10 जुलाई 2026
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पाकिस्तान पंजाब का 'हैबिचुअल ऑफेंडर्स विधेयक' विवादों में, मानवाधिकार संगठनों ने बताया संविधान-विरोधी

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पाकिस्तान पंजाब का 'हैबिचुअल ऑफेंडर्स विधेयक' विवादों में, मानवाधिकार संगठनों ने बताया संविधान-विरोधी

सारांश

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का 'हैबिचुअल ऑफेंडर्स विधेयक' अब सिर्फ कानूनी विवाद नहीं — यह उस बड़े पैटर्न की कड़ी है जिसमें 808 पुलिस मुठभेड़ों में 1,100 मौतें हो चुकी हैं। मानवाधिकार संगठन, वकील और सांसद एकजुट होकर इसे संविधान-विरोधी और औपनिवेशिक दमन का आधुनिक रूप बता रहे हैं।

मुख्य बातें

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के प्रस्तावित 'हैबिचुअल ऑफेंडर्स विधेयक' के खिलाफ 10 जुलाई को HRCP की गोलमेज बैठक में व्यापक विरोध दर्ज हुआ।
वकील असद जमाल ने धारा-5 को सबसे खतरनाक बताया — इसके तहत खुफिया समिति बिना जवाबदेही के किसी को भी 'आदतन अपराधी' घोषित कर सकती है।
PTI सांसद शेख इम्तियाज का दावा — विधेयक संविधान के कम से कम 14 अनुच्छेदों का उल्लंघन करता है।
HRCP के आँकड़ों के अनुसार पंजाब में 808 कथित मुठभेड़ों में 1,100 संदिग्धों की मौत हो चुकी है।
संगठन ने नौ वर्षीय बच्चे की मौत का हवाला देते हुए स्वतंत्र न्यायिक जाँच की माँग की है।

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में प्रस्तावित 'हैबिचुअल ऑफेंडर्स विधेयक' के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। 10 जुलाई को ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान (HRCP) द्वारा आयोजित एक गोलमेज बैठक में नागरिक समाज के कार्यकर्ताओं, वकीलों, पत्रकारों और सांसदों ने एकजुट होकर इस विधेयक को वापस लेने की माँग की। आलोचकों का कहना है कि यह कानून नागरिक स्वतंत्रताओं को गंभीर रूप से कुचलने का एक राजकीय औज़ार बन सकता है।

विधेयक में क्या है और क्यों है विवाद

मानवाधिकार वकील असद जमाल ने बैठक में कहा कि इस विधेयक का मूल उद्देश्य राज्य को 'आदतन अपराधी' और 'समाज-विरोधी व्यवहार' जैसे अस्पष्ट और व्यापक शब्दों की आड़ में नागरिक अधिकारों की अनदेखी करने का कानूनी लाइसेंस देना है। उन्होंने विशेष रूप से धारा-5 पर चिंता जताई, जिसके तहत पंजाब सरकार एक खुफिया समिति को किसी भी व्यक्ति को 'आदतन अपराधी' घोषित करने और उसके खिलाफ मामला दर्ज करने का अधिकार दे सकती है — बिना किसी पारदर्शी जवाबदेही के।

शिक्षाविद और वकीलों की प्रतिक्रिया

शिक्षाविद अदनान सत्तार ने कहा कि यह विधेयक 'दमनकारी वैधता' को उसकी चरम सीमा तक ले जाता है। उन्होंने नागरिक समाज से ऐसे कानूनों के विरुद्ध संगठित और व्यावहारिक अभियान चलाने की अपील की। वकील अली जावेद दारूगर ने इसे औपनिवेशिक दौर के दमनकारी कानूनों का आधुनिक संस्करण करार दिया और कहा कि सत्ता का विकेंद्रीकरण तथा सरकार की जवाबदेही ही इस दुष्चक्र से बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता है।

संसदीय चिंताएँ: 14 संवैधानिक अनुच्छेदों का उल्लंघन

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के सांसद शेख इम्तियाज ने दावा किया कि यह विधेयक पाकिस्तान के संविधान के कम से कम 14 अनुच्छेदों का उल्लंघन करता है, जिनमें निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार और आवागमन की स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकार शामिल हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई बार विधायकों को चर्चा से पहले विधेयकों की प्रति तक उपलब्ध नहीं कराई जाती। HRCP पंजाब के उपाध्यक्ष राजा अशरफ ने कहा कि पाकिस्तान में विधायी संस्थाओं के भीतर खुली बहस की गुंजाइश लगातार सिकुड़ती जा रही है।

