केरल CM सतीशन ने PM मोदी को लिखा पत्र, खनन कानून संशोधनों से राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता पर खतरे की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने सोमवार, 17 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर खनन और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों की तत्काल समीक्षा की माँग की है। उनका कहना है कि ये बदलाव राज्यों की संवैधानिक और वित्तीय शक्तियों को गंभीर रूप से सीमित कर सकते हैं और केरल के राजस्व हितों को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
मुख्य आपत्तियाँ: सेक्शन 9डी पर विवाद
सतीशन ने विशेष रूप से प्रस्तावित सेक्शन 9डी पर कड़ी आपत्ति जताई है। इस प्रावधान के तहत खनिज भंडार वाली ज़मीन पर टैक्स, सेस और अन्य शुल्क लगाने की शक्ति केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानदंडों के अधीन हो जाएगी। मुख्यमंत्री का तर्क है कि यह व्यवस्था सीधे तौर पर राज्यों की संवैधानिक शक्तियों में हस्तक्षेप करती है।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रस्तावित विधेयक में खनिज भंडार वाली ज़मीन को केंद्र के नियामक दायरे में लाने और राज्यों की बकाया टैक्स देनदारियों को समाप्त करने के प्रावधान भी शामिल हैं — जिसे केरल सरकार अपने राजकोषीय अधिकारों पर सीधा प्रहार मानती है।
केरल के राजस्व पर संभावित असर
सतीशन ने चेतावनी दी कि केरल में खनिज संसाधन पर्याप्त मात्रा में हैं और प्रस्तावित बदलावों के गंभीर वित्तीय परिणाम हो सकते हैं। उनके अनुसार, खनिज भूमि पर राज्य की वित्तीय शक्तियों पर किसी भी प्रकार की रोक से न केवल राज्य के राजस्व पर, बल्कि स्थानीय स्व-शासन संस्थाओं की कर आय पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले का हवाला
मुख्यमंत्री ने सर्वोच्च न्यायालय के 2024 के फैसले का उल्लेख करते हुए तर्क दिया कि उस निर्णय में रॉयल्टी और टैक्स के बीच स्पष्ट विभेद किया गया था — न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि खनन अधिकारों के लिए दी जाने वाली रॉयल्टी कोई कर नहीं है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि संविधान की 7वीं अनुसूची की सूची-II की प्रविष्टि 50 राज्यों को खनिज अधिकारों पर कर लगाने की स्पष्ट शक्ति देती है।
इसके अतिरिक्त, सर्वोच्च न्यायालय ने सूची-II की प्रविष्टि 49 के तहत राज्यों की उस शक्ति को भी मान्यता दी है जिसके अनुसार वे खनिज उत्पादन की मात्रा या मूल्य के आधार पर खनिज संसाधनों वाली भूमि पर कर लगा सकते हैं। सतीशन का कहना है कि प्रस्तावित संशोधन उन्हीं शक्तियों को कमज़ोर करने का जोखिम उठाते हैं जिन्हें संविधान और न्यायालय दोनों ने राज्यों के अधिकार के रूप में मान्यता दी है।
केंद्र-राज्य संबंधों की व्यापक पृष्ठभूमि
यह पत्र ऐसे समय में आया है जब वित्तीय शक्तियों को लेकर केंद्र-राज्य संबंध एक संवेदनशील मुद्दा बने हुए हैं। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी गैर-भाजपा शासित राज्य ने खनन कानूनों में केंद्रीय हस्तक्षेप पर आपत्ति जताई हो — झारखंड और ओडिशा भी इससे पहले इसी तरह की चिंताएँ व्यक्त कर चुके हैं।
केरल की मुख्य चिंता यह है कि यदि खनिज भूमि पर नियंत्रण केंद्र को सौंपा जाता है या राज्य के कर अधिकारों में कटौती की जाती है, तो राज्य और स्थानीय सरकारों के लिए राजस्व की नई चुनौती उत्पन्न होगी।
आगे क्या होगा
सतीशन ने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की है कि वे केरल की चिंताओं पर तत्काल ध्यान दें और यह सुनिश्चित करें कि राज्य के संवैधानिक एवं वित्तीय अधिकारों की रक्षा हो। अब सबकी नज़रें केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया और संसद में इस विधेयक की आगामी यात्रा पर टिकी हैं।