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डीआरडीओ द्वारा वायु रक्षा प्रणाली के 3 सफल उड़ान परीक्षण: एक नई उपलब्धि

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डीआरडीओ द्वारा वायु रक्षा प्रणाली के 3 सफल उड़ान परीक्षण: एक नई उपलब्धि

सारांश

डीआरडीओ ने ओडिशा के चांदीपुर में अति लघु दूरी वायु रक्षा प्रणाली के 3 सफल उड़ान परीक्षण किए हैं। यह सफलता भारतीय रक्षा तकनीक में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्य बातें

डीआरडीओ ने 3 सफल उड़ान परीक्षण किए।
परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर में हुए।
यह प्रणाली थल सेना, नौसेना, और वायु सेना के लिए उपयोगी है।
परीक्षण पूरी तरह से सुरक्षित और सफल रहे।
स्वदेशी तकनीक का विकास और प्रगति।

नई दिल्ली, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। डीआरडीओ ने ओडिशा के चांदीपुर तट पर स्थित परीक्षण केंद्र से अति लघु दूरी वायु रक्षा प्रणाली अर्थात् वैरी शॉर्ट एयर डिफेंस सिस्टम के अंतर्गत 3 लगातार सफल उड़ान परीक्षण किए हैं। ये सभी महत्वपूर्ण परीक्षण पूरी तरह से सुरक्षित और सफल साबित हुए हैं।

इन परीक्षणों में यह मूल्यांकन किया गया कि टेस्ट मिसाइल कितनी प्रभावी ढंग से दुश्मन के विमानों और अन्य लक्ष्यों को अलग-अलग दूरी और ऊंचाई पर नष्ट कर सकती है। हर बार मिसाइल ने अपने निशाने पर सटीकता से वार किया और लक्ष्य को हवा में ही ध्वस्त कर दिया। विशेष बात यह है कि ये परीक्षण उसी अंतिम तैनाती रूप में किए गए, जिसमें सेना के जवान खुद लक्ष्य साधने और मिसाइल दागने की प्रक्रिया में शामिल रहे।

टेलीमेट्री, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम और रडार जैसे उपकरणों से प्राप्त आंकड़ों ने सिद्ध किया कि यह प्रणाली विभिन्न प्रकार के हवाई खतरों से निपटने में पूरी तरह सक्षम है। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि परीक्षण के दौरान संयुक्त बलों के प्रतिनिधि, डीआरडीओ के वरिष्ठ अधिकारी और इस सिस्टम के उत्पादन से जुड़े हितधारक भी उपस्थित थे। यह एक कंधे पर रखकर दागी जाने वाली स्वदेशी वायु रक्षा मिसाइल है।

इसका विकास हैदराबाद स्थित अनुसंधान केंद्र और डीआरडीओ की अन्य प्रयोगशालाओं ने मिलकर किया है। यह प्रणाली थल सेना, नौसेना और वायु सेना यानी तीनों सेनाओं के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता पर डीआरडीओ, सशस्त्र बलों और उद्योग जगत को बधाई दी। उन्होंने कहा कि तीन लगातार सफल परीक्षण एक बड़ी उपलब्धि हैं और यह प्रणाली जल्द ही सेनाओं में शामिल की जा सकती है।

डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी कामत ने पूरी टीम, सशस्त्र बलों और उद्योग भागीदारों को इस सफलता के लिए बधाई दी और कहा कि यह देश की स्वदेशी रक्षा क्षमता को और मजबूत बनाएगा। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने ओडिशा तट के पास चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण परिसर से इस वायु रक्षा प्रणाली के सफल उड़ान परीक्षण संपन्न किए। इन परीक्षणों का उद्देश्य विभिन्न गति, दूरी और ऊंचाई पर उड़ान भरने वाले उच्च-गति के लक्ष्यों को निष्प्रभावी करने की प्रणाली की क्षमता का प्रमाणीकरण करना था।

परीक्षणों के दौरान मिसाइलों ने दुश्मन के विमान जैसे उच्च-गति हवाई लक्ष्यों को नष्ट किया। सभी परीक्षणों में इस प्रणाली ने अपेक्षित प्रदर्शन मानकों को पूरा किया। उड़ान संबंधी आंकड़ों को टेलीमेट्री, विद्युत-ऑप्टिकल ट्रैकिंग प्रणाली तथा रडार जैसे विभिन्न परास उपकरणों के माध्यम से संकलित किया गया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इससे विभिन्न प्रकार के हवाई खतरों के विरुद्ध इस सिस्टम की प्रभावशीलता की पुष्टि हुई है। यह एक व्यक्ति द्वारा ले जाकर दागी जाने वाली वायु रक्षा प्रणाली है।

इसका स्वदेशी विकास हैदराबाद स्थित अनुसंधान केंद्र ने डीआरडीओ की अन्य प्रयोगशालाओं और विकास-सह-उत्पादन भागीदारों के सहयोग से किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रणाली के सफल उड़ान परीक्षणों पर डीआरडीओ, सशस्त्र बलों और उद्योग जगत को बधाई दी। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी कामत ने प्रणाली के विकास में शामिल टीम को इस उपलब्धि पर बधाई दी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीआरडीओ का क्या महत्व है?
डीआरडीओ भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन है, जो स्वदेशी रक्षा तकनीकी विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ये परीक्षण कब और कहां हुए?
ये परीक्षण 27 फरवरी को ओडिशा के चांदीपुर तट पर हुए।
इस प्रणाली का उपयोग किसके लिए किया जाएगा?
यह प्रणाली थल सेना, नौसेना और वायु सेना के लिए उपयोगी होगी।
क्या ये परीक्षण सफल रहे?
हाँ, तीनों परीक्षण पूरी तरह से सफल और सुरक्षित रहे।
इस प्रणाली का विकास किसने किया?
इसका विकास हैदराबाद स्थित अनुसंधान केंद्र और अन्य प्रयोगशालाओं ने मिलकर किया।
राष्ट्र प्रेस
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