राम मंदिर को दान की 200 किलो चांदी पर श्रीराम ट्रस्ट का जवाब, रिकॉर्ड और तस्वीरें जारी
सारांश
मुख्य बातें
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 9 जुलाई 2025 को अयोध्या के राम मंदिर को 26 जनवरी 2021 को दान में मिली 200 किलो चांदी को लेकर उठे सवालों पर आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है। ट्रस्ट ने दस्तावेज़, तस्वीरें और विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करते हुए कहा है कि पूरी चांदी का रिकॉर्ड सुरक्षित है और उसे नियमानुसार संरक्षित रखा गया है।
विवाद की पृष्ठभूमि
विश्व सिंधी सेवा संगम ने कुछ दिन पूर्व ट्रस्ट को एक पत्र भेजकर यह जानकारी माँगी थी कि 26 जनवरी 2021 को दान की गई 200 चांदी की ईंटों का क्या हुआ। संगठन का कहना था कि दानदाताओं को अब तक न तो आधिकारिक रसीद प्रदान की गई और न ही यह बताया गया कि मंदिर निर्माण या अन्य कार्यों में इस चांदी का उपयोग कहाँ किया गया। इसी आधार पर संगठन ने पूरे मामले में पारदर्शिता की माँग की थी।
ट्रस्ट का आधिकारिक स्पष्टीकरण
ट्रस्ट ने अपने जवाब में बताया कि दान में प्राप्त सभी 200 चांदी की ईंटों का विवरण ट्रस्ट के मूल्यवान धातु रजिस्टर में दर्ज है। ट्रस्ट के अनुसार, एक निर्णय के तहत इन ईंटों के साथ अन्य उपलब्ध चांदी को पिघलाकर 99.99 प्रतिशत शुद्धता वाली 20-20 किलोग्राम की सिल्वर बार तैयार कराई गईं। ट्रस्ट का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार पूरी की गई।
गौरतलब है कि राम मंदिर को देशभर से बड़ी मात्रा में दान प्राप्त हुए हैं और इस तरह के सवाल पहले भी उठते रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब मंदिर प्रबंधन की पारदर्शिता को लेकर विभिन्न संगठन सक्रिय हो रहे हैं।
तस्वीरें और साक्ष्य
अपने दावे के समर्थन में ट्रस्ट ने कुछ तस्वीरें भी साझा की हैं। इन तस्वीरों में चांदी का वजन, उसे पिघलाने की प्रक्रिया और तैयार की गई सिल्वर बार दिखाई गई हैं। ट्रस्ट ने बताया कि फिलहाल ये सिल्वर बार भारतीय स्टेट बैंक की अयोध्या शाखा के लॉकर में सुरक्षित रखी गई हैं।
दानदाताओं को रसीद का आश्वासन
ट्रस्ट ने विश्व सिंधी सेवा संगम से अनुरोध किया है कि वह सभी 200 दानदाताओं के नाम, पते, मोबाइल नंबर, पैन और ईमेल की जानकारी उपलब्ध कराए। ट्रस्ट का कहना है कि यह जानकारी प्राप्त होते ही प्रत्येक दानदाता के नाम से अलग-अलग आधिकारिक रसीद जारी की जाएगी।
आगे क्या होगा
ट्रस्ट के अनुसार, भारतीय स्टेट बैंक के लॉकर में रखी इन सिल्वर बार का उपयोग भविष्य में मंदिर से जुड़ी आवश्यकताओं और निर्माण कार्यों में किया जाएगा। इस मामले में ट्रस्ट के आधिकारिक स्पष्टीकरण के बाद अब दानदाताओं की रसीद और आगे की प्रक्रिया पर नज़रें टिकी हैं।