गोबरधन योजना: ₹40,000 करोड़ की विदेशी मुद्रा बचत और 1.5 लाख रोज़गार का लक्ष्य, ₹23,731 करोड़ को मंजूरी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार की नव-अनुमोदित गोबरधन (राष्ट्रीय सर्कुलर बायो-एनर्जी योजना) के ज़रिए भारत की आयात-निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह योजना ₹40,000 करोड़ से अधिक की विदेशी मुद्रा बचाएगी, राष्ट्रीय जीडीपी में ₹75,000 करोड़ से अधिक का योगदान देगी और 1.5 लाख नए रोज़गार सृजित करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 7 अगस्त 2026 से एक दिन पूर्व हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ₹23,731 करोड़ के कुल परिव्यय के साथ इस योजना को औपचारिक मंजूरी दी गई।
योजना का दायरा और प्रमुख लक्ष्य
सरकारी बयान के अनुसार, गोबरधन योजना अगले दस वर्षों में कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) के उत्पादन को लगभग दस गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखती है। यह योजना वित्त वर्ष 2027 से 2036 तक लागू रहेगी। इसके तहत स्वदेशी स्वच्छ गैस उत्पादन से करीब एक करोड़ मीट्रिक टन जीवाश्म ईंधन के उपयोग को प्रतिस्थापित करने का अनुमान है।
पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह योजना महत्वपूर्ण है — जैविक कचरे को लैंडफिल में जाने से रोकने पर 4 करोड़ टन (40 मिलियन टन) से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है। इसके अलावा लगभग 25 करोड़ मीट्रिक टन (250 मिलियन मीट्रिक टन) जैविक उर्वरक का उत्पादन होगा, जो कृषि क्षेत्र के लिए भी बड़ा लाभ साबित हो सकता है।
उत्पादकों को बाज़ार की गारंटी
CBG उत्पादकों को बाज़ार की निश्चितता देने के लिए सरकार ने एक विशेष CBG ऑफटेक एश्योरेंस फ्रेमवर्क स्थापित करने की घोषणा की है। इसके तहत गैस की खरीद की गारंटी दी जाएगी और ₹2,110 प्रति एमएमबीटीयू की प्रशासित मूल्य निर्धारित की गई है। परियोजनाओं को प्रति टन प्रतिदिन क्षमता पर ₹2 करोड़ तक की पूंजीगत सहायता मिलेगी, जबकि MSME इकाइयों को 85 प्रतिशत तक क्रेडिट गारंटी का लाभ दिया जाएगा।
CBG मिश्रण लक्ष्य और गैस नेटवर्क एकीकरण
सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों के माध्यम से निर्धारित CBG मिश्रण लक्ष्य हासिल किए जाएंगे। आधिकारिक बयान के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में 3 प्रतिशत, वित्त वर्ष 2028 में 4 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2029 से 5 प्रतिशत मिश्रण लक्ष्य तय किए गए हैं — जो CNG (परिवहन) और PNG (घरेलू) श्रेणियों में लागू होंगे। गौरतलब है कि CBG रासायनिक रूप से प्राकृतिक गैस के समान होती है और इसे मौजूदा गैस वितरण नेटवर्क में बिना किसी बड़े ढाँचागत बदलाव के शामिल किया जा सकता है।
रोज़गार और सर्कुलर अर्थव्यवस्था
प्रत्येक CBG संयंत्र स्थानीय स्तर पर कृषि अवशेष, पशु गोबर और अन्य जैविक अपशिष्टों पर आधारित एक सर्कुलर अर्थव्यवस्था विकसित करेगा। इससे कच्चे माल की आपूर्ति, परिवहन, संयंत्र संचालन और जैविक खाद उत्पादन जैसे क्षेत्रों में रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण रोज़गार और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण दोनों ही नीतिगत प्राथमिकताएँ बनी हुई हैं।
वर्तमान स्थिति: पंजीकृत और चालू संयंत्र
गोबरधन यूनिफाइड रजिस्ट्रेशन पोर्टल के आँकड़ों के अनुसार, देश भर में अब तक 1,908 CBG/बायो-CNG संयंत्र पंजीकृत किए जा चुके हैं। इनमें से 217 संयंत्र पूरी तरह चालू हो चुके हैं, जो प्रतिदिन 0.4 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (MMSCMD) गैस का उत्पादन कर रहे हैं। वहीं 339 संयंत्र अभी निर्माणाधीन हैं। जो भी व्यक्ति या संस्था CBG या बायो-CNG संयंत्र स्थापित करना चाहती है, वह इस पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण संख्या प्राप्त कर सकती है, जो सरकारी सहायता लेने के लिए अनिवार्य होगी।