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गुजरात में ₹226 करोड़ के क्रिप्टो नेटवर्क का भंडाफोड़, आतंकी फंडिंग और ड्रग्स से जुड़े 12 आरोपी गिरफ्तार

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गुजरात में ₹226 करोड़ के क्रिप्टो नेटवर्क का भंडाफोड़, आतंकी फंडिंग और ड्रग्स से जुड़े 12 आरोपी गिरफ्तार

सारांश

गुजरात के गांधीनगर साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने ₹226 करोड़ के उस क्रिप्टो नेटवर्क का पर्दाफाश किया जो कथित तौर पर आतंकी फंडिंग, ड्रग्स तस्करी और डार्क वेब से जुड़ा था। ब्लॉकचेन विश्लेषण से खुले इस मामले में 12 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।

मुख्य बातें

गांधीनगर साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने 5 जून 2026 को ₹226 करोड़ से अधिक के संदिग्ध क्रिप्टोकरेंसी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया।
नेटवर्क कथित तौर पर आतंकी फंडिंग, अंतर्राष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी और डार्क वेब गतिविधियों से जुड़ा पाया गया।
'डर्टी क्रिप्टो' को USDT में बदलने वाले गैंग सहित अब तक 12 आरोपी गिरफ्तार।
आरोपियों पर IPC 2023 की धारा 111(2)(बी), 153, 61 और IT अधिनियम 2008 की धारा 66(सी), 66(डी) के तहत मामला दर्ज।
पुलिस ने नागरिकों को बैंक खाते किराए पर न देने और संदिग्ध P2P क्रिप्टो ट्रांजैक्शन से बचने की चेतावनी दी।

गुजरात के गांधीनगर स्थित साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने 5 जून 2026 को ₹226 करोड़ से अधिक के एक संदिग्ध अंतर्राष्ट्रीय क्रिप्टोकरेंसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया, जो कथित तौर पर आतंकवादी फंडिंग, अंतर्राष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी और डार्क वेब गतिविधियों से जुड़ा पाया गया है। साइबर पुलिस ने इस मामले में अब तक 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 'डर्टी क्रिप्टो' को USDT (टेदर) में बदलने वाले गैंग के सदस्य भी शामिल हैं।

मुख्य घटनाक्रम

जाँच अधिकारियों के अनुसार, साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की तकनीकी इकाई ने ब्लॉकचेन ट्रांजैक्शन के गहन विश्लेषण के आधार पर इस नेटवर्क की पहचान की। जाँच में सामने आया कि यह नेटवर्क डार्क वेब पर नशीली दवाओं की बिक्री, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी संगठनों की वित्तीय मदद में संलिप्त था।

एफआईआर में दर्ज क्रिप्टो वॉलेट की जाँच के दौरान पुलिस को पता चला कि सब्बीर अली सरानी नाओ के छोटे बेटे हदीरजा शब्बीर अली सरानी और उसके दोस्त मोहम्मद जमीन अब्बास अली जिगर नाओ ने मिलकर सब्बीर अली की KYC जानकारी का दुरुपयोग करते हुए एक 'डर्टी क्रिप्टो' वॉलेट खोला और उसके ज़रिये गैर-कानूनी फंडिंग की।

पुलिस की कार्रवाई और टीम गठन

पुलिस अधीक्षक (साइबर अपराध) संजय केशवलाल ने बताया कि डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP), CID क्राइम और रेलवे, डॉ. के. लक्ष्मी नारायण राव और डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DIG) बिपिन अहीर के निर्देशों पर सख्त कार्रवाई की गई। SP डॉ. राजदीप सिंह झाला, SP संजय केशवाला और SP विवेक भेड़ा ने अलग-अलग टीमें गठित कर ह्यूमन सोर्स और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पहले 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इस कड़ी में अब 2 और आरोपियों को हिरासत में लिया गया है।

कानूनी धाराएँ

आरोपियों के विरुद्ध इंडियन पीनल कोड 2023 की धारा 111(2)(बी), 153 और 61 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2008 की धारा 66(सी) और 66(डी) के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। आरोपों में संगठित गिरोह बनाना, वित्तीय चैनलों के माध्यम से आतंकवादी गतिविधियों में सहायता और किसी मित्र देश की सुरक्षा के विरुद्ध कार्य करने की साजिश शामिल है।

