बड़ी संख्या में आम नागरिक मारे गए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने 2 मार्च को कांग्रेस को ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान की जानकारी दी थी, जिससे 1 मई 60 दिन का महत्वपूर्ण पड़ाव बन गया।

पुतिन-ट्रंप फोन वार्ता: ईरान और यूक्रेन पर चर्चा

इस हफ्ते की शुरुआत में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत हुई। क्रेमलिन के अनुसार, दोनों नेताओं ने व्हाइट हाउस प्रेस डिनर में हुई हालिया शूटिंग, ईरान की स्थिति और यूक्रेन संकट पर विस्तार से चर्चा की। डेढ़ घंटे से अधिक चली इस बातचीत के बाद बुधवार को रूसी राष्ट्रपति के सहयोगी यूरी उशाकोव ने बताया कि पुतिन ने व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन डिनर में ट्रंप पर हुए जानलेवा हमले की कड़ी निंदा की।

पुतिन की चेतावनी: दोबारा हमला हुआ तो होगा वैश्विक असर

क्रेमलिन के अनुसार, उशाकोव ने बताया कि पुतिन ने सीजफायर बढ़ाने के ट्रंप के फैसले को सही कदम माना, क्योंकि इससे क्षेत्रीय स्थिरता में मदद मिलेगी। साथ ही, पुतिन ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका और इजरायल दोबारा सैन्य बल का प्रयोग करते हैं, तो इसके परिणाम न केवल ईरान और उसके पड़ोसी देशों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए गंभीर हो सकते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव पहले से ही चरम पर है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थायी शांति की माँग कर रहा है।

Point of View

NationPress
01/05/2026

Frequently Asked Questions

वॉर पावर्स एक्ट के तहत 60 दिन का नियम क्या है?
वॉर पावर्स एक्ट 1973 के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को किसी भी सैन्य अभियान की जानकारी कांग्रेस को देने के 60 दिन के भीतर या तो युद्ध समाप्त करना होगा या कांग्रेस से मंजूरी लेनी होगी। ट्रंप ने 2 मार्च को कांग्रेस को ईरान अभियान की जानकारी दी थी, जिससे 1 मई यह समय सीमा बनी।
हेगसेथ ने कांग्रेस की मंजूरी क्यों जरूरी नहीं बताई?
हेगसेथ का तर्क है कि ईरान के साथ 7 अप्रैल को हुए सीजफायर ने 60 दिन की घड़ी को रोक दिया है। उनके अनुसार सक्रिय युद्ध केवल करीब 40 दिन चला, इसलिए वॉर पावर्स एक्ट की बाध्यता अभी लागू नहीं होती।
अमेरिका-ईरान संघर्ष कब और कैसे शुरू हुआ?
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर तेहरान और ईरान के अन्य शहरों पर हमले किए, जिसमें सुप्रीम लीडर अली खामेनेई, वरिष्ठ कमांडर और बड़ी संख्या में आम नागरिक मारे गए। 7 अप्रैल को सीजफायर के साथ संघर्ष रुका।
पुतिन और ट्रंप की फोन वार्ता में क्या हुआ?
क्रेमलिन के अनुसार डेढ़ घंटे से अधिक चली बातचीत में दोनों नेताओं ने ईरान की स्थिति, यूक्रेन संकट और व्हाइट हाउस प्रेस डिनर में हुई शूटिंग पर चर्चा की। पुतिन ने सीजफायर विस्तार का समर्थन किया और चेतावनी दी कि दोबारा हमला हुआ तो वैश्विक परिणाम होंगे।
इस विवाद का भविष्य में क्या असर हो सकता है?
यदि हेगसेथ का तर्क स्वीकार होता है तो यह एक ऐसी मिसाल बनेगी जिसमें कोई भी राष्ट्रपति अस्थायी सीजफायर का उपयोग कर कांग्रेस की युद्ध संबंधी निगरानी से बच सकता है। इससे अमेरिकी संविधान में शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत पर गंभीर सवाल उठते हैं।
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