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गोवर्धन योजना को कैबिनेट की मंजूरी: ₹23,731 करोड़ से CBG उत्पादन दस गुना बढ़ाने का लक्ष्य

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गोवर्धन योजना को कैबिनेट की मंजूरी: ₹23,731 करोड़ से CBG उत्पादन दस गुना बढ़ाने का लक्ष्य

सारांश

₹23,731 करोड़ की गोवर्धन योजना महज एक बायोगैस कार्यक्रम नहीं — यह कृषि अपशिष्ट को ऊर्जा में बदलने की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा है। CBG उत्पादन दस गुना बढ़ाने और 2035-36 तक चक्रीय जैव-अर्थव्यवस्था खड़ी करने का यह दांव आयातित ईंधन निर्भरता घटाने की दिशा में भारत का अब तक का सबसे संरचित प्रयास है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 6 अगस्त 2026 को ₹23,731 करोड़ की राष्ट्रीय चक्रीय जैव ऊर्जा योजना गोवर्धन को मंजूरी दी।
योजना का लक्ष्य घरेलू संपीड़ित बायोगैस (CBG) उत्पादन को लगभग दस गुना बढ़ाना है।
कार्यान्वयन अवधि वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक निर्धारित; पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय प्रशासित करेगा।
सिटी गैस वितरण संस्थाओं के लिए CBG खरीद दायित्व: FY27 में 3% , FY28 में 4% , FY29 से 5% ।
किसान, सहकारी समितियाँ, SME और महिला उद्यमी प्रमुख लाभार्थी; देश में पहले से 200+ CBG संयंत्र स्थापित।
PM मोदी ने एक्स पर इसे स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में 'महत्वपूर्ण कदम' बताया।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 6 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में ₹23,731 करोड़ के कुल परिव्यय वाली राष्ट्रीय चक्रीय जैव ऊर्जा योजना — गोवर्धन — को औपचारिक स्वीकृति दे दी। यह योजना देश में संपीड़ित बायोगैस (CBG) उत्पादन को लगभग दस गुना बढ़ाने और वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक एक सुदृढ़ चक्रीय जैव-अर्थव्यवस्था खड़ी करने के इरादे से लाई गई है।

योजना में क्या शामिल है

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा प्रशासित गोवर्धन योजना संपूर्ण CBG मूल्य श्रृंखला — फीडस्टॉक संग्रह से लेकर गैस की बिक्री तक — के लिए एक एकीकृत मंच तैयार करती है। इसके तहत सुनिश्चित मांग, लाभकारी मूल्य निर्धारण, पूंजी सहायता, पाइपलाइन अवसंरचना, ऋण समर्थन और प्रौद्योगिकी विकास को एक साथ जोड़ा गया है।

योजना के अंतर्गत सिटी गैस वितरण संस्थाओं के लिए CBG खरीद दायित्व निर्धारित किए गए हैं — वित्त वर्ष 2026-27 में 3%, 2027-28 में 4% और 2028-29 से आगे 5% — जो CNG (परिवहन) और PNG (घरेलू) दोनों क्षेत्रों पर लागू होंगे।

कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर

यह योजना कृषि अवशेषों, पशु गोबर, प्रेस मड (गन्ने की 'मैली'), नगरपालिका के जैविक कचरे और अन्य जैव-द्रव्यमान संसाधनों को स्वच्छ ईंधन, जैविक खाद और ग्रामीण आय में बदलने का काम करेगी। प्रत्येक CBG संयंत्र एक स्थानीय चक्रीय अर्थव्यवस्था का केंद्र बनेगा, जिससे किसानों, सहकारी समितियों, लघु एवं मध्यम उद्यमों और महिला उद्यमियों को सीधा लाभ पहुँचेगा।

गौरतलब है कि CBG रासायनिक रूप से प्राकृतिक गैस के समतुल्य है और मौजूदा गैस अवसंरचना में आसानी से एकीकृत हो सकती है, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा के लाभ व्यापक आबादी तक पहुँचाना संभव होगा।

ऊर्जा सुरक्षा और आयात निर्भरता

देश में परिवहन, घरेलू, औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों में प्राकृतिक गैस की मांग लगातार बढ़ रही है। गोवर्धन योजना का उद्देश्य घरेलू CBG उत्पादन के ज़रिये इस बढ़ती मांग का एक बड़ा हिस्सा पूरा करना है, जिससे आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटेगी और ऊर्जा स्थिरता मज़बूत होगी। साथ ही वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी को भी बढ़ावा मिलेगा।

