पीओके में प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई: एमनेस्टी और आईएचआरएफ ने पाकिस्तान को घेरा, 25 से अधिक मौतों का दावा
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (पीओके) में 8 और 9 जून को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध की गई सख्त कार्रवाई पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। एमनेस्टी इंटरनेशनल और इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन (आईएचआरएफ) ने इंटरनेट बंद करने, बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों और बल प्रयोग को मानवाधिकारों की गंभीर गिरावट का संकेत बताया है। आईएचआरएफ के अनुसार इन दो दिनों में एक महिला समेत 25 से अधिक लोगों की मौत हुई।
मुख्य घटनाक्रम
तनाव उस समय चरम पर पहुँचा जब पाकिस्तान प्रशासन ने 9 जून को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से ठीक पहले संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेकेजेएएसी) को आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया। इसके बाद रावलाकोट शहर में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें हुईं, जिनमें सैकड़ों लोग घायल बताए जा रहे हैं।
घटनाओं का एक तात्कालिक कारण जेकेजेएएसी कार्यकर्ता शाहजेब हबीब की मौत भी रही। एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार 5 जून की रात पुलिस मुठभेड़ के दौरान हबीब को गोली लगी और बाद में उनकी मृत्यु हो गई। संगठन का दावा है कि उस समय पुलिसकर्मियों को हबीब से कोई तत्काल जान का खतरा नहीं था। जब उनका शव पोस्टमार्टम के लिए रावलाकोट के संयुक्त सैन्य अस्पताल (सीएमएच) लाया गया, तो बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए और इसके बाद हिंसक झड़पें शुरू हो गईं।
मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया
एमनेस्टी इंटरनेशनल की दक्षिण एशिया की उप-क्षेत्रीय निदेशक इसाबेल लासी ने कहा, 'किसी जमीनी स्तर के संगठन को बिना स्पष्ट आधार के आतंकवादी घोषित करना और पूरे क्षेत्र में संचार व्यवस्था बंद कर देना मानवाधिकारों के प्रति गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत जेकेजेएएसी पर रोक लगाना गैर-कानूनी और संगठन बनाने की आजादी के अधिकार का उल्लंघन है।'
लासी ने शाहजेब हबीब की कथित न्यायेत्तर हत्या, प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों की मौत के सभी मामलों में स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच की माँग की। उन्होंने कहा कि दोषियों को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुसार जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
आईएचआरएफ ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो क्षेत्र में और अधिक जनहानि होगी और मौलिक अधिकारों का हनन जारी रहेगा। संगठन ने यह भी रेखांकित किया कि जेकेजेएएसी के विरोध प्रदर्शनों पर मई 2024 और अक्टूबर 2025 में भी हिंसक कार्रवाई की जा चुकी है।
मौतों का आँकड़ा और पुलिस का पक्ष
पुलिस के हवाले से एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बताया कि रावलाकोट की झड़पों में आठ प्रदर्शनकारियों और चार पुलिसकर्मियों की मौत हुई। वहीं आईएचआरएफ का दावा है कि 8 और 9 जून के दौरान कुल 25 से अधिक लोग मारे गए। दोनों आँकड़ों में अंतर है और स्वतंत्र सत्यापन संभव नहीं हो पाया है क्योंकि क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएँ बाधित रहीं।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाकिस्तान प्रशासन से स्थिति शांत करने, संयम बरतने और बल प्रयोग के अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करने की अपील की है। संगठन का कहना है कि बल का इस्तेमाल केवल अंतिम विकल्प के रूप में और आवश्यकता तथा अनुपात के सिद्धांतों के तहत ही होना चाहिए।
व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि पीओके में जेकेजेएएसी लंबे समय से बिजली सब्सिडी, आटे की कीमतों और प्रशासनिक स्वायत्तता जैसे मुद्दों पर आंदोलन चला रही है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव पहले से ऊँचे स्तर पर है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय पीओके की स्थिति पर नज़र रखे हुए है। आलोचकों का कहना है कि नागरिक संगठनों पर आतंकवाद-रोधी कानूनों का प्रयोग असहमति को दबाने का एक औज़ार बनता जा रहा है।
आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ने की आशंका है और मानवाधिकार संगठनों ने संयुक्त राष्ट्र से भी हस्तक्षेप की माँग करने का संकेत दिया है।