22 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सुखोई-57 दुनिया के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों में: रक्षा विशेषज्ञ प्रफुल्ल बख्शी का विश्लेषण

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सुखोई-57 दुनिया के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों में: रक्षा विशेषज्ञ प्रफुल्ल बख्शी का विश्लेषण

सारांश

रूस की Su-57 पेशकश भारत के लिए महज़ एक हथियार सौदा नहीं — यह उस तकनीकी खाई को पाटने का मौका है जो इंजन और एवियोनिक्स में दशकों से बनी है। 29 बनाम 43 स्क्वाड्रन का अंतर बताता है कि भारतीय वायुसेना के लिए यह निर्णय कितना ज़रूरी है।

मुख्य बातें

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत को अत्याधुनिक सुखोई-57 (Su-57) लड़ाकू विमान की पेशकश की है।
रक्षा विशेषज्ञ प्रफुल्ल बख्शी के अनुसार Su-57 ट्विन-इंजन, स्टेल्थ-सक्षम और सुपरसोनिक गति वाला विमान है।
भारतीय वायुसेना की ज़रूरत 42.5–43 स्क्वाड्रन की है, जबकि वर्तमान में केवल 29 स्क्वाड्रन उपलब्ध हैं — 13–14 स्क्वाड्रन की कमी।
भारत को इंजन तकनीक, एवियोनिक्स और ग्लास कॉकपिट जैसी प्रणालियों की सर्वाधिक आवश्यकता है।
अल्जीरिया सहित कुछ देशों के पास Su-57 पहले से उपलब्ध है और कथित तौर पर आपूर्ति भी शुरू हो चुकी है।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा भारत को अत्याधुनिक सुखोई-57 (Su-57) लड़ाकू विमान की पेशकश के बाद रक्षा हलकों में इस प्रस्ताव पर गहन चर्चा शुरू हो गई है। वरिष्ठ रक्षा विशेषज्ञ प्रफुल्ल बख्शी के अनुसार, यदि भारत रूस के साथ Su-57 के संयुक्त विकास और उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ता है, तो इससे भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता और स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी — दोनों को एक साथ बल मिलेगा।

भारत की तकनीकी ज़रूरतें

बख्शी ने कहा कि वर्तमान में भारत को इंजन तकनीक, एवियोनिक्स, कॉकपिट डिज़ाइन और ग्लास कॉकपिट जैसी उन्नत प्रणालियों की सर्वाधिक आवश्यकता है। उन्होंने रेखांकित किया कि हालाँकि अमेरिका तेजस लड़ाकू विमान के लिए GE-404 इंजन उपलब्ध करा रहा है, भारत अब तक पूर्णतः स्वदेशी लड़ाकू विमान इंजन विकसित करने में सफल नहीं हो पाया है। यह तकनीकी अंतर किसी भी संयुक्त विकास समझौते में भारत की प्राथमिक माँग बन सकता है।

Su-57 की युद्धक विशेषताएँ

Su-57 को दुनिया के सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में गिना जाता है। बख्शी ने बताया कि यह एक ट्विन-इंजन, स्टेल्थ-सक्षम और अत्यधिक फुर्तीला फाइटर जेट है जो सुपरसोनिक गति — यानी ध्वनि की गति से अधिक — पर उड़ान भरने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति को देखते हुए ऐसी क्षमताओं वाले विमान की भारतीय वायुसेना के लिए अनिवार्यता है।

वैश्विक परिनियोजन और रूस की रणनीति

बख्शी ने बताया कि अल्जीरिया सहित कुछ देशों के पास Su-57 पहले से उपलब्ध है और कथित तौर पर इसकी आपूर्ति भी शुरू हो चुकी है। उनके अनुसार रूस भली-भाँति जानता है कि भारत को इस स्तर के उन्नत लड़ाकू विमान की दरकार है, और यही कारण है कि यह पेशकश रणनीतिक दृष्टि से की गई है।

वायुसेना में स्क्वाड्रन का अंतर

रक्षा विशेषज्ञ ने एक महत्त्वपूर्ण तथ्य सामने रखा — भारतीय वायुसेना की परिचालन आवश्यकता लगभग 42.5 से 43 स्क्वाड्रन की है, जबकि वर्तमान में उसके पास केवल 29 स्क्वाड्रन ही सक्रिय हैं। यह 13 से 14 स्क्वाड्रन की कमी भारत की वायु रक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती है और किसी भी नए लड़ाकू विमान अधिग्रहण की तात्कालिकता को रेखांकित करती है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर सुरक्षा दबाव का सामना कर रहा है।

आगे की राह

गौरतलब है कि भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग का एक लंबा इतिहास रहा है — Su-30MKI का संयुक्त उत्पादन इसका प्रमुख उदाहरण है। Su-57 पर कोई भी अंतिम निर्णय भारत सरकार, रक्षा मंत्रालय और वायुसेना की तकनीकी समीक्षा के बाद ही होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की शर्तें इस सौदे की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएँगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल तकनीकी हस्तांतरण की गहराई का है — न कि केवल विमानों की संख्या का। Su-30MKI के संयुक्त उत्पादन में भी इंजन तकनीक भारत के हाथ पूरी तरह नहीं आई। यदि Su-57 सौदे में भी इंजन और एवियोनिक्स के मूल डिज़ाइन अधिकार रूस के पास रहे, तो 'आत्मनिर्भर भारत' के लक्ष्य के साथ यह कितना संगत होगा — यह प्रश्न नीति-निर्माताओं को केंद्र में रखना चाहिए। स्क्वाड्रन की कमी वास्तविक और गंभीर है, पर दीर्घकालिक रणनीतिक स्वायत्तता के लिए शर्तें उतनी ही महत्त्वपूर्ण हैं जितना सौदा खुद।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुखोई-57 (Su-57) क्या है और यह क्यों खास है?
Su-57 रूस का पाँचवीं पीढ़ी का ट्विन-इंजन, स्टेल्थ-सक्षम और सुपरसोनिक लड़ाकू विमान है, जिसे दुनिया के सबसे उन्नत फाइटर जेट में गिना जाता है। इसकी आधुनिक एवियोनिक्स, उच्च गतिशीलता और युद्धक क्षमता इसे अन्य विमानों से अलग बनाती है।
भारतीय वायुसेना में स्क्वाड्रन की कितनी कमी है?
रक्षा विशेषज्ञ प्रफुल्ल बख्शी के अनुसार भारतीय वायुसेना को 42.5 से 43 स्क्वाड्रन की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में केवल 29 स्क्वाड्रन उपलब्ध हैं। यह 13 से 14 स्क्वाड्रन की कमी भारत की वायु रक्षा तैयारी के लिए एक बड़ी चुनौती है।
भारत Su-57 के संयुक्त विकास से क्या हासिल कर सकता है?
संयुक्त विकास से भारत को इंजन तकनीक, एवियोनिक्स और ग्लास कॉकपिट जैसी उन्नत प्रणालियों में दक्षता मिल सकती है, जो अब तक स्वदेशी स्तर पर विकसित नहीं हो पाई हैं। यह 'आत्मनिर्भर भारत' के रक्षा लक्ष्यों को बल दे सकता है।
Su-57 किन देशों के पास पहले से है?
रक्षा विशेषज्ञ बख्शी के अनुसार अल्जीरिया सहित कुछ देशों के पास Su-57 पहले से उपलब्ध है और कथित तौर पर इसकी आपूर्ति भी शुरू हो चुकी है। भारत अभी इस प्रस्ताव पर विचार के चरण में है।
तेजस के लिए GE-404 इंजन होने के बावजूद भारत को अलग इंजन तकनीक की ज़रूरत क्यों है?
GE-404 इंजन अमेरिका द्वारा आपूर्ति किया जाता है, जिसका अर्थ है कि भारत पूर्णतः स्वदेशी इंजन निर्माण में अब तक सक्षम नहीं हुआ है। Su-57 सौदे में इंजन तकनीक हस्तांतरण से यह निर्भरता कम हो सकती है और भारत की दीर्घकालिक रक्षा स्वायत्तता मज़बूत हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले