13 जुलाई 2026
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बारामूला में 7 एनसी नेता नजरबंद, श्रीनगर में 13 जुलाई पर कड़ी सुरक्षा; इल्तिजा मुफ्ती ने भी लगाया आरोप

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बारामूला में 7 एनसी नेता नजरबंद, श्रीनगर में 13 जुलाई पर कड़ी सुरक्षा; इल्तिजा मुफ्ती ने भी लगाया आरोप

सारांश

13 जुलाई को शहीद दिवस से पहले जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक तनाव चरम पर — बारामूला में 7 एनसी नेता नजरबंद, श्रीनगर के लाल चौक पर सुरक्षाबलों की तैनाती, और पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती का भी नजरबंदी का आरोप। लोकतांत्रिक अधिकारों बनाम कानून-व्यवस्था की यह बहस हर साल इस तारीख पर नई शक्ल लेती है।

मुख्य बातें

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अनुसार बारामूला जिले के 7 वरिष्ठ नेताओं — जिनमें 5 विधायक शामिल हैं — को 13 जुलाई को पुलिस ने नजरबंद किया।
नेताओं को मजार-ए-शुहादा पर पुष्पांजलि अर्पित करने से रोका गया; पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक गतिविधियों पर अंकुश बताया।
श्रीनगर के लाल चौक और डाउनटाउन में पुलिस व अर्धसैनिक बलों की व्यापक तैनाती; शहीद कब्रिस्तान के आसपास आवाजाही पर रोक।
पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती ने रविवार को ही नजरबंदी का आरोप लगाया और एक्स पर वीडियो साझा कर एनसी सरकार पर भी निशाना साधा।
13 जुलाई को 1931 में डोगरा शासन के विरुद्ध प्रदर्शन में मारे गए 22 कश्मीरियों की याद में शहीद दिवस मनाया जाता है।

जम्मू-कश्मीर की नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) ने आरोप लगाया है कि 13 जुलाई को 'मजार-ए-शुहादा' पर श्रद्धांजलि देने से रोकने के लिए बारामूला जिले के कम-से-कम सात वरिष्ठ नेताओं को पुलिस ने नजरबंद कर दिया। श्रीनगर में भी लाल चौक सहित संवेदनशील इलाकों में सुरक्षाबलों की व्यापक तैनाती की गई है।

किन नेताओं को किया गया नजरबंद

नेशनल कॉन्फ्रेंस की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उरी के विधायक सज्जाद शफी, बारामूला के विधायक जावेद हसन बेग, सोपोर के विधायक इरशाद रसूल कर, गुलमर्ग के विधायक पीरजादा फारूक अहमद शाह और पट्टन के विधायक जावेद रियाद बेदार को पुलिस ने नजरबंद किया। इनके अलावा पार्टी के बारामूला जिला अध्यक्ष शाहिद अली शाह और महिला विंग की जिला अध्यक्ष नीलोफर मसूद को भी हिरासत में लिए जाने की बात कही गई है।

पार्टी का कहना है कि इन सभी नेताओं की योजना 13 जुलाई को मजार-ए-शुहादा पर पुष्पांजलि अर्पित करने की थी, लेकिन पाबंदियों के चलते वे वहाँ पहुँच नहीं सके। नेताओं ने इस कार्रवाई को शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने की कोशिश बताया है।

श्रीनगर में सुरक्षा का व्यापक बंदोबस्त

श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके में स्थित शहीद कब्रिस्तान के आसपास लोगों की आवाजाही पर रोक लगाई गई है और कड़ी निगरानी रखी जा रही है। लाल चौक सहित कई अहम स्थानों पर पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान बड़ी संख्या में तैनात हैं।

अधिकारियों के अनुसार, क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के कब्रिस्तान की ओर जाने की आशंका के मद्देनजर यह सुरक्षा व्यवस्था की गई है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किया गया है।

इल्तिजा मुफ्ती का आरोप और एनसी सरकार पर निशाना

इससे एक दिन पहले, रविवार को पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने भी खुद को नजरबंद किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए लिखा, 'शहीद दिवस से ठीक पहले हमें नजरबंद कर दिया गया है। इसकी वजह सिर्फ जम्मू-कश्मीर पुलिस ही बेहतर जानती है। क्या यही वह 'सामान्य स्थिति' है, जिसके कश्मीर में बहाल होने का दावा किया जाता है?'

