23 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

यूएई में भारतीय पैरामेडिक्स के भविष्य पर संकट, केरल CM सतीशन ने PM मोदी से माँगा तत्काल हस्तक्षेप

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
यूएई में भारतीय पैरामेडिक्स के भविष्य पर संकट, केरल CM सतीशन ने PM मोदी से माँगा तत्काल हस्तक्षेप

सारांश

केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने PM मोदी को पत्र लिखा है — यूएई में अमेरिका-ईरान तनाव के बीच फँसे भारतीय पैरामेडिकल स्टाफ के ग्रेस पीरियड खत्म होने और जबरन निर्वासन के खतरे पर। मलयाली परिवारों की आजीविका और बच्चों की शिक्षा दाँव पर है।

मुख्य बातें

केरल के मुख्यमंत्री वी.डी.
सतीशन ने 7 जून 2026 को PM नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर यूएई में भारतीय पैरामेडिकल स्टाफ के संकट पर तत्काल हस्तक्षेप माँगा।
अमेरिका-ईरान तनाव के कारण दुबई स्थित ईरानी अस्पताल समेत अन्य संस्थानों में कार्यरत भारतीय नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों को नौकरी, विज़िट और डिपेंडेंट वीज़ा मिलने में बाधा आ रही है।
कई स्वास्थ्यकर्मियों का ग्रेस पीरियड समाप्त होने के कगार पर है; जबरन निर्वासन और पेशेवर लाइसेंस खोने का खतरा।
संकट का असर मलयाली परिवारों की आजीविका और बच्चों की शिक्षा पर भी पड़ रहा है।
सतीशन ने विदेश मंत्रालय से यूएई दूतावास के ज़रिये मानवीय आधार पर समाधान तलाशने की माँग की।

केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने 7 जून 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में कार्यरत भारतीय पैरामेडिकल स्टाफ और नर्सों के समक्ष उत्पन्न गंभीर वीज़ा संकट पर तत्काल ध्यान देने की अपील की है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के कारण खाड़ी क्षेत्र में वीज़ा प्रक्रियाएँ बाधित हो गई हैं, जिससे सैकड़ों भारतीय स्वास्थ्यकर्मियों की नौकरी और भविष्य खतरे में पड़ गया है।

संकट की जड़: वीज़ा अड़चनें और ग्रेस पीरियड की समाप्ति

सतीशन ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि दुबई स्थित एक ईरानी अस्पताल सहित कई संस्थानों में कार्यरत भारतीय स्वास्थ्यकर्मी अत्यंत कठिन परिस्थितियों में हैं। अमेरिका-ईरान तनाव के चलते इन कर्मचारियों को नौकरी वीज़ा, विज़िट वीज़ा और डिपेंडेंट वीज़ा प्राप्त करने में गंभीर बाधाएँ आ रही हैं।

मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि इनमें से कई स्वास्थ्यकर्मियों का ग्रेस पीरियड समाप्त होने के कगार पर है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो उन्हें जबरन निर्वासन (डिपोर्टेशन) का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उनके पेशेवर लाइसेंस और भावी रोज़गार के अवसर भी खतरे में पड़ जाएँगे।

मलयाली परिवारों पर असर

सतीशन ने इस बात पर विशेष ज़ोर दिया कि यह संकट केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पारिवारिक है। यूएई में बसे अनेक मलयाली परिवारों की आजीविका और उनके बच्चों की शिक्षा सीधे इन स्वास्थ्यकर्मियों की नौकरी पर निर्भर है। कई डॉक्टरों की रोज़ी-रोटी पर भी संकट के बादल मँडरा रहे हैं।

गौरतलब है कि केरल से बड़ी संख्या में नर्सें और पैरामेडिकल स्टाफ दशकों से खाड़ी देशों में सेवाएँ दे रहे हैं और उनका प्रेषण (remittance) राज्य की अर्थव्यवस्था की एक महत्वपूर्ण धुरी है।

