एमपी कांग्रेस का बड़ा सवाल: सांची डेयरी सोसायटियाँ 7,811 से घटकर 5,502, शाह के दौरे से पहले जवाब माँगा
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश कांग्रेस ने शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026 को राज्य के डेयरी कोऑपरेटिव नेटवर्क में आई गंभीर गिरावट पर सरकार से जवाब माँगा — ठीक उस दिन जब केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह भोपाल पहुँचने वाले थे। राज्य कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आँकड़ों के हवाले से दावा किया कि 'सांची' डेयरी सिस्टम से जुड़ी कोऑपरेटिव सोसायटियों की संख्या 2019-20 में 7,811 से घटकर 2024-25 में मात्र 5,502 रह गई है।
गिरावट के आँकड़े
पटवारी के बयान के अनुसार, डेयरी कोऑपरेटिव सोसायटियों की सदस्यता भी इसी अवधि में 2.68 लाख से घटकर लगभग 2.09 लाख रह गई है। यह लगभग 22% की गिरावट है — एक ऐसे समय में जब केंद्र सरकार डेयरी क्षेत्र में विस्तार का दावा करती रही है। पटवारी ने सीधे पूछा कि इस ह्रास के लिए कौन जिम्मेदार है और इसे रोकने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने दैनिक दूध खरीद को 10.50 लाख किलोग्राम से बढ़ाकर 20 लाख किलोग्राम करने के सरकारी लक्ष्य पर भी सवाल उठाया और 2025 में नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के साथ हुए राज्य समझौते के बाद की प्रगति का ब्यौरा माँगा।
शाह का भोपाल दौरा और गोपालक सम्मेलन
केंद्रीय मंत्री अमित शाह शुक्रवार रात भोपाल पहुँचे और लगभग 23 घंटे वहाँ रहने का कार्यक्रम है। शनिवार को वह बीएचईएल दशहरा मैदान में राज्य-स्तरीय गोपालक सम्मेलन में भाग लेंगे, जिसमें 35,000 से अधिक पशुपालक और डेयरी कोऑपरेटिव सदस्य शामिल होंगे।
इस अवसर पर शाह भोपाल और इंदौर मिल्क यूनियन से जुड़े डेयरी किसानों को बोनस वितरित करेंगे, गौशालाओं को सहायता प्रदान करेंगे, गोपालक दीदियों को सम्मानित करेंगे और डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के अंतर्गत मंजूरी पत्र भी बाँटेंगे। मध्य प्रदेश सरकार के बयान के अनुसार, वह भोपाल कोऑपरेटिव मिल्क यूनियन परिसर में एक नए फर्मेंटेड डेयरी प्रोडक्ट्स प्लांट का उद्घाटन भी करेंगे।
पटवारी की माँग: इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं, किसान की आय बढ़े
पटवारी ने तर्क दिया कि सरकार का ध्यान डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने पर अधिक और किसान की वास्तविक आय पर कम है। उन्होंने दूध की कीमतों में क्षेत्रीय असमानता की ओर इशारा करते हुए उपभोक्ता मूल्य और किसान को मिलने वाली राशि के बीच के अंतर में पारदर्शिता की माँग की।
उनके शब्दों में, 'किसान को दूध की सही कीमत, समय पर भुगतान और एक मजबूत कोऑपरेटिव सिस्टम की जरूरत है। जब तक डेयरी किसानों की आय नहीं बढ़ती, तब तक प्लांट बनाना विकास का पैमाना नहीं हो सकता।' उन्होंने चारे, पशु आहार, दवाओं, पशु चिकित्सा सेवाओं और मजदूरी की बढ़ती लागत का भी उल्लेख किया।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार सहकारिता क्षेत्र को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में गिनाती रही है, और अमित शाह स्वयं सहकारिता मंत्रालय सँभाल रहे हैं। कांग्रेस का यह सवाल गोपालक सम्मेलन से ठीक पहले उठाए जाने की रणनीतिक टाइमिंग स्पष्ट है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में डेयरी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है और लाखों पशुपालक परिवारों की आजीविका इससे जुड़ी है।
आने वाले दिनों में शाह के सम्मेलन से लौटने के बाद यह देखना होगा कि सरकार कोऑपरेटिव सोसायटियों की घटती संख्या और सदस्यता पर कोई ठोस जवाब देती है या नहीं।