नीट विवाद: गौरव गोगोई का मोदी सरकार पर हमला — 'जवाबदेही से बचने को नेहरू पर डाल रहे दोष'
सारांश
मुख्य बातें
असम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा सांसद गौरव गोगोई ने गुरुवार, 23 जुलाई को नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीत केंद्र सरकार अपनी जवाबदेही से बचने के लिए वर्तमान संकट का दोष देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू पर मढ़ रही है।
एक्स पर क्या लिखा गोगोई ने
गोगोई ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के ज़रिये नीट विवाद पर प्रदर्शनकारी छात्रों की माँगों और केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया के बीच तीखा विरोधाभास उजागर किया। उन्होंने लिखा: 'छात्रों की माँग: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। प्रधानमंत्री मोदी का जवाब: फास्ट-ट्रैक कोर्ट। भ्रम की वजह: पंडित नेहरू।' उनका यह तंज़ सरकार की प्राथमिकताओं पर सीधा प्रहार था।
कांग्रेस सांसद का आरोप है कि नीट परीक्षा संचालन में हुई कथित गड़बड़ियों की ज़िम्मेदारी स्वीकारने के बजाय भाजपा नेतृत्व बार-बार ऐतिहासिक हस्तियों का नाम लेकर जनता का ध्यान भटका रहा है।
नीट विवाद की पृष्ठभूमि
यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब देशभर में नीट प्रश्नपत्र लीक और अन्य कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र सड़कों पर उतरे हुए हैं। विपक्षी दल केंद्र सरकार पर देश की सबसे महत्त्वपूर्ण चिकित्सा प्रवेश परीक्षाओं में से एक की निष्पक्षता बनाए रखने में विफल रहने का आरोप लगा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि इस विफलता से लाखों छात्रों का भविष्य दाँव पर लग गया है।
गौरतलब है कि नीट-यूजी परीक्षा भारत में मेडिकल कॉलेजों में दाखिले का एकमात्र राष्ट्रीय द्वार है और इसमें हर वर्ष लाखों अभ्यर्थी शामिल होते हैं। प्रश्नपत्र लीक के आरोप सामने आते ही यह मामला राष्ट्रीय राजनीतिक विवाद बन गया।
विपक्ष की माँग और सरकार का रुख
विपक्षी दलों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग की है। उनका तर्क है कि परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना मंत्रालय की प्रत्यक्ष ज़िम्मेदारी थी, जिसमें वह नाकाम रहा।
दूसरी ओर, BJP ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि केंद्र सरकार मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जाँच के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। पार्टी का कहना है कि विपक्ष इस संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिक लाभ के लिए दुरुपयोग कर रहा है।
सरकार की प्रतिबद्धता
केंद्र सरकार ने दोहराया है कि सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार के अनुसार, जाँच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के विरुद्ध कानून के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। फास्ट-ट्रैक अदालतों के माध्यम से त्वरित न्याय का आश्वासन भी दिया गया है।
आगे क्या
नीट विवाद पर राजनीतिक तापमान फिलहाल बढ़ता ही जा रहा है। विपक्ष संसद में इस मुद्दे को और धार देने की तैयारी में है, जबकि छात्र संगठन देशभर में प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं। जाँच एजेंसियों की रिपोर्ट और न्यायालयों की सुनवाई इस पूरे प्रकरण की दिशा तय करेगी।