मायावती ने अंबेडकर जयंती पर दी श्रद्धांजलि, सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति का कारवां जारी रहेगा
सारांश
Key Takeaways
- डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती 14 अप्रैल को मनाई जाती है।
- मायावती ने बाबा साहेब के उद्देश्यों पर ध्यान केंद्रित किया।
- सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति का कारवां आगे बढ़ेगा।
लखनऊ, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत रत्न और संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती का पर्व उत्तर प्रदेश सहित पूरे भारत में मनाया जा रहा है। इस अवसर पर दलितों की नेता और बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने निवास पर डॉ. अंबेडकर को श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने इस मौके पर समर्थकों और कार्यकर्ताओं के लिए एक संदेश भी जारी किया।
मायावती ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि देश की सरकारें बाबा साहेब के सर्वजन-हितैषी और समतामूलक संविधान के उद्देश्यों को ईमानदारी से लागू करतीं, तो आज भारत एक सशक्त, आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में उभर चुका होता और गरीबी, बेरोजगारी, भेदभाव और अन्याय से मुक्त होता।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा, "विशाल जनसंख्या वाले अपने भारत देश में 'बहुजन समाज' के मसीहा, भारतरत्न बोधिसत्व परमपूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को आज उनकी जयंती पर प्रातः शत्-शत् नमन, पुष्पांजलि एवं अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हुए बसपा के सभी लोगों का तहेदिल से आभार।"
बसपा सुप्रीमो ने आगे कहा, "सभी जानते हैं कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन गरीबों, उपेक्षितों और शोषितों के उत्थान के लिए संघर्ष में व्यतीत हुआ। उन्होंने संविधान में इस सुरक्षा और सम्मान की गारंटी दी। यदि केंद्र और राज्य सरकारें उनके संविधान के उद्देश्यों को सही ढंग से पूरा करतीं, तो भारत आज तक आत्मनिर्भर और विकसित देश बन चुका होता। यदि ऐसा नहीं हो सका, तो इसका उत्तर तलाशने पर बाबा साहेब का 'सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति' का कारवां चुनावी सफलता के साथ आगे बढ़ेगा।"
इस अवसर पर बसपा प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने कहा, "बाबासाहेब की जयंती पर सभी नागरिकों को शुभकामनाएं। गोमती नगर में डॉ. आंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल पर भव्य आयोजन किया जा रहा है। बहुजन समाज पार्टी हर साल इस जयंती को मनाती है, जबकि अन्य दलों की तरफ से केवल दिखावे का आयोजन किया जाता है।"