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ब्रिक्स 2026: भारत-रूस व्यापार 2030 तक $100 अरब के लक्ष्य की ओर, मोदी-शी वार्ता से चीन संबंधों में नई उम्मीद

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ब्रिक्स 2026: भारत-रूस व्यापार 2030 तक $100 अरब के लक्ष्य की ओर, मोदी-शी वार्ता से चीन संबंधों में नई उम्मीद

सारांश

ब्रिक्स 2026 सिर्फ एक शिखर सम्मेलन नहीं — यह भारत की बहुध्रुवीय रणनीति का सार्वजनिक प्रदर्शन है। एक तरफ रूस के साथ $100 अरब का व्यापार लक्ष्य, दूसरी तरफ चीन के साथ $112 अरब का बढ़ता घाटा — और बीच में मोदी-शी वार्ता। असली परीक्षा यह है कि भारत इन विरोधाभासी संबंधों को एक साथ कैसे साधेगा।

मुख्य बातें

अर्थशास्त्री राजीव साहू के अनुसार भारत-रूस के नए समझौते से द्विपक्षीय व्यापार 2030 तक $100 अरब तक पहुँचने का लक्ष्य है।
ब्रिक्स 2026 की साइडलाइन पर प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच व्यापार-निवेश पर द्विपक्षीय वार्ता अपेक्षित।
2025-26 में भारत-चीन वस्तु व्यापार 18.31% बढ़कर $151.10 अरब ; चीन बना भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार ।
भारत-चीन व्यापार घाटा 2025-26 में बढ़कर $112.16 अरब — जो 2024-25 के $99.21 अरब से अधिक।
साहू के अनुसार भारत, रूस और चीन मिलकर डॉलर-केंद्रित व्यापार व्यवस्था के विकल्प की नई प्रणाली बना सकते हैं।

ब्रिक्स 2026 शिखर सम्मेलन के बीच अर्थशास्त्री राजीव साहू ने शनिवार, 12 सितंबर 2026 को कहा कि भारत और रूस के नए समझौते से द्विपक्षीय व्यापार 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुँचने का मार्ग प्रशस्त होगा और वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में बदलाव की नई संभावनाएँ खुलेंगी। ब्रिक्स मंच ने इस बार न केवल भारत-रूस संबंधों को नई ऊर्जा दी है, बल्कि भारत-चीन रिश्तों में भी सकारात्मक संकेत दिए हैं।

भारत-रूस व्यापार साझेदारी की नई दिशा

साहू ने बताया कि भारत खाद्य उत्पादों, पेट्रोलियम उत्पादों और रिफाइनिंग जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से सक्षम है, जबकि रूस रक्षा, प्रौद्योगिकी और अन्य ऐसे क्षेत्रों में अग्रणी है जिनकी भारत को आवश्यकता है। उनके अनुसार, यह पूरकता दोनों देशों के बीच गहरी आर्थिक साझेदारी की मज़बूत बुनियाद है।

साहू ने यह भी रेखांकित किया कि ब्रिक्स ने रूस, भारत और चीन के बीच संबंधों की नई परतें उजागर की हैं। उनके अनुसार ये तीनों देश मिलकर डॉलर-केंद्रित वैश्विक व्यापार व्यवस्था के विकल्प के रूप में एक नई प्रणाली विकसित कर सकते हैं, जिससे तीनों को रणनीतिक और आर्थिक लाभ होगा।

मोदी-शी द्विपक्षीय वार्ता की उम्मीदें

ब्रिक्स 2026 की साइडलाइन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच शनिवार शाम द्विपक्षीय वार्ता होने की उम्मीद है, जिसमें व्यापार और निवेश के मुद्दों पर चर्चा अपेक्षित है। साहू ने कहा कि चीन के साथ सीमा विवाद के बावजूद, राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भारत आना दोनों देशों के लिए सकारात्मक है और पुराने विवादों को सुलझाने में मददगार साबित हो सकता है।

गौरतलब है कि यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब 2025-26 में भारत-चीन द्विपक्षीय वस्तु व्यापार 18.31 प्रतिशत बढ़कर 151.10 अरब डॉलर हो गया है और चीन ने अमेरिका को पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनने का स्थान हासिल कर लिया है।

भारत-चीन व्यापार: बढ़ता घाटा चिंता का विषय

व्यापार के आँकड़े एक जटिल तस्वीर पेश करते हैं। 2025-26 में चीन को भारत का निर्यात 36.62 प्रतिशत बढ़कर 19.47 अरब डॉलर हो गया, जो एक वर्ष पूर्व 14.25 अरब डॉलर था। हालाँकि, आयात भी 16.03 प्रतिशत बढ़कर 131.63 अरब डॉलर पहुँच गया, जो पहले 113.46 अरब डॉलर था।

इस असंतुलन के परिणामस्वरूप भारत का व्यापार घाटा 2024-25 के 99.21 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 112.16 अरब डॉलर हो गया है। यह प्रवृत्ति नई नहीं है — घाटा 2021-22 में 44 अरब डॉलर, 2022-23 में 73.3 अरब डॉलर और 2023-24 में 83.2 अरब डॉलर था, जो लगातार बढ़त की एक स्पष्ट रेखा दर्शाता है।

ब्रिक्स का वैश्विक संदर्भ और आगे की राह

विशेषज्ञों के अनुसार ब्रिक्स 2026 उस व्यापक बदलाव का हिस्सा है जिसमें उभरती अर्थव्यवस्थाएँ पश्चिमी-केंद्रित वित्तीय ढाँचे के विकल्प तलाश रही हैं। भारत-रूस के नए समझौते और भारत-चीन के बीच उच्च स्तरीय वार्ता — दोनों मिलकर संकेत देते हैं कि नई दिल्ली बहुध्रुवीय विश्व में अपनी साझेदारियाँ सक्रिय रूप से पुनर्परिभाषित कर रही है।

आलोचकों का कहना है कि व्यापार संतुलन और सीमा विवाद जैसे मुद्दों पर ठोस प्रगति के बिना, सम्मेलन के वक्तव्य महज़ कूटनीतिक शिष्टाचार तक सीमित रह सकते हैं। भारत-चीन संबंधों की दिशा अगले कुछ हफ्तों में वार्ता के ठोस परिणामों पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या कूटनीतिक ऊष्मा, व्यापार असंतुलन को संतुलित करने की दिशा में ठोस रूपरेखा में बदल पाती है।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिक्स 2026 में भारत और रूस के बीच क्या नया समझौता हुआ?
भारत और रूस ने ब्रिक्स 2026 के दौरान एक नए समझौते पर सहमति जताई है, जिसका लक्ष्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक $100 अरब तक ले जाना है। अर्थशास्त्री राजीव साहू के अनुसार यह साझेदारी भारत की खाद्य व पेट्रोलियम क्षमता और रूस की रक्षा व तकनीकी शक्ति की पूरकता पर आधारित है।
ब्रिक्स 2026 में मोदी-शी वार्ता किन मुद्दों पर है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच ब्रिक्स 2026 की साइडलाइन पर शनिवार शाम द्विपक्षीय वार्ता में व्यापार और निवेश के मुद्दों पर चर्चा अपेक्षित है। इसे पुराने सीमा विवादों को सुलझाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
2025-26 में भारत-चीन व्यापार घाटा कितना बढ़ा?
2025-26 में भारत-चीन व्यापार घाटा बढ़कर $112.16 अरब हो गया, जो 2024-25 में $99.21 अरब था। यह घाटा पिछले चार वर्षों से लगातार बढ़ रहा है — 2021-22 में $44 अरब, 2022-23 में $73.3 अरब और 2023-24 में $83.2 अरब था।
क्या चीन अब भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है?
हाँ, 2025-26 में चीन ने अमेरिका को पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनने का स्थान हासिल कर लिया है। इस दौरान दोनों देशों के बीच कुल वस्तु व्यापार 18.31 प्रतिशत बढ़कर $151.10 अरब हो गया।
ब्रिक्स का वैश्विक व्यापार व्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है?
अर्थशास्त्री राजीव साहू के अनुसार, भारत, रूस और चीन मिलकर डॉलर के प्रभुत्व वाली वैश्विक व्यापार व्यवस्था के विकल्प के रूप में एक नई प्रणाली विकसित कर सकते हैं। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि बिना ठोस तंत्र के ऐसे वक्तव्य कूटनीतिक इच्छाशक्ति से आगे नहीं जा पाते।
राष्ट्र प्रेस
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