15 सितंबर 2026
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डॉ. पी. श्रीहरि बने आरसीआई-डीआरडीओ हैदराबाद के निदेशक, ASAT और MRSAM के अनुभवी वैज्ञानिक

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डॉ. पी. श्रीहरि बने आरसीआई-डीआरडीओ हैदराबाद के निदेशक, ASAT और MRSAM के अनुभवी वैज्ञानिक

सारांश

तीन दशकों के रक्षा अनुसंधान और ASAT सफलता से MRSAM की IAF तैनाती तक की विशिष्ट यात्रा पूरी कर चुके डॉ. पी. श्रीहरि अब आरसीआई-डीआरडीओ हैदराबाद की कमान संभाल रहे हैं — ऐसे वक्त में जब भारत का मिसाइल और अंतरिक्ष रक्षा कार्यक्रम नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ रहा है।

मुख्य बातें

श्रीहरि ने 15 सितंबर 2026 को आरसीआई, डीआरडीओ हैदराबाद के निदेशक पद का कार्यभार ग्रहण किया।
वे मार्च 2019 के ऐतिहासिक ASAT परीक्षण की सफलता में शामिल कोर टीम के सदस्य रहे हैं।
उनके नेतृत्व में MRSAM (IAF) की पहली फायरिंग यूनिट अक्टूबर 2021 में वायुसेना को सौंपी गई।
2022 में BMD प्रोग्राम डायरेक्टर के रूप में पदोन्नत किए गए थे।
उन्हें अग्नि पुरस्कार , डीआरडीओ पुरस्कार और वर्ष का वैज्ञानिक पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
मिसाइल प्रणालियों पर 10 से अधिक शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित।

उत्कृष्ट वैज्ञानिक डॉ. पी. श्रीहरि को अनुसंधान केंद्र इमारत (आरसीआई), डीआरडीओ हैदराबाद का निदेशक नियुक्त किया गया है। उन्होंने 15 सितंबर 2026 को औपचारिक रूप से कार्यभार ग्रहण किया। तीन दशकों से अधिक के रक्षा अनुसंधान अनुभव के साथ, डॉ. श्रीहरि मिसाइल रक्षा और प्रोपल्शन प्रणालियों में भारत की स्वदेशी क्षमताओं को आगे बढ़ाने के लिए जाने जाते हैं।

शैक्षणिक और प्रारंभिक करियर

डॉ. श्रीहरि ने 1990 में नागार्जुन विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की। इसके बाद कोयंबटूर के पीएसजी कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री और हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।

उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग फेलोशिप कोर्स (MEFC) के माध्यम से डीआरडीओ में प्रवेश लिया और अक्टूबर 1992 में बेंगलुरु स्थित इलेक्ट्रॉनिक्स और रडार विकास प्रतिष्ठान (LRDE) में वैज्ञानिक 'बी' के रूप में अपना कार्यकाल आरंभ किया। प्रारंभिक वर्षों में उन्होंने एलसीए कार्यक्रम के लिए मल्टी-मोड रडार (MMR) पर कार्य किया और मल्टीलेयर स्लॉटेड ऐरे एंटीना का डिजाइन व विकास किया — जो बाद में ALH और BFSR जैसे कई डीआरडीओ कार्यक्रमों में उपयोगी सिद्ध हुई।

वर्ष 2000 में उन्हें कार्यक्रम AD के तहत लंबी दूरी के ट्रैकिंग रडार (LRTR) के लिए IAI/ELTA में प्रतिनियुक्त किया गया और कोलार रडार रेंज के विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

मिसाइल रक्षा में योगदान

दिसंबर 2003 में डॉ. श्रीहरि हैदराबाद स्थित डीआरडीएल में लिक्विड प्रोपल्शन डिवीजन (LPD) में स्थानांतरित हुए। यहाँ उन्होंने भारतीय बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा कार्यक्रम के लिए इंटरसेप्टर मिसाइलों हेतु डायवर्ट और एटीट्यूड कंट्रोल सिस्टम (DACS) का डिजाइन और विकास किया। उनके द्वारा विकसित कोल्ड गैस रिएक्शन कंट्रोल सिस्टम (RCS) का लक्ष्य मिसाइलों में सफलतापूर्वक उपयोग किया गया।

2015 में, वे कार्यक्रम AD में शामिल हुए और PDVAD सेकेंड इंटरसेप्टर मिसाइलों पर कार्य किया। गौरतलब है कि वे उस कोर ग्रुप के सदस्य थे जिसने मार्च 2019 में लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) उपग्रह को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कर एंटी-सैटेलाइट (ASAT) कार्यक्रम को ऐतिहासिक सफलता दिलाई।

