31 जुलाई 2026
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डीआरडीओ ने LRLACM क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया, राजनाथ सिंह ने दी बधाई

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डीआरडीओ ने LRLACM क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया, राजनाथ सिंह ने दी बधाई

सारांश

डीआरडीओ ने 15 जून को ओडिशा के डॉ. कलाम द्वीप से स्वदेशी LRLACM क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण कर भारत की जमीनी आक्रमण क्षमता को नई ऊँचाई दी। जून के पहले पखवाड़े में ICBM-रोधी BMD प्रणाली और NSM-MR के परीक्षणों के साथ यह भारत के रक्षा आत्मनिर्भरता अभियान का सबसे सघन सप्ताह रहा।

मुख्य बातें

डीआरडीओ ने 15 जून 2026 को डॉ.
एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप, ओडिशा से स्वदेशी LRLACM क्रूज मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया।
परीक्षण के सभी निर्धारित उद्देश्य चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज के ट्रैकिंग आँकड़ों के अनुसार पूरी तरह सिद्ध हुए।
नोडल प्रयोगशाला वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान (ADE), बेंगलुरु है; सभी उप-प्रणालियाँ स्वदेशी रूप से विकसित।
10-11 जून 2026 को लगातार तीन उड़ान परीक्षणों में मल्टी-लेयर्ड BMD प्रणाली और NSM-MR का भी सफल प्रदर्शन किया गया।
इन परीक्षणों से भारत ICBM -रोधी BMD क्षमता रखने वाले चुनिंदा देशों में शामिल हुआ।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और डीआरडीओ अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने टीम को बधाई दी।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने 15 जून 2026 को ओडिशा तट के निकट स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से स्वदेश निर्मित लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (LRLACM) का सफल उड़ान परीक्षण किया। चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज में तैनात ट्रैकिंग प्रणालियों से प्राप्त आँकड़ों के अनुसार, परीक्षण के सभी निर्धारित उद्देश्य पूरी तरह सिद्ध हुए।

मिसाइल की विशेषताएँ और स्वदेशी विकास

LRLACM पूर्णतः स्वदेशी तकनीक पर आधारित मिसाइल है, जिसकी समस्त उप-प्रणालियाँ डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं और भारतीय उद्योग भागीदारों द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई हैं। वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान (ADE), बेंगलुरु इस परियोजना की नोडल प्रयोगशाला है। परीक्षण के दौरान डीआरडीओ के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ भारतीय नौसेना और वायु सेना के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

रक्षा मंत्री और डीआरडीओ प्रमुख की प्रतिक्रिया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने LRLACM के सफल परीक्षण पर डीआरडीओ की पूरी टीम और उद्योग भागीदारों को बधाई दी। रक्षा सचिव एवं डीआरडीओ अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने प्रक्षेपण के दौरान समस्त गतिविधियों की स्वयं निगरानी की और सफल परीक्षण में भागीदार सभी टीम सदस्यों को शुभकामनाएँ दीं।

पिछले सप्ताह की रक्षा उपलब्धियाँ

गौरतलब है कि 13 जून 2026 को भी डीआरडीओ ने दुश्मन के विविध खतरों से निपटने में सक्षम कई महत्त्वपूर्ण तकनीकों का सफल प्रदर्शन किया था। इससे पहले 10 और 11 जून 2026 को लगातार तीन उड़ान परीक्षण किए गए, जिनमें लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और मध्यम दूरी की एंटी-शिप क्षमताओं के विरुद्ध मल्टी-लेयर्ड डिफेंस का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया गया।

इन परीक्षणों में मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) प्रणाली की क्षमता को भी प्रमाणित किया गया, जिसमें इंटरसेप्टर्स ने अपने-अपने लक्ष्यों को सटीकता से भेदा। इसके अतिरिक्त, नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (NSM-MR) का पहला उड़ान परीक्षण भी सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

भारत की रणनीतिक क्षमता में बड़ा इज़ाफ़ा

इन परीक्षणों ने भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल कर दिया है, जिनके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) तक को रोकने में सक्षम BMD प्रणाली मौजूद है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी रक्षा आत्मनिर्भरता को तेज़ी से सुदृढ़ कर रहा है और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है। आने वाले समय में LRLACM को भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

BMD और NSM-MR, तीनों प्रणालियों के सफल परीक्षण एक ही सप्ताह में। लेकिन परीक्षण सफलता और परिचालन तैनाती के बीच की खाई अक्सर वर्षों की होती है, और भारत के कई स्वदेशी रक्षा कार्यक्रम इसी खाई में लंबे समय तक अटके रहे हैं। असली कसौटी यह होगी कि LRLACM कब और किस रूप में भारतीय वायु सेना और नौसेना की परिचालन सूची में शामिल होती है — और क्या उत्पादन पैमाना आयात विकल्पों के साथ प्रतिस्पर्धी रहेगा।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

LRLACM मिसाइल क्या है और इसे किसने विकसित किया?
LRLACM यानी लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल एक स्वदेशी जमीनी आक्रमण मिसाइल है, जिसे डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं और भारतीय उद्योग भागीदारों ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। इसकी नोडल प्रयोगशाला वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान (ADE), बेंगलुरु है और इसकी सभी उप-प्रणालियाँ पूरी तरह स्वदेशी हैं।
LRLACM का परीक्षण कहाँ और कब हुआ?
यह परीक्षण 15 जून 2026 को ओडिशा तट के निकट डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया। चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज के ट्रैकिंग उपकरणों के आँकड़ों के अनुसार परीक्षण के सभी उद्देश्य पूरी तरह सिद्ध हुए।
जून 2026 में डीआरडीओ ने और कौन-कौन से परीक्षण किए?
10 और 11 जून 2026 को लगातार तीन उड़ान परीक्षणों में मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) प्रणाली का सफल प्रदर्शन किया गया। इसके अलावा नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (NSM-MR) का पहला उड़ान परीक्षण भी 13 जून को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
इन परीक्षणों से भारत की रणनीतिक स्थिति पर क्या असर पड़ा?
BMD परीक्षणों की सफलता के बाद भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिनके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) तक को रोकने में सक्षम प्रणाली है। यह भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण तकनीकी छलाँग मानी जा रही है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने क्या कहा?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने LRLACM के सफल परीक्षण पर डीआरडीओ की पूरी टीम और उद्योग भागीदारों को बधाई दी। उन्होंने 13 जून को भी डीआरडीओ को अन्य महत्त्वपूर्ण रक्षा तकनीकों के सफल प्रदर्शन पर शुभकामनाएँ दी थीं।
राष्ट्र प्रेस
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