पाकिस्तान पंजाब का 'हैबिचुअल ऑफेंडर्स विधेयक' विवादों में, मानवाधिकार संगठनों ने बताया संविधान-विरोधी
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में प्रस्तावित 'हैबिचुअल ऑफेंडर्स विधेयक' के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। 10 जुलाई को ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान (HRCP) द्वारा आयोजित एक गोलमेज बैठक में नागरिक समाज के कार्यकर्ताओं, वकीलों, पत्रकारों और सांसदों ने एकजुट होकर इस विधेयक को वापस लेने की माँग की। आलोचकों का कहना है कि यह कानून नागरिक स्वतंत्रताओं को गंभीर रूप से कुचलने का एक राजकीय औज़ार बन सकता है।
विधेयक में क्या है और क्यों है विवाद
मानवाधिकार वकील असद जमाल ने बैठक में कहा कि इस विधेयक का मूल उद्देश्य राज्य को 'आदतन अपराधी' और 'समाज-विरोधी व्यवहार' जैसे अस्पष्ट और व्यापक शब्दों की आड़ में नागरिक अधिकारों की अनदेखी करने का कानूनी लाइसेंस देना है। उन्होंने विशेष रूप से धारा-5 पर चिंता जताई, जिसके तहत पंजाब सरकार एक खुफिया समिति को किसी भी व्यक्ति को 'आदतन अपराधी' घोषित करने और उसके खिलाफ मामला दर्ज करने का अधिकार दे सकती है — बिना किसी पारदर्शी जवाबदेही के।
शिक्षाविद और वकीलों की प्रतिक्रिया
शिक्षाविद अदनान सत्तार ने कहा कि यह विधेयक 'दमनकारी वैधता' को उसकी चरम सीमा तक ले जाता है। उन्होंने नागरिक समाज से ऐसे कानूनों के विरुद्ध संगठित और व्यावहारिक अभियान चलाने की अपील की। वकील अली जावेद दारूगर ने इसे औपनिवेशिक दौर के दमनकारी कानूनों का आधुनिक संस्करण करार दिया और कहा कि सत्ता का विकेंद्रीकरण तथा सरकार की जवाबदेही ही इस दुष्चक्र से बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता है।
संसदीय चिंताएँ: 14 संवैधानिक अनुच्छेदों का उल्लंघन
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के सांसद शेख इम्तियाज ने दावा किया कि यह विधेयक पाकिस्तान के संविधान के कम से कम 14 अनुच्छेदों का उल्लंघन करता है, जिनमें निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार और आवागमन की स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकार शामिल हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई बार विधायकों को चर्चा से पहले विधेयकों की प्रति तक उपलब्ध नहीं कराई जाती। HRCP पंजाब के उपाध्यक्ष राजा अशरफ ने कहा कि पाकिस्तान में विधायी संस्थाओं के भीतर खुली बहस की गुंजाइश लगातार सिकुड़ती जा रही है।
पुलिस मुठभेड़ों का संदर्भ: 808 मामलों में 1,100 मौतें
यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब HRCP पहले ही पंजाब प्रांत में लगातार हो रही न्यायेतर हत्याओं (एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल किलिंग) पर गंभीर चिंता जता चुका है। संगठन के आँकड़ों के अनुसार, पंजाब में पुलिस की 808 कथित मुठभेड़ों में 1,100 संदिग्धों की मौत हो चुकी है। आयोग ने पहले भी पंजाब सरकार को आगाह किया था कि क्राइम कंट्रोल डिपार्टमेंट (CCD) अपराध नियंत्रण के नाम पर नियमित रूप से घातक बल का इस्तेमाल कर रहा है।
नौ वर्षीय बच्चे की मौत और न्यायिक जाँच की माँग
HRCP ने हाल ही में एक नौ वर्षीय बच्चे की मौत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह घटना न्यायिक प्रक्रिया से बाहर घातक बल के इस्तेमाल के सामान्य होते जाने का खतरनाक उदाहरण है। संगठन ने इस मामले की स्वतंत्र न्यायिक जाँच की माँग की और स्पष्ट किया कि केवल विभागीय कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। यदि 'हैबिचुअल ऑफेंडर्स विधेयक' पारित होता है, तो आलोचकों का मानना है कि इस प्रकार की जवाबदेही और भी कमज़ोर पड़ जाएगी।