इल्तिजा ने नेशनल कॉन्फ्रेंस नीत स्थानीय सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने लिखा, 'इसमें कोई शक नहीं कि स्थानीय सरकार भी पुलिस के साथ मिलकर सिधरा में घर तोड़ने और अपनी सुविधानुसार विरोधियों को हिरासत में लेने का काम कर रही है।' ये आरोप एनसी और पीडीपी के बीच बढ़ती राजनीतिक खाई को भी उजागर करते हैं।

13 जुलाई का ऐतिहासिक संदर्भ

गौरतलब है कि 13 जुलाई जम्मू-कश्मीर में शहीद दिवस के रूप में जाना जाता है। 1931 में इसी दिन डोगरा शासन के विरुद्ध प्रदर्शन कर रहे 22 कश्मीरियों को गोली मार दी गई थी। यह तारीख कश्मीर की राजनीति में गहरे भावनात्मक और ऐतिहासिक महत्व रखती है, और हर वर्ष इस दिन मजार-ए-शुहादा पर राजनीतिक दलों द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित करने की परंपरा रही है। यह पहली बार नहीं है जब इस दिन के आसपास राजनीतिक गतिविधियों पर पाबंदियाँ लगाई गई हों।

आगे की स्थिति

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने नजरबंदी की कड़ी आलोचना करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है। राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं और सुरक्षा बंदोबस्त को देखते हुए 13 जुलाई का दिन जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बार फिर तनाव का केंद्र बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

कब्रिस्तान के इर्द-गिर्द बाधाएँ, और 'सामान्य स्थिति' के दावों पर सवाल। विडंबना यह है कि इस बार एनसी — जो खुद सत्ता में है — अपने नेताओं की नजरबंदी पर आपत्ति जता रही है, जबकि पीडीपी उसी एनसी सरकार पर पुलिस के साथ मिलीभगत का आरोप लगा रही है। यह राजनीतिक अंतर्विरोध बताता है कि सत्ता और प्रशासन के बीच की रेखा कश्मीर में अभी भी धुंधली है। केंद्र और राज्य — दोनों स्तरों पर जवाबदेही का सवाल अनुत्तरित है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बारामूला में किन एनसी नेताओं को नजरबंद किया गया?
नेशनल कॉन्फ्रेंस की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार उरी के विधायक सज्जाद शफी, बारामूला के विधायक जावेद हसन बेग, सोपोर के विधायक इरशाद रसूल कर, गुलमर्ग के विधायक पीरजादा फारूक अहमद शाह, पट्टन के विधायक जावेद रियाद बेदार, बारामूला जिला अध्यक्ष शाहिद अली शाह और महिला विंग की जिला अध्यक्ष नीलोफर मसूद को 13 जुलाई को नजरबंद किया गया।
मजार-ए-शुहादा क्या है और इसका क्या महत्व है?
मजार-ए-शुहादा श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके में स्थित शहीद कब्रिस्तान है, जहाँ 1931 में डोगरा शासन के विरुद्ध प्रदर्शन के दौरान मारे गए 22 कश्मीरियों को दफनाया गया था। 13 जुलाई को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है और राजनीतिक दल यहाँ पुष्पांजलि अर्पित करने की परंपरा निभाते रहे हैं।
इल्तिजा मुफ्ती ने क्या आरोप लगाए?
पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती ने रविवार को एक्स पर वीडियो साझा कर खुद को नजरबंद किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने एनसी नीत स्थानीय सरकार पर भी पुलिस के साथ मिलकर विरोधियों को हिरासत में लेने और सिधरा में घर तोड़ने का आरोप लगाया।
श्रीनगर में 13 जुलाई को इतनी सुरक्षा क्यों तैनात की गई?
अधिकारियों के अनुसार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया। आशंका थी कि क्षेत्रीय दलों के नेता और कार्यकर्ता शहीद कब्रिस्तान की ओर जा सकते हैं, इसलिए लाल चौक सहित संवेदनशील इलाकों में पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात किए गए तथा कब्रिस्तान के आसपास आवाजाही पर रोक लगाई गई।
क्या 13 जुलाई पर पाबंदियाँ पहले भी लगाई गई हैं?
हाँ, जम्मू-कश्मीर में 13 जुलाई के आसपास राजनीतिक गतिविधियों पर पाबंदियाँ पहले भी लगाई जाती रही हैं। यह पहली बार नहीं है जब शहीद दिवस पर मजार-ए-शुहादा जाने से नेताओं को रोका गया हो; यह सिलसिला वर्षों से चला आ रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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