मानसून सत्र में सपा उठाएगी राम मंदिर चंदा चोरी, नीट पेपर लीक और महंगाई के मुद्दे: पुष्पेंद्र सरोज
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने 19 जुलाई को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में उनकी पार्टी राम मंदिर चंदा चोरी, नीट पेपर लीक, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें और देशभर में जारी धरनों-प्रदर्शनों जैसे ज्वलंत मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाएगी। सरोज ने कहा कि सपा के सांसद संसद में 'चाय-नाश्ते' के लिए नहीं, बल्कि जनता की आवाज़ बुलंद करने आए हैं।
मुख्य मुद्दे और सपा की रणनीति
सरोज ने कहा कि इंडिया गठबंधन के वे सांसद जिन्हें 'खरीदा नहीं गया', वे संसद में जनता के सवाल उठाते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि चाहे कितने भी सांसद पाला बदल लें, विपक्ष की आवाज़ कमज़ोर नहीं होगी। सपा के सभी सांसद एकजुट होकर सदन में डटे रहेंगे।
टीएमसी के 20 बागी सांसदों पर सरोज का आरोप
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों को सदन में बैठने की अनुमति मिलने पर सरोज ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पिछले सत्र और इस सत्र के बीच कई विपक्षी सांसदों को कथित तौर पर डरा-धमकाकर और धन का लालच देकर सत्ता पक्ष की ओर खींचा गया। सरोज ने आरोप लगाया कि इस काम में इस्तेमाल हुआ पैसा राम मंदिर ट्रस्ट से लिया गया था — हालाँकि यह उनका व्यक्तिगत आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सोनम वांगचुक का अनशन और लोकतंत्र पर सवाल
सरोज ने सोनम वांगचुक के 20 दिनों से जारी अनशन का उल्लेख करते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर शनिवार को वांगचुक को उठाए जाने और छात्रों पर कार्रवाई की घटना लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि अन्ना हज़ारे का आंदोलन 11वें दिन समाप्त हो गया था, लेकिन वांगचुक अस्पताल में भी अनशन जारी रखे हुए हैं। सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने बताया कि वांगचुक की पत्नी अस्पताल की सुविधाओं से असंतुष्ट हैं और उन्हें निजी अस्पताल में स्थानांतरित किए जाने की माँग कर रही हैं।
सरकार पर तानाशाही का आरोप
ऑल पार्टी मीटिंग का संदर्भ देते हुए सरोज ने केंद्र सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष की बात सुनने को तैयार नहीं है और केवल अपनी मर्जी से चलना चाहती है। सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) विपक्षहीन लोकतंत्र चाहती है, इसीलिए दलों को तोड़कर सांसदों और विधायकों को अपनी ओर खींचा जा रहा है।
संसदीय प्रक्रिया और पारदर्शिता की माँग
फखरुल हसन चांद ने कहा कि सदन में आने वाले प्रत्येक विधेयक का मसौदा पहले विपक्षी दलों के सामने रखा जाना चाहिए। उन्होंने सदन को सुचारू रूप से चलाने की जिम्मेदारी सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की बताई, लेकिन जोर दिया कि सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी अधिक है। राम मंदिर ट्रस्ट के संदर्भ में सरोज ने माँग की कि कोई भी नया ट्रस्ट पूर्ण पारदर्शिता के साथ बने और उसमें आने वाली धनराशि जनसेवा के कार्यों में लगाई जाए। मानसून सत्र में सपा के तेवर यह संकेत देते हैं कि विपक्ष सरकार को घेरने के लिए पूरी तरह तैयार है।