26 जुलाई 2026
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बायोफ्यूल से ऊर्जा आत्मनिर्भरता: हरदीप पुरी बोले — एथेनॉल मिश्रण से ₹1.90 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा बची

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बायोफ्यूल से ऊर्जा आत्मनिर्भरता: हरदीप पुरी बोले — एथेनॉल मिश्रण से ₹1.90 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा बची

सारांश

भारत की ऊर्जा कहानी में बायोफ्यूल एक निर्णायक अध्याय बन रहा है। एथेनॉल मिश्रण से ₹1.90 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा बचत, किसानों को ₹1.6 लाख करोड़ की आय और नवीकरणीय क्षमता चार गुना बढ़कर 288.58 गीगावाट — ये आँकड़े बताते हैं कि 'आत्मनिर्भर ऊर्जा' अब सिर्फ नारा नहीं रहा।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बायोफ्यूल मिशन , ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और समुद्र मंथन को भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की धुरी बताया।
2014-15 से मई 2026 तक एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से विदेशी मुद्रा में ₹1.90 लाख करोड़ से अधिक की बचत हुई।
किसानों को इसी अवधि में ₹1.6 लाख करोड़ से अधिक की अतिरिक्त आय मिली; 930 लाख मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन घटा।
भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 2014 के 76.38 गीगावाट से बढ़कर 30 जून 2026 तक 288.58 गीगावाट हो गई — लगभग चार गुना वृद्धि।
राज्यमंत्री श्रीपद नाइक ने राज्यसभा में बताया कि गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित कुल विद्युत क्षमता 297.36 गीगावाट पहुँच गई है।
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की खपत का 88.5 प्रतिशत आयात करता है, जो ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 27 जुलाई 2026 को कहा कि बायोफ्यूल मिशन, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और समुद्र मंथन जैसी परिवर्तनकारी पहलें भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भरता के एक नए युग में ले जा रही हैं। उन्होंने बायोफ्यूल को भारत के टिकाऊ ऊर्जा भविष्य की मजबूत नींव बताते हुए कहा कि यह किसानों को सशक्त बनाता है, आयातित ईंधन पर निर्भरता घटाता है और पर्यावरण संरक्षण को नई गति देता है।

एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की उपलब्धियाँ

आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, 2014-15 से मई 2026 तक पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के ज़रिये 310 लाख मीट्रिक टन आयातित कच्चे तेल की जगह एथेनॉल का उपयोग किया गया। इससे देश ने विदेशी मुद्रा में ₹1.90 लाख करोड़ से अधिक की बचत की है।

इसी अवधि में किसानों को ₹1.6 लाख करोड़ से अधिक की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई है और 930 लाख मीट्रिक टन से अधिक कार्बन उत्सर्जन में कमी दर्ज की गई है। गन्ने, मक्का और चावल से उत्पादित घरेलू एथेनॉल ने आयात-निर्भरता कम करने में प्रभावी भूमिका निभाई है।

आयात निर्भरता और ऊर्जा सुरक्षा

आधिकारिक बयान के अनुसार, भारत अपनी कुल खपत का लगभग 88.5 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। यही कारण है कि एथेनॉल मिश्रण सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं में सर्वोच्च स्थान रखता है। विदेशों से खरीदा गया प्रत्येक बैरल कच्चा तेल भारत को अंतरराष्ट्रीय मूल्य उतार-चढ़ाव और आपूर्ति जोखिमों के प्रति संवेदनशील बनाता है।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं। ऐसे में घरेलू एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देना न केवल आर्थिक, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में चार गुना वृद्धि

सरकार द्वारा पिछले सप्ताह संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, 30 जून 2026 तक भारत की स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 2014 के 76.38 गीगावाट से लगभग चार गुना बढ़कर 288.58 गीगावाट हो गई है।

इस क्षमता में सौर ऊर्जा का सबसे बड़ा योगदान है — 162.15 गीगावाट। इसके बाद पवन ऊर्जा 57.44 गीगावाट, जलविद्युत 57.24 गीगावाट और बायो पावर 11.75 गीगावाट पर है।

गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता: संसद में जवाब

नई और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद येस्सो नाइक ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि 30 जून 2026 तक देश में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित कुल 297.36 गीगावाट विद्युत क्षमता स्थापित हो चुकी है। इसमें 288.58 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा और 8.78 गीगावाट परमाणु ऊर्जा शामिल है।

आगे की राह

मंत्री पुरी ने कहा कि अगले पाँच वर्षों में घरेलू ऊर्जा उत्पादन के विस्तार, नई प्रौद्योगिकियों के समावेशन और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प के बल पर भारत वैश्विक ऊर्जा महाशक्ति के रूप में और अधिक सुदृढ़ होकर उभरेगा। गौरतलब है कि यह घोषणाएँ ऐसे समय में आई हैं जब भारत 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन के अपने अंतरराष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में काम कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह गति 2070 के नेट-ज़ीरो लक्ष्य के लिए पर्याप्त है। भारत अभी भी अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का 88.5 प्रतिशत आयात करता है — यानी एथेनॉल ने निर्भरता को छुआ है, तोड़ा नहीं। नवीकरणीय क्षमता में चार गुना वृद्धि उत्साहजनक है, परंतु ट्रांसमिशन इन्फ्रास्ट्रक्चर और ग्रिड स्थिरता की चुनौतियाँ अभी भी अनसुलझी हैं। बायोफ्यूल की किसान-आय कहानी राजनीतिक रूप से आकर्षक है, लेकिन खाद्य-ईंधन प्रतिस्पर्धा — खासकर मक्का और चावल के मामले में — एक दीर्घकालिक जोखिम है जिस पर नीति-निर्माता अभी भी चुप्पी साधे हैं।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का बायोफ्यूल मिशन क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
भारत का बायोफ्यूल मिशन पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण के ज़रिये आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने की सरकारी योजना है। इसका लक्ष्य ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाना, किसानों की आय सुधारना और कार्बन उत्सर्जन घटाना है।
एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से अब तक कितनी विदेशी मुद्रा बची है?
आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, 2014-15 से मई 2026 तक एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से भारत ने विदेशी मुद्रा में ₹1.90 लाख करोड़ से अधिक की बचत की है। इसी दौरान 310 लाख मीट्रिक टन आयातित कच्चे तेल की जगह घरेलू एथेनॉल का उपयोग किया गया।
भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता अभी कितनी है?
30 जून 2026 तक भारत की स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 288.58 गीगावाट हो गई है, जो 2014 में 76.38 गीगावाट थी — यानी लगभग चार गुना वृद्धि। इसमें सौर ऊर्जा 162.15 गीगावाट, पवन ऊर्जा 57.44 गीगावाट और जलविद्युत 57.24 गीगावाट शामिल है।
किसानों को एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से कितना फायदा हुआ है?
आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, 2014-15 से मई 2026 तक किसानों को एथेनॉल आपूर्ति के ज़रिये ₹1.6 लाख करोड़ से अधिक की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई है। गन्ना, मक्का और चावल से उत्पादित एथेनॉल इस कार्यक्रम की मुख्य फसलें हैं।
भारत में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित कुल बिजली क्षमता कितनी है?
राज्यमंत्री श्रीपद येस्सो नाइक ने राज्यसभा में बताया कि 30 जून 2026 तक गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित कुल विद्युत क्षमता 297.36 गीगावाट हो गई है। इसमें 288.58 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा और 8.78 गीगावाट परमाणु ऊर्जा शामिल है।
राष्ट्र प्रेस
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