20 सितंबर 2026
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गालिबाफ का दो-टूक बयान: ईरान बातचीत के लिए तैयार, लेकिन सही वक्त पर देगा 'भयंकर सैन्य जवाब'

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गालिबाफ का दो-टूक बयान: ईरान बातचीत के लिए तैयार, लेकिन सही वक्त पर देगा 'भयंकर सैन्य जवाब'

सारांश

ईरानी संसद अध्यक्ष गालिबाफ का दो-टूक संदेश — सात महीने के युद्ध के बीच ईरान एक हाथ में कूटनीति और दूसरे हाथ में तलवार लेकर खड़ा है। होर्मुज का खुलना अमेरिकी रियायतों पर निर्भर, और रेजाई की चेतावनी है कि टकराव बढ़ा तो अमेरिकी ठिकाने निशाने पर होंगे।

मुख्य बातें

ईरानी संसद अध्यक्ष गालिबाफ ने 20 सितंबर 2026 को कहा कि ईरान को 'लड़ना भी है और बातचीत भी करनी है।' ईरान ने स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य अमेरिका की प्रतिबद्धताएँ पूरी होने तक नहीं खोला जाएगा।
ईरान ने वार्ता शुरू करने के लिए सात शर्तें रखी हैं, जिनमें युद्ध विराम, फ्रीज़ फंड वापसी और नौसैनिक नाकाबंदी हटाना शामिल है।
कतर और पाकिस्तान के ज़रिए मध्यस्थता के प्रयास जारी हैं।
मोहसेन रेजाई ने चेतावनी दी — टकराव बढ़ने पर क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकाने ईरान के निशाने पर होंगे।

ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने 20 सितंबर 2026 को संसदीय सत्र को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ करीब सात महीने से जारी युद्ध के बीच तेहरान एक साथ दो मोर्चों पर काम कर रहा है — कूटनीतिक बातचीत की संभावना खुली रखना और निर्णायक क्षण आने पर दुश्मन को पूरी सैन्य ताकत से 'भयंकर झटके' देना। तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, गालिबाफ ने कहा कि मौजूदा हालात में ईरान को 'लड़ना भी है और बातचीत भी करनी है।'

गालिबाफ का बयान: रणनीति और चेतावनी एक साथ

संसद में बोलते हुए गालिबाफ ने कहा, 'जब युद्ध के मैदान में महत्वपूर्ण सफलता हासिल हो जाए और दुश्मन कमज़ोर स्थिति में पहुँच जाए, तब कूटनीति के ज़रिए इन सैन्य उपलब्धियों को मज़बूत किया जाना चाहिए।' यह बयान ईरान की उस सोच को दर्शाता है जिसमें सैन्य श्रेष्ठता और राजनयिक लाभ को परस्पर जोड़कर देखा जाता है। गालिबाफ ने यह भी रेखांकित किया कि बातचीत को लेकर ईरान की स्थिति 'पूरी तरह स्पष्ट, तार्किक और अपरिवर्तनीय' है।

होर्मुज जलडमरूमध्य: सौदेबाज़ी का सबसे बड़ा पत्ता

होर्मुज स्ट्रेट इस पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील बिंदु बना हुआ है। गालिबाफ के अनुसार, 'अमेरिका द्वारा अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा किए जाने तक होर्मुज खुलने की संभावना नहीं है।' गौरतलब है कि अगस्त 2026 में भी ईरानी अधिकारियों ने यही रुख दोहराया था। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसके बंद रहने का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल व गैस की कीमतों पर पड़ता है।

ईरान की सात शर्तें और मध्यस्थता की कोशिशें

रिपोर्टों के अनुसार, कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों के ज़रिए तेहरान और वाशिंगटन के बीच बातचीत फिर से शुरू कराने के प्रयास जारी हैं। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक़, किसी भी औपचारिक वार्ता से पहले तेहरान ने सात शर्तें रखी हैं, जिनमें से सभी को सार्वजनिक नहीं किया गया है। ईरान की प्रमुख माँगों में युद्ध की समाप्ति, फ्रीज़ किए गए ईरानी फंड की वापसी और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को खत्म करना शामिल बताया गया है।