सरकार से क्या माँगा

मुख्यमंत्री सतीशन ने केंद्र सरकार के विदेश मंत्रालय से अनुरोध किया है कि वह यूएई स्थित भारतीय दूतावास और यूएई के संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय कर मानवीय आधार पर एक निष्पक्ष और सहानुभूतिपूर्ण समाधान तलाशे। उन्होंने इस मामले को राजनयिक प्राथमिकता देने की माँग की है।

भारतीय स्वास्थ्यकर्मियों का योगदान

पत्र में सतीशन ने यह भी रेखांकित किया कि भारतीय — विशेषकर केरल के — स्वास्थ्यकर्मी यूएई और समूचे खाड़ी क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ रहे हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान भी ये पेशेवर अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे और असाधारण समर्पण के साथ सेवाएँ दीं।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब खाड़ी क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव के कारण प्रवासी भारतीय कामगारों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया और विदेश मंत्रालय के कदम इस संकट की दिशा तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो हर बार किसी भू-राजनीतिक उथल-पुथल में उजागर होती है। खाड़ी में लाखों भारतीय कामगार हैं, लेकिन तीसरे देशों के द्विपक्षीय तनाव से उत्पन्न वीज़ा संकट के लिए कोई स्थायी राजनयिक तंत्र नहीं दिखता। केरल जैसे राज्य, जिनकी अर्थव्यवस्था प्रेषण पर टिकी है, बार-बार केंद्र से गुहार लगाते हैं — पर प्रतिक्रिया प्रायः घटना-आधारित होती है, नीति-आधारित नहीं। असली सवाल यह है कि क्या विदेश मंत्रालय इस बार एक स्थायी आपातकालीन वीज़ा-सहायता प्रोटोकॉल बनाएगा, या फिर यह भी एक और पत्र बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूएई में भारतीय पैरामेडिकल स्टाफ को किस समस्या का सामना करना पड़ रहा है?
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के कारण यूएई में कार्यरत भारतीय नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ को नौकरी वीज़ा, विज़िट वीज़ा और डिपेंडेंट वीज़ा मिलने में गंभीर बाधाएँ आ रही हैं। कई कर्मचारियों का ग्रेस पीरियड समाप्त होने वाला है और उन्हें जबरन निर्वासन का खतरा है।
केरल के मुख्यमंत्री सतीशन ने PM मोदी से क्या माँग की है?
मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने PM मोदी को पत्र लिखकर विदेश मंत्रालय से यूएई दूतावास और यूएई के संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर मानवीय आधार पर एक निष्पक्ष और सहानुभूतिपूर्ण समाधान तलाशने की माँग की है। उन्होंने इस मामले को राजनयिक प्राथमिकता देने की अपील की है।
इस संकट से मलयाली परिवारों पर क्या असर पड़ रहा है?
यूएई में बसे अनेक मलयाली परिवारों की आजीविका और बच्चों की शिक्षा सीधे इन स्वास्थ्यकर्मियों की नौकरी पर निर्भर है। वीज़ा संकट और संभावित निर्वासन से इन परिवारों में गहरी चिंता व्याप्त है।
दुबई के किस अस्पताल का इस मामले में ज़िक्र है?
मुख्यमंत्री सतीशन ने अपने पत्र में दुबई स्थित एक ईरानी अस्पताल का उल्लेख किया है, जहाँ केरल के स्वास्थ्यकर्मी अत्यंत कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। अमेरिका-ईरान तनाव के कारण इस अस्पताल से जुड़े कर्मचारियों के वीज़ा मामले विशेष रूप से प्रभावित हुए हैं।
भारतीय स्वास्थ्यकर्मियों ने यूएई में क्या योगदान दिया है?
भारतीय — विशेषकर केरल के — स्वास्थ्यकर्मी यूएई और खाड़ी क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं में दशकों से अहम भूमिका निभा रहे हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान भी ये पेशेवर अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे और असाधारण समर्पण के साथ सेवाएँ दीं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 दिन पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 6 महीने पहले