नीट पेपर लीक विवाद: गौरव गोगोई का केंद्र पर तीखा हमला, जवाबदेही की माँग
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता और असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने 25 जून 2026 को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया। लोकसभा सांसद गोगोई ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों और आम जनता की चिंताओं पर जवाबदेही दिखाने में पूरी तरह विफल रही है।
मुख्य आरोप और बयान
गोगोई ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'यदि सरकार जनता की वास्तविक चिंताओं का जवाब देने को तैयार नहीं है, तो उसे यह स्पष्ट करना चाहिए कि लोकतांत्रिक जवाबदेही के प्रति उसकी प्रतिबद्धता क्या है।' उन्होंने कहा कि कांग्रेस कथित नीट पेपर लीक और इस पूरे विवाद से निपटने के सरकार के तरीके पर सवाल उठाना जारी रखेगी।
गोगोई के अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में जवाबदेही एक बुनियादी आवश्यकता है और केंद्र सरकार इस कसौटी पर खरी नहीं उतर रही।
परीक्षा प्रणाली पर व्यापक सवाल
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि नीट विवाद देश की परीक्षा और भर्ती प्रणाली से जुड़े गहरे संकट को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर बार-बार उठ रहे सवालों ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) जैसी संस्थाओं पर जनता के भरोसे को कमज़ोर किया है। गोगोई ने आरोप लगाया कि अभ्यर्थियों और हितधारकों के सवालों के समाधान में संस्थागत जवाबदेही की भारी कमी रही है।
समाज के कई वर्गों की पीड़ा का उल्लेख
गोगोई ने अपने बयान में किसानों, अग्निवीरों, छात्राओं और परीक्षा विवादों से प्रभावित अभ्यर्थियों का ज़िक्र करते हुए कहा कि समाज के ये तबके आज भी विभिन्न चुनौतियों से जूझ रहे हैं। उन्होंने सरकार से इन मुद्दों पर अधिक संवेदनशीलता और तत्परता दिखाने की माँग की।
पारदर्शिता और सुधार की माँग
गोगोई ने ज़ोर देकर कहा कि परीक्षा प्रणाली में जनता का विश्वास बहाल करने के लिए पारदर्शिता और समयबद्ध कार्रवाई अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य और रोज़गार के अवसरों से जुड़े मामलों में सरकार को नागरिकों के प्रति जवाबदेह रहना चाहिए। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि विपक्ष परीक्षा की निष्पक्षता, भर्ती प्रक्रियाओं और लोकतांत्रिक जवाबदेही से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाता रहेगा।
आगे क्या
नीट विवाद पर राजनीतिक तापमान बढ़ता दिख रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के लाखों मेडिकल अभ्यर्थी परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि जब तक सरकार एक स्वतंत्र और पारदर्शी जाँच का रास्ता नहीं अपनाती, छात्रों का भरोसा बहाल करना मुश्किल होगा।