मणिपुर: कांगपोकपी में नागा ग्राम रक्षक चुंजंगलुंग पानमेई की गोली मारकर हत्या, CM ने जांच के आदेश दिए
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के कांगपोकपी जिले में 8 जून 2026 को नागा समुदाय के 58 वर्षीय ग्राम रक्षक चुंजंगलुंग पानमेई की जंगल में गोली मारकर हत्या कर दी गई। वे उसी दिन घरेलू उपयोग के लिए जलाऊ लकड़ी लेने जंगल गए थे, जब यह घटना घटी। मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने इस हत्या को जघन्य और कायरतापूर्ण करार देते हुए दोषियों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
घटनाक्रम: कैसे हुई हत्या
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पानमेई सोमवार को जंगल गए थे। कुछ समय बाद इलाके में गोलियों की आवाज सुनकर आसपास की बस्तियों के ग्रामीण और सुरक्षाकर्मी उनकी तलाश में जंगल पहुँचे। बाद में उनका शव बरामद किया गया, जिसमें सिर सहित कई जगह गोलियों के निशान थे।
पानमेई उसी इलाके के निवासी थे और स्वयंसेवी ग्राम रक्षक के रूप में सेवारत थे। यह हत्या लोइबोल खुल्लेन के निकट के जंगल में हुई।
पृष्ठभूमि: क्षेत्र में बढ़ती हिंसा
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब इसी इलाके में केवल तीन दिन पहले, 5 जून को, अज्ञात बंदूकधारियों ने लोइबोल खुल्लेन में एक महिला सहित तीन नागरिकों की हत्या कर दी थी। इन लगातार हमलों ने कांगपोकपी जिले में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गौरतलब है कि मणिपुर पिछले दो वर्षों से जातीय हिंसा की चपेट में है और पहाड़ी जिलों में नागरिकों पर हमलों की घटनाएँ थमने का नाम नहीं ले रहीं।
नागा संगठनों की प्रतिक्रिया
नागा पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (NPO) ने इस हत्या को 'निर्दयी हत्या' बताया और आरोप लगाया कि पानमेई को किसी गलत काम के लिए नहीं, बल्कि केवल उनकी नागा पहचान के कारण निशाना बनाया गया। संगठन ने संबंधित अधिकारियों से घटना की तत्काल, गहन और समयबद्ध जाँच शुरू कर दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने का आग्रह किया।
स्थानीय नागा संगठन पोंगरिंगलोंग यूथ क्लब ने भी इस हत्या की कड़ी निंदा की और दोषियों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई की माँग की।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने चुंजंगलुंग पानमेई की हत्या पर गहरा दुख व्यक्त किया और इसे एक निर्दोष नागरिक के खिलाफ जघन्य और कायरतापूर्ण हिंसा का कृत्य बताया। उन्होंने कहा कि मणिपुर पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) दोषियों की पहचान कर उन्हें कानून के दायरे में लाने के लिए अभियान चला रहे हैं।
आगे क्या होगा
पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है और क्षेत्र में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। NPO और स्थानीय संगठनों की माँग है कि जाँच समयबद्ध हो और परिणाम सार्वजनिक किए जाएँ। यह देखना अहम होगा कि राज्य सरकार और केंद्र मिलकर कांगपोकपी जैसे संवेदनशील पहाड़ी जिलों में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।