मानसून सत्र से पहले विपक्ष का हमला: नीट, पेपर लीक और राम मंदिर चढ़ावे पर चर्चा से भाग रही सरकार — गौरव गोगोई
सारांश
मुख्य बातें
संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि वह नीट परीक्षा विवाद, पेपर लीक और राम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं जैसे अहम जनहित के मुद्दों पर संसदीय चर्चा से बच रही है। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई और अन्य विपक्षी नेताओं ने 20 जुलाई को कहा कि सरकार ने अब तक न तो कोई स्पष्ट एजेंडा तय किया है और न ही यह बताया है कि इन मुद्दों पर चर्चा कब होगी।
मुख्य घटनाक्रम
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि नीट, राम मंदिर चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक जैसे विषय सीधे तौर पर आम जनता से जुड़े हैं और पूरे देश की नज़र इन पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि संसद में किन मुद्दों पर बहस होगी और कब होगी।
गोगोई ने कहा, 'लंबे समय से यह साफ़ दिख रहा है कि सरकार प्रमुख मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार नहीं है।' उन्होंने माँग की कि सरकार ऐसा कदम उठाए जिससे जनता को भरोसा हो कि उनकी चिंताओं को संसद में जगह मिलेगी।
विपक्ष की माँगें
कांग्रेस नेता जेबी माथर ने भी सरकार पर विपक्ष की माँगों को नज़रअंदाज़ करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संसद का सुचारू संचालन विपक्ष का भी अधिकार है और इसके लिए सरकार को विपक्ष को विश्वास में लेना होगा। माथर ने स्पष्ट किया कि विपक्ष का उद्देश्य सदन की कार्यवाही बाधित करना नहीं, बल्कि जनता से जुड़े मामलों पर सार्थक चर्चा सुनिश्चित करना है।
माथर ने यह भी आरोप लगाया कि सर्वदलीय बैठक में एनसीपीआई को बुलाए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि मानसून सत्र की शुरुआत ही खराब तरीके से हुई है। विपक्ष ने पेपर लीक समेत अन्य जनहित के मुद्दों पर चर्चा की माँग पहले ही रख दी थी।
सीपीआई का रुख
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के सांसद पी. संतोष ने सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि मानसून सत्र में उनकी पार्टी की सबसे बड़ी माँग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा है। उन्होंने कहा कि नीट और अन्य परीक्षाओं से जुड़े विवादों को लेकर देश में व्यापक नाराज़गी है, लेकिन सरकार इसे गंभीरता से नहीं ले रही।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
गौरतलब है कि नीट-यूजी 2024 परीक्षा में अनियमितताओं के आरोपों ने देशभर में छात्रों और अभिभावकों में गहरी चिंता पैदा की है। पेपर लीक के मामले भी सामने आए, जिनकी जाँच जारी है। इसके साथ ही राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट को मिले चढ़ावे में कथित अनियमितताओं के आरोप भी विपक्ष के निशाने पर हैं। यह ऐसे समय में आया है जब संसद का मानसून सत्र जनता की उम्मीदों के केंद्र में है।
आगे क्या होगा
विपक्षी दलों ने संकेत दिया है कि यदि सरकार इन मुद्दों पर चर्चा के लिए समय नहीं देती, तो सदन में व्यवधान की स्थिति बन सकती है। सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मानसून सत्र में इन मुद्दों पर संसदीय बहस का रुख आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।