यूएई में भारतीय पैरामेडिक्स के भविष्य पर संकट, केरल CM सतीशन ने PM मोदी से माँगा तत्काल हस्तक्षेप
सारांश
मुख्य बातें
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने 7 जून 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में कार्यरत भारतीय पैरामेडिकल स्टाफ और नर्सों के समक्ष उत्पन्न गंभीर वीज़ा संकट पर तत्काल ध्यान देने की अपील की है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के कारण खाड़ी क्षेत्र में वीज़ा प्रक्रियाएँ बाधित हो गई हैं, जिससे सैकड़ों भारतीय स्वास्थ्यकर्मियों की नौकरी और भविष्य खतरे में पड़ गया है।
संकट की जड़: वीज़ा अड़चनें और ग्रेस पीरियड की समाप्ति
सतीशन ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि दुबई स्थित एक ईरानी अस्पताल सहित कई संस्थानों में कार्यरत भारतीय स्वास्थ्यकर्मी अत्यंत कठिन परिस्थितियों में हैं। अमेरिका-ईरान तनाव के चलते इन कर्मचारियों को नौकरी वीज़ा, विज़िट वीज़ा और डिपेंडेंट वीज़ा प्राप्त करने में गंभीर बाधाएँ आ रही हैं।
मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि इनमें से कई स्वास्थ्यकर्मियों का ग्रेस पीरियड समाप्त होने के कगार पर है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो उन्हें जबरन निर्वासन (डिपोर्टेशन) का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उनके पेशेवर लाइसेंस और भावी रोज़गार के अवसर भी खतरे में पड़ जाएँगे।
मलयाली परिवारों पर असर
सतीशन ने इस बात पर विशेष ज़ोर दिया कि यह संकट केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पारिवारिक है। यूएई में बसे अनेक मलयाली परिवारों की आजीविका और उनके बच्चों की शिक्षा सीधे इन स्वास्थ्यकर्मियों की नौकरी पर निर्भर है। कई डॉक्टरों की रोज़ी-रोटी पर भी संकट के बादल मँडरा रहे हैं।
गौरतलब है कि केरल से बड़ी संख्या में नर्सें और पैरामेडिकल स्टाफ दशकों से खाड़ी देशों में सेवाएँ दे रहे हैं और उनका प्रेषण (remittance) राज्य की अर्थव्यवस्था की एक महत्वपूर्ण धुरी है।
सरकार से क्या माँगा
मुख्यमंत्री सतीशन ने केंद्र सरकार के विदेश मंत्रालय से अनुरोध किया है कि वह यूएई स्थित भारतीय दूतावास और यूएई के संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय कर मानवीय आधार पर एक निष्पक्ष और सहानुभूतिपूर्ण समाधान तलाशे। उन्होंने इस मामले को राजनयिक प्राथमिकता देने की माँग की है।
भारतीय स्वास्थ्यकर्मियों का योगदान
पत्र में सतीशन ने यह भी रेखांकित किया कि भारतीय — विशेषकर केरल के — स्वास्थ्यकर्मी यूएई और समूचे खाड़ी क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ रहे हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान भी ये पेशेवर अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे और असाधारण समर्पण के साथ सेवाएँ दीं।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब खाड़ी क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव के कारण प्रवासी भारतीय कामगारों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया और विदेश मंत्रालय के कदम इस संकट की दिशा तय करेंगे।