MRSAM परियोजना और नेतृत्व

2019 में डॉ. श्रीहरि को डीआरडीओ और IAI के संयुक्त विकास कार्यक्रम MRSAM (IAF) परियोजना के परियोजना निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया। उनके नेतृत्व में पहली फायरिंग यूनिट को अक्टूबर 2021 में भारतीय वायुसेना में सफलतापूर्वक शामिल किया गया। इसके साथ ही उन्होंने शेष सभी फायरिंग यूनिटों की सुचारु डिलीवरी के लिए पूरी उत्पादन लाइनें भी स्थापित कीं।

अगस्त 2021 में उन्हें प्रोग्राम AD में प्रोजेक्ट डायरेक्टर नियुक्त किया गया और 2022 में प्रतिष्ठित भारतीय बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) कार्यक्रम के प्रोग्राम डायरेक्टर पद पर पदोन्नत किया गया।

पुरस्कार, प्रकाशन और सदस्यताएँ

डॉ. श्रीहरि को उनके विशिष्ट योगदान के लिए आत्मनिर्भरता में उत्कृष्टता के लिए अग्नि पुरस्कार, अभूतपूर्व अनुसंधान के लिए डीआरडीओ पुरस्कार और वर्ष का वैज्ञानिक पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने मिसाइल प्रणालियों के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में दस से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं।

वे एयरोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (AeSI) के हैदराबाद चैप्टर के मानद सचिव हैं और HEMSI, INSARM तथा SAE जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के सदस्य हैं। उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब आरसीआई भारत के मिसाइल और अंतरिक्ष रक्षा कार्यक्रमों में केंद्रीय भूमिका निभा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उनका तकनीकी-प्रबंधन अनुभव दोनों मोर्चों पर काम आएगा। बड़ा सवाल यह है कि क्या आरसीआई अगले दशक में अनुसंधान से तेज़ तैनाती की ओर सफलतापूर्वक संक्रमण कर पाएगा।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. पी. श्रीहरि कौन हैं और उन्हें कहाँ नियुक्त किया गया है?
डॉ. पी. श्रीहरि एक उत्कृष्ट वैज्ञानिक हैं जिन्हें 15 सितंबर 2026 को अनुसंधान केंद्र इमारत (आरसीआई), डीआरडीओ हैदराबाद का निदेशक नियुक्त किया गया है। वे तीन दशकों से अधिक समय से मिसाइल रक्षा, रडार प्रणाली और प्रोपल्शन तकनीक में कार्यरत हैं।
ASAT परीक्षण में डॉ. श्रीहरि की क्या भूमिका थी?
डॉ. श्रीहरि उस कोर ग्रुप के सदस्य थे जिसने मार्च 2019 में लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) उपग्रह को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कर भारत के एंटी-सैटेलाइट (ASAT) कार्यक्रम को ऐतिहासिक सफलता दिलाई थी। यह भारत के रणनीतिक अंतरिक्ष रक्षा क्षमता के लिहाज से एक निर्णायक उपलब्धि थी।
MRSAM परियोजना में डॉ. श्रीहरि का योगदान क्या रहा?
2019 में डॉ. श्रीहरि को डीआरडीओ और IAI के संयुक्त कार्यक्रम MRSAM (IAF) का परियोजना निदेशक बनाया गया था। उनके नेतृत्व में अक्टूबर 2021 में पहली फायरिंग यूनिट भारतीय वायुसेना को सफलतापूर्वक सौंपी गई और शेष सभी यूनिटों के लिए उत्पादन लाइनें स्थापित की गईं।
डॉ. श्रीहरि को कौन-से प्रमुख पुरस्कार मिले हैं?
उन्हें आत्मनिर्भरता में उत्कृष्टता के लिए अग्नि पुरस्कार, अभूतपूर्व अनुसंधान के लिए डीआरडीओ पुरस्कार और वर्ष का वैज्ञानिक पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा उन्होंने मिसाइल प्रणालियों पर दस से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं।
अनुसंधान केंद्र इमारत (आरसीआई) क्या करती है?
आरसीआई, हैदराबाद डीआरडीओ की प्रमुख प्रयोगशालाओं में से एक है जो मिसाइल प्रणालियों, नेविगेशन, गाइडेंस और नियंत्रण तकनीकों के अनुसंधान व विकास में विशेषज्ञता रखती है। यह भारत के बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा और अन्य सामरिक मिसाइल कार्यक्रमों की आधारशिला मानी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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