पिछली पहलों से आगे का सफर

यह ऐसे समय में आया है जब सरकार पिछले कई वर्षों में CBG क्षेत्र की नींव को व्यवस्थित रूप से मज़बूत कर चुकी है — सतत परिवहन पहल (SATAT), जैविक खाद के लिए बाज़ार विकास सहायता (MDA), बायोमास एकत्रीकरण मशीनरी (BAM) योजना और राष्ट्रीय जैव ऊर्जा कार्यक्रम के तहत केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA) जैसी योजनाओं के ज़रिये। इन सामूहिक प्रयासों से देश में 200 से अधिक CBG संयंत्र स्थापित हो चुके हैं। गोवर्धन अब इसी नींव पर एक राष्ट्रीय पैमाने का ढाँचा खड़ा करने की कोशिश है।

पीएम मोदी की प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में इसे 'स्वच्छ ऊर्जा, ग्रामीण समृद्धि और आत्मनिर्भर भारत के सामूहिक सपने को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम' बताया। उन्होंने यह भी कहा कि यह योजना निवेश और नवाचार के लिए एक मज़बूत और स्थिर पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करेगी।

आगे चलकर, बड़े पैमाने पर निजी निवेश को आकर्षित करना और निवेशकों, ऋणदाताओं तथा परियोजना विकासकर्ताओं के लिए पूर्वानुमानित माहौल सुनिश्चित करना इस योजना की सफलता की असली कसौटी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

731 करोड़ का ढाँचा और CBG खरीद दायित्व — यह पिछली बायोगैस पहलों की तुलना में अधिक संरचित दिखता है, लेकिन असली परीक्षा निजी निवेश को ज़मीन पर उतारने में है, जो SATAT जैसी योजनाओं में अपेक्षित गति नहीं पकड़ पाया था। 200 से अधिक संयंत्रों की मौजूदा उपस्थिति एक सकारात्मक आधार है, पर 'दस गुना वृद्धि' का लक्ष्य फीडस्टॉक आपूर्ति श्रृंखला और ग्रामीण लॉजिस्टिक्स की मज़बूती पर टिका है — जो अभी तक सबसे कमज़ोर कड़ी रही है। यदि CBG खरीद दायित्व का पालन सख्ती से हुआ, तो यह निवेशकों का भरोसा जीत सकती है; अन्यथा यह भी महत्वाकांक्षी घोषणाओं की उस लंबी सूची में जुड़ जाएगी जो कागज़ पर बड़ी और ज़मीन पर छोटी साबित हुईं।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोवर्धन योजना क्या है और इसे कब मंजूरी मिली?
गोवर्धन (राष्ट्रीय चक्रीय जैव ऊर्जा योजना) को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 6 अगस्त 2026 को ₹23,731 करोड़ के परिव्यय के साथ मंजूरी दी। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू होगी और देश में संपीड़ित बायोगैस उत्पादन को लगभग दस गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखती है।
गोवर्धन योजना से किसे फायदा होगा?
योजना के प्रमुख लाभार्थियों में किसान, सहकारी समितियाँ, लघु एवं मध्यम उद्यम (SME) और महिला उद्यमी शामिल हैं। कृषि अवशेष, पशु गोबर और नगरपालिका जैविक कचरे को स्वच्छ ईंधन और जैविक खाद में बदलकर ग्रामीण आय और रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे।
CBG खरीद दायित्व क्या है और यह कैसे काम करेगा?
सिटी गैस वितरण संस्थाओं को CNG और PNG क्षेत्रों में अनिवार्य रूप से CBG खरीदना होगा — FY2026-27 में 3%, FY2027-28 में 4% और FY2028-29 से आगे 5%। यह दायित्व उत्पादकों को एक सुनिश्चित और पूर्वानुमानित बाज़ार देगा, जो निजी निवेश को आकर्षित करने की कुंजी है।
गोवर्धन योजना पिछली बायोगैस पहलों से कैसे अलग है?
पिछली योजनाओं (SATAT, MDA, BAM, CFA) ने 200 से अधिक CBG संयंत्रों की नींव रखी, लेकिन राष्ट्रीय पैमाने पर विस्तार सीमित रहा। गोवर्धन पहली बार संपूर्ण मूल्य श्रृंखला — फीडस्टॉक से लेकर ऑफटेक तक — को एक एकीकृत, कानूनी रूप से बाध्यकारी ढाँचे में जोड़ती है।
संपीड़ित बायोगैस (CBG) प्राकृतिक गैस से कैसे अलग है?
CBG रासायनिक रूप से प्राकृतिक गैस के समतुल्य है और मौजूदा गैस पाइपलाइन व वितरण अवसंरचना में बिना बड़े बदलाव के एकीकृत की जा सकती है। यह कृषि अपशिष्ट और जैविक कचरे से बनती है, इसलिए यह नवीकरणीय और पर्यावरण अनुकूल विकल्प है।
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