पुलिस मुठभेड़ों का संदर्भ: 808 मामलों में 1,100 मौतें

यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब HRCP पहले ही पंजाब प्रांत में लगातार हो रही न्यायेतर हत्याओं (एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल किलिंग) पर गंभीर चिंता जता चुका है। संगठन के आँकड़ों के अनुसार, पंजाब में पुलिस की 808 कथित मुठभेड़ों में 1,100 संदिग्धों की मौत हो चुकी है। आयोग ने पहले भी पंजाब सरकार को आगाह किया था कि क्राइम कंट्रोल डिपार्टमेंट (CCD) अपराध नियंत्रण के नाम पर नियमित रूप से घातक बल का इस्तेमाल कर रहा है।

नौ वर्षीय बच्चे की मौत और न्यायिक जाँच की माँग

HRCP ने हाल ही में एक नौ वर्षीय बच्चे की मौत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह घटना न्यायिक प्रक्रिया से बाहर घातक बल के इस्तेमाल के सामान्य होते जाने का खतरनाक उदाहरण है। संगठन ने इस मामले की स्वतंत्र न्यायिक जाँच की माँग की और स्पष्ट किया कि केवल विभागीय कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। यदि 'हैबिचुअल ऑफेंडर्स विधेयक' पारित होता है, तो आलोचकों का मानना है कि इस प्रकार की जवाबदेही और भी कमज़ोर पड़ जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

100 मौतों के बाद 'हैबिचुअल ऑफेंडर्स विधेयक' का आना महज संयोग नहीं लगता — यह राज्य की उस प्रवृत्ति का विधायी विस्तार है जो पहले से ही जवाबदेही से परे काम कर रही है। विधेयक की धारा-5 में खुफिया समिति को बिना न्यायिक निगरानी के 'आदतन अपराधी' तय करने का अधिकार देना, औपनिवेशिक 'हैबिचुअल ऑफेंडर्स एक्ट 1918' की भावना को डिजिटल युग में पुनर्जीवित करना है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि यह विधेयक अकेला नहीं है — यह एक ऐसी व्यवस्था की कड़ी है जहाँ विधायकों को विधेयक की प्रति तक नहीं मिलती और नौ साल के बच्चे की मौत पर विभागीय जाँच को पर्याप्त माना जाता है। जब तक स्वतंत्र न्यायिक निगरानी और पारदर्शी विधायी प्रक्रिया नहीं होगी, ऐसे कानून केवल कागज़ पर 'अपराध नियंत्रण' रहेंगे।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान पंजाब का 'हैबिचुअल ऑफेंडर्स विधेयक' क्या है?
यह पंजाब सरकार का एक प्रस्तावित कानून है जो राज्य को 'आदतन अपराधी' और 'समाज-विरोधी व्यवहार' जैसी अस्पष्ट परिभाषाओं के आधार पर नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार देता है। आलोचकों के अनुसार इसकी धारा-5 विशेष रूप से खतरनाक है क्योंकि यह एक खुफिया समिति को बिना पारदर्शी जवाबदेही के किसी को भी 'आदतन अपराधी' घोषित करने का अधिकार देती है।
HRCP ने इस विधेयक का विरोध क्यों किया?
ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान (HRCP) का कहना है कि यह विधेयक नागरिक स्वतंत्रताओं को कुचलने का औज़ार बन सकता है और पहले से चली आ रही न्यायेतर हत्याओं की समस्या को और गहरा करेगा। संगठन ने 808 कथित पुलिस मुठभेड़ों में 1,100 मौतों का हवाला देते हुए स्वतंत्र न्यायिक निगरानी की माँग की है।
PTI सांसद ने विधेयक पर क्या आरोप लगाए?
PTI सांसद शेख इम्तियाज ने दावा किया कि यह विधेयक पाकिस्तान के संविधान के कम से कम 14 अनुच्छेदों का उल्लंघन करता है, जिनमें निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार और आवागमन की स्वतंत्रता शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विधायकों को अक्सर चर्चा से पहले विधेयकों की प्रति तक उपलब्ध नहीं कराई जाती।
पंजाब में पुलिस मुठभेड़ों की स्थिति कितनी गंभीर है?
HRCP के आँकड़ों के अनुसार पंजाब में 808 कथित पुलिस मुठभेड़ों में 1,100 संदिग्धों की मौत हो चुकी है। संगठन ने पहले भी चेतावनी दी थी कि क्राइम कंट्रोल डिपार्टमेंट (CCD) अपराध नियंत्रण के नाम पर नियमित रूप से घातक बल का इस्तेमाल कर रहा है।
नौ वर्षीय बच्चे की मौत का मामला इस विवाद से कैसे जुड़ा है?
HRCP ने हाल ही में एक नौ वर्षीय बच्चे की मौत का उल्लेख करते हुए इसे न्यायिक प्रक्रिया से बाहर घातक बल के सामान्य होते जाने का उदाहरण बताया। संगठन ने स्वतंत्र न्यायिक जाँच की माँग की और कहा कि केवल विभागीय कार्रवाई इस पर प्रभावी रोक नहीं लगा सकती।
राष्ट्र प्रेस
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