ऑपरेशन साइहॉक 4.0: दो और धोखेबाजों की गिरफ्तारी, मॉर्फ्ड फोटो से ब्लैकमेलिंग का खुलासा

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ऑपरेशन साइहॉक 4.0: दो और धोखेबाजों की गिरफ्तारी, मॉर्फ्ड फोटो से ब्लैकमेलिंग का खुलासा

सारांश

दिल्ली पुलिस ने ऑपरेशन साइहॉक 4.0 के तहत दो धोखेबाजों को गिरफ्तार किया है, जो नकली लोन ऐप्स के माध्यम से पीड़ितों को ठगते थे। इन आरोपियों ने मॉर्फ्ड फोटो के जरिए ब्लैकमेलिंग का काम किया। जानें इस गिरोह की पूरी कहानी।

Key Takeaways

  • ऑपरेशन साइहॉक 4.0 के तहत दो और धोखेबाज गिरफ्तार हुए हैं।
  • इन आरोपियों ने मॉर्फ्ड तस्वीरों से ब्लैकमेलिंग की।
  • पुलिस ने विदेशी नंबरों से चैट्स का सबूत जुटाया।
  • गिरोह ने नकली लोन ऐप्स के माध्यम से ठगी की।
  • दिल्ली पुलिस की कार्रवाई सराहनीय है।

नई दिल्ली, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली पुलिस की साइबर टीम ने नकली लोन ऐप्स के माध्यम से धोखाधड़ी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। ऑपरेशन साइहॉक 4.0 के तहत, दक्षिण-पश्चिम जिले की साइबर पुलिस ने दो और कुख्यात धोखेबाजों को गिरफ्तार किया है। ये लोग पाकिस्तान और बांग्लादेश के वर्चुअल नंबरों का उपयोग करके पीड़ितों को ठगने में लगे हुए थे।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए दोनों व्यक्तियों के नाम करण कुमार (24 वर्ष) और शमी अहमद (27 वर्ष) हैं। ये दोनों कापसहेड़ा (कपाशेरा) इलाके के निवासी हैं। इनके पास से दो मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं, जिनमें आपत्तिजनक व्हाट्सएप चैट्स और नकली लोन ऐप से जुड़े सबूत शामिल हैं।

दिल्ली पुलिस के डीसीपी (दक्षिण-पश्चिम) अमित गोयल ने बताया कि पहले ऑपरेशन साइहॉक 4.0 में चार धोखेबाजों को गिरफ्तार किया गया था। अब इस गिरोह के दो और सक्रिय सदस्यों को पकड़ा गया है। आरोपियों ने पीड़ितों को बिना गारंटी लोन देने का झांसा देकर ठगा और फिर उनकी मॉर्फ्ड तस्वीरें साझा करने की धमकी देकर पैसे मांगे।

जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने बैंक ऑफ बड़ौदा और बैंक ऑफ इंडिया के कुछ खातों का उपयोग 'म्यूल अकाउंट' के रूप में किया। इन खातों में ठगी का पैसा जमा कर, उसे बाद में यूपीआई क्यूआर कोड के माध्यम से निकाला जाता था। पकड़े गए मोबाइल फोनों से विदेशी वर्चुअल नंबरों से हुई चैट्स भी मिली हैं, जिनमें पाकिस्तान और बांग्लादेश के हैंडलर्स के साथ संपर्क की जानकारी स्पष्ट है।

डीसीपी अमित गोयल ने बताया कि जैसे ही पीड़ित नकली लोन ऐप पर रजिस्टर करते, उनका मोबाइल डेटा बैकएंड टीम के पास चला जाता। लोन की पहली किस्त कटते ही आरोपी पीड़ित और उसके परिवार को मॉर्फ्ड फोटो भेजकर ब्लैकमेल करते। ठगी की रकम म्यूल अकाउंट्स में जमा होने के बाद उसे क्रिप्टोकरेंसी (यूएसडीटी) में बदलकर सुराग मिटा दिया जाता था।

करण कुमार एक रैपिडो ड्राइवर है और शमी अहमद भी इसी पेशे से जुड़ा है। दोनों ने कमीशन के लालच में अपने बैंक खाते जालसाजों को दिए थे। शमी अहमद ने अपना खाता एक व्यक्ति को दिया, जिसका नाम राहुल है, जो गिरोह का एक और सदस्य है।

दिल्ली पुलिस की साइबर टीम इंस्पेक्टर प्रवेश कौशिक के नेतृत्व में काम कर रही है। पूरे ऑपरेशन की निगरानी एसीपी संघमित्रा ने की। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या पाकिस्तान-बांग्लादेश के वर्चुअल नंबरों का उपयोग भारत में बैठे अपराधी कर रहे थे या विदेश में बैठे हैंडलर सीधे संपर्क में थे।

Point of View

जिसमें तकनीकी गड़बड़ी का उपयोग करके लोगों को ठगा गया। दिल्ली पुलिस की कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन यह भी दर्शाता है कि साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
NationPress
14/04/2026

Frequently Asked Questions

ऑपरेशन साइहॉक 4.0 क्या है?
यह एक पुलिस कार्रवाई है जिसके तहत दिल्ली पुलिस ने धोखाधड़ी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया।
गिरफ्तार किए गए आरोपी कौन हैं?
गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम करण कुमार और शमी अहमद हैं।
इन लोगों ने किस प्रकार की धोखाधड़ी की?
इन लोगों ने नकली लोन ऐप्स के माध्यम से पीड़ितों को ठगा और मॉर्फ्ड फोटो से ब्लैकमेल किया।
पुलिस ने क्या सबूत जुटाए?
पुलिस ने मोबाइल फोनों से आपत्तिजनक चैट्स और म्यूल अकाउंट्स के सबूत जुटाए हैं।
इस गिरोह के पीछे कौन थे?
इस गिरोह के सदस्य पाकिस्तान और बांग्लादेश के वर्चुअल नंबरों का उपयोग कर रहे थे।
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