आम जनता के लिए चेतावनी

साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने बैंक खाते किराए पर न दें और किसी अनजान व्यक्ति को कमीशन के लालच में खाते का उपयोग न करने दें, क्योंकि ऐसे खाते ड्रग्स तस्करी, साइबर फ्रॉड या आतंकी फंडिंग जैसे गंभीर अपराधों में इस्तेमाल हो सकते हैं और खाताधारक स्वयं कानूनी दायरे में आ सकता है।

इसके अतिरिक्त, क्रिप्टोकरेंसी के पीयर-टू-पीयर (P2P) प्लेटफॉर्म पर संदिग्ध या अनजान स्रोतों से फंड न लेने की सलाह दी गई है। अधिकारियों ने टेलीग्राम, व्हाट्सऐप और अन्य सोशल मीडिया के ज़रिये अधिक रिटर्न का प्रलोभन देने वाली क्रिप्टो या गेमिंग स्कीमों से भी सतर्क रहने की चेतावनी दी है।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देश में साइबर अपराध और क्रिप्टो के दुरुपयोग की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। गुजरात पुलिस की यह कार्रवाई राज्य में डिजिटल वित्तीय अपराधों के विरुद्ध बढ़ती सतर्कता का संकेत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिससे P2P प्लेटफॉर्म एक कमज़ोर कड़ी बने हुए हैं। ब्लॉकचेन विश्लेषण से मिली सफलता सराहनीय है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या राज्य पुलिस बलों के पास इस पैमाने की जाँच को अंजाम तक पहुँचाने के लिए पर्याप्त तकनीकी और कानूनी संसाधन हैं। अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क की संलिप्तता को देखते हुए केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका और प्रत्यर्पण की संभावनाएँ इस मामले की असली कसौटी होंगी।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात में पकड़े गए ₹226 करोड़ के क्रिप्टो नेटवर्क का मामला क्या है?
गांधीनगर के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने एक ऐसे अंतर्राष्ट्रीय क्रिप्टोकरेंसी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया जो कथित तौर पर ₹226 करोड़ से अधिक की आतंकी फंडिंग, ड्रग्स तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग में संलिप्त था। इस मामले में अब तक 12 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
'डर्टी क्रिप्टो' को USDT में बदलना क्यों अपराध है?
अपराध या गैर-कानूनी गतिविधियों से अर्जित क्रिप्टोकरेंसी को 'डर्टी क्रिप्टो' कहा जाता है। इसे USDT जैसी स्टेबलकॉइन में बदलकर उसकी उत्पत्ति छुपाना मनी लॉन्ड्रिंग की श्रेणी में आता है और भारतीय कानून के तहत दंडनीय अपराध है।
इस मामले में किन धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है?
आरोपियों पर इंडियन पीनल कोड 2023 की धारा 111(2)(बी), 153 और 61 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2008 की धारा 66(सी) और 66(डी) के तहत मामला दर्ज है। आरोपों में संगठित गिरोह बनाना, आतंकी गतिविधियों में वित्तीय सहायता और मित्र देश की सुरक्षा के विरुद्ध साजिश शामिल हैं।
आम नागरिक क्रिप्टो से जुड़े इस तरह के अपराधों से कैसे बचें?
पुलिस ने सलाह दी है कि नागरिक अपने बैंक खाते किसी को किराए पर न दें और P2P क्रिप्टो प्लेटफॉर्म पर अनजान स्रोतों से फंड न लें। टेलीग्राम या व्हाट्सऐप पर अधिक रिटर्न का वादा करने वाली क्रिप्टो स्कीमों से भी दूर रहें।
इस जाँच में किन अधिकारियों की भूमिका रही?
DGP डॉ. के. लक्ष्मी नारायण राव और DIG बिपिन अहीर के निर्देश पर SP डॉ. राजदीप सिंह झाला, SP संजय केशवाला और SP विवेक भेड़ा की टीमों ने यह कार्रवाई की। ह्यूमन सोर्स और ब्लॉकचेन तकनीकी विश्लेषण के ज़रिये नेटवर्क की पहचान की गई।
राष्ट्र प्रेस
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