ईरान-इराक संबंध अटूट हैं, व्यक्तिगत बयानों से नहीं पड़ेगा असर: अराघची
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 19 जुलाई को अपने इराकी समकक्ष फुआद हुसैन से टेलीफोन पर बातचीत की और स्पष्ट किया कि तेहरान और बगदाद के बीच के गहरे द्विपक्षीय संबंधों पर किसी व्यक्तिगत या अनाधिकारिक बयान का कोई प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। यह बातचीत ऐसे समय में हुई जब अमेरिकी सैन्य हमलों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर है।
बातचीत में क्या हुआ
अराघची ने ईरान-इराक संबंधों को गहरा और रणनीतिक बताया, जो सदियों पुराने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों पर टिके हैं। उन्होंने कहा कि ईरान आपसी सम्मान और अच्छे पड़ोसी होने के सिद्धांत पर इराक की सरकार और जनता के साथ संबंधों को और प्रगाढ़ करना चाहता है।
दोनों विदेश मंत्रियों ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य हमले के बाद उभरे नए क्षेत्रीय घटनाक्रम, इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग के बार-बार उल्लंघन और इन कार्रवाइयों पर ईरान की प्रतिक्रिया पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। साथ ही, क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ने से रोकने के लिए निरंतर द्विपक्षीय परामर्श और समन्वय की ज़रूरत पर बल दिया।
अमेरिकी हमले और ईरानी नुकसान
इस बातचीत की पृष्ठभूमि में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने पुष्टि की कि जॉर्डन में हुए ईरानी हमले में दो अमेरिकी सैनिक मारे गए और एक अन्य लापता है। इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ हवाई हमलों का नया दौर शुरू किया।
सेंटकॉम ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा, 'ये हमले होर्मुज जलडमरूमध्य में कमर्शियल शिपिंग को धमकाने की ईरान की क्षमता को और कमज़ोर करने और उन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) बलों को तत्काल जवाब देने के लिए किए गए हैं, जिन्होंने कल रात जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हमला किया था।'
ईरान में हताहतों की संख्या
ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, पिछले दिन हुए अमेरिकी हमलों में कम से कम 12 लोगों की मौत हुई, जिससे इस नए संघर्ष में मरने वालों की कुल संख्या 50 हो गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता हुसैन केरमानपुर ने बताया कि 27 जून से अब तक अमेरिकी हमलों में कम से कम 500 लोग घायल हुए हैं, जिनमें पाँच महिलाएँ और दो बच्चे भी शामिल हैं।
क्षेत्रीय स्थिरता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान टकराव एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल आपूर्ति पर निर्भर है, और इस क्षेत्र में किसी भी अस्थिरता का वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों पर सीधा असर पड़ता है। इराक, जो ईरान और अमेरिका दोनों के साथ महत्वपूर्ण संबंध रखता है, इस तनाव में एक संवेदनशील स्थिति में है।
आगे क्या होगा
दोनों विदेश मंत्रियों ने आगे भी नियमित द्विपक्षीय परामर्श जारी रखने पर सहमति जताई। क्षेत्रीय विश्लेषकों का मानना है कि इराक की मध्यस्थ भूमिका इस संकट को और गहराने से रोकने में अहम हो सकती है। अमेरिकी सेना के हमलों के नए दौर के बाद अब सभी की निगाहें ईरान की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।