सतुआ संक्रांति: दान का महत्व और सत्तू के लाभ

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सतुआ संक्रांति: दान का महत्व और सत्तू के लाभ

सारांश

सतुआ संक्रांति के दिन दान का विशेष महत्व है। जानिए सत्तू, घड़े और अन्य दानों का धार्मिक और स्वास्थ्य लाभ क्या है।

Key Takeaways

  • सतुआ संक्रांति का पर्व धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
  • इस दिन घड़ा, पंखा, सत्तू, और ठंडे फल दान किए जाते हैं।
  • सत्तू का सेवन गर्मियों में ऊर्जा और ठंडक प्रदान करता है।
  • दान से पितर तृप्त होते हैं और देवता प्रसन्न होते हैं।
  • सत्तू स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है।

नई दिल्ली, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आज पूरे देश में सतुआ संक्रांति या सतुआन पर्व का उत्सव मनाया जा रहा है। इस दिन घड़े, पंखा, सत्तू और ठंडे फलों का दान करने का महत्व है। मान्यता है कि इन दानों से असीम पुण्य की प्राप्ति होती है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दान से देवी-देवता खुश होते हैं और पूर्वजों की आत्माएं तृप्त होती हैं। सतुआ संक्रांति गर्मियों के आगमन का प्रतीक मानी जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने राजा बलि को पराजित करने के बाद सबसे पहले सत्तू का भोग किया था। इसी कारण इस दिन सत्तू का सेवन और दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

धर्म शास्त्र के जानकारों के अनुसार, सतुआ संक्रांति का पर्व सनातन धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह दिन भगवान सूर्य के राशि परिवर्तन से जुड़ा हुआ है। आज सूर्य देव मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश कर रहे हैं। इस अवसर पर श्रद्धालु गंगा या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और सूर्य देव की पूजा-अर्चना करते हैं।

पूजा के बाद श्रद्धालु सत्तू, जल से भरा घड़ा, गुड़, मौसमी फल जैसे बेल, तरबूज, खरबूज और कच्चा आम, ककड़ी, खीरा आदि का दान करते हैं। भरा हुआ घड़ा दान करने से पितर तृप्त होते हैं जबकि सत्तू दान करने से देवता प्रसन्न होते हैं और पापों का नाश होता है। यह दिन ग्रह दोष शांति से भी संबंधित है; जिनकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर है, वे इस दिन जल से भरा घड़ा दान करें तो चंद्रमा बलवान होता है।

यह दिन मेष संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है। सूर्य के राशि परिवर्तन के साथ ही खरमास का अंत हो जाता है। खरमास खत्म होने के बाद शुभ कार्य जैसे विवाह, उपनयन संस्कार और अन्य मांगलिक अनुष्ठान शुरू होते हैं।

धर्म में सत्तू को पवित्र माना जाता है, और यह स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। गर्मियों में सत्तू का सेवन शरीर में ऊर्जा बनाए रखता है। सत्तू का शरबत पीने से शरीर की गर्मी कम होती है और ठंडक मिलती है। यह फाइबर से भरपूर होता है, जिससे पाचन तंत्र मजबूत बनता है।

आयुर्वेदाचार्यों का मानना है कि गर्मी में लू से बचने के लिए घर से बाहर जाने से पहले सत्तू या सत्तू का शरबत पीने से लू लगने का खतरा बहुत कम हो जाता है। सत्तू प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होता है, जो गर्मियों में शरीर को ठंडा और स्वस्थ रखने में मदद करता है।

Point of View

जो न केवल धार्मिक मान्यता का प्रतीक है, बल्कि स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी अत्यंत लाभकारी है। यह पर्व दान देने की संस्कृति को प्रोत्साहित करता है और समाज में सद्भावना का संचार करता है।
NationPress
16/04/2026

Frequently Asked Questions

सतुआ संक्रांति का क्या महत्व है?
सतुआ संक्रांति का महत्व दान देने और देवी-देवताओं को प्रसन्न करने में है।
इस दिन कौन-कौन से दान किए जाते हैं?
इस दिन घड़ा, पंखा, सत्तू और ठंडे फलों का दान किया जाता है।
सत्तू का सेवन क्यों फायदेमंद है?
सत्तू गर्मियों में ऊर्जा बनाए रखता है और शरीर को ठंडा रखता है।
सतुआ संक्रांति कब मनाई जाती है?
सतुआ संक्रांति प्रतिवर्ष अप्रैल महीने में मनाई जाती है।
क्या सत्तू का दान करने से पापों का नाश होता है?
हां, सत्तू का दान करने से देवता प्रसन्न होते हैं और पापों का नाश होता है।
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