रेजाई की चेतावनी: अमेरिकी ठिकाने निशाने पर

ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रेजाई ने भी कहा है कि तेहरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन केवल अपनी शर्तों पर। उनके बयानों के अनुसार, ईरान को अमेरिकी हमले की आशंका बनी हुई है और उसने अपनी सैन्य योजनाएँ इसी संभावना को ध्यान में रखकर तैयार की हैं। रेजाई ने स्पष्ट किया कि यदि टकराव बढ़ता है तो ईरान क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और अमेरिकी हितों को निशाना बनाने की क्षमता रखता है।

आगे क्या होगा

यह स्थिति ऐसे नाज़ुक मोड़ पर है जहाँ एक ओर मध्यस्थता की उम्मीद है, दूसरी ओर दोनों पक्षों के बीच शर्तों और जवाबी कार्रवाई की भाषा जारी है। होर्मुज की स्थिति पर वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों की नज़र बनी हुई है। यदि मध्यस्थता के प्रयास सफल नहीं हुए और तनाव और बढ़ा, तो आने वाले हफ्ते इस संघर्ष की दिशा तय करने में निर्णायक हो सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों को यह संकेत कि दरवाज़ा बंद नहीं है। लेकिन सात गोपनीय शर्तें और होर्मुज पर एकतरफा नियंत्रण — ये दोनों तत्व किसी भी वार्ता को अत्यंत जटिल बनाते हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि सात महीने के सशस्त्र संघर्ष के बावजूद कोई भी पक्ष औपचारिक वार्ता-मेज़ तक नहीं पहुँचा है — यह दर्शाता है कि विश्वास की खाई कितनी गहरी है। होर्मुज की स्थिति वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए समय-बम बनी हुई है, और बिना ठोस रियायतों के मध्यस्थता के प्रयास महज़ कूटनीतिक औपचारिकता बनकर रह सकते हैं।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गालिबाफ ने ईरान-अमेरिका युद्ध पर क्या कहा?
ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने 20 सितंबर 2026 को कहा कि ईरान को 'लड़ना भी है और बातचीत भी करनी है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्णायक समय आने पर ईरान अपनी पूरी सैन्य ताकत से दुश्मन को 'भयंकर झटके' देगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान का रुख क्या है?
ईरान ने साफ कहा है कि अमेरिका द्वारा अपनी प्रतिबद्धताएँ पूरी किए जाने तक होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला जाएगा। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसके बंद रहने से अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें प्रभावित हो रही हैं।
ईरान ने बातचीत के लिए क्या शर्तें रखी हैं?
ईरानी अधिकारियों के मुताबिक़ तेहरान ने अमेरिका के साथ किसी भी औपचारिक वार्ता से पहले सात शर्तें रखी हैं। इनमें युद्ध की समाप्ति, फ्रीज़ किए गए ईरानी फंड की वापसी और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाना प्रमुख माँगें बताई गई हैं, हालाँकि सभी शर्तें सार्वजनिक नहीं की गई हैं।
ईरान-अमेरिका के बीच मध्यस्थता में कौन शामिल है?
कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों के ज़रिए तेहरान और वाशिंगटन के बीच बातचीत दोबारा शुरू कराने के प्रयास जारी हैं। हालाँकि अभी तक कोई औपचारिक वार्ता शुरू नहीं हुई है।
मोहसेन रेजाई ने अमेरिका को क्या चेतावनी दी?
ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रेजाई ने कहा कि यदि अमेरिका के साथ टकराव बढ़ता है तो ईरान क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और अमेरिकी हितों को निशाना बनाने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत को तैयार है, लेकिन केवल अपनी शर्तों पर।
राष्ट्र प्रेस
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