राम मंदिर ट्रस्ट को कानूनी नोटिस: राजद सांसद सुधाकर सिंह ने माँगा ₹ चंदे-खर्च का पाँच साल का हिसाब
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के बक्सर सांसद सुधाकर सिंह के अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत ने 19 जून 2025 को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तीन प्रमुख ट्रस्टियों — अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास जी महाराज, महासचिव चंपत राय और कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज — को एक औपचारिक कानूनी नोटिस भेजा। नोटिस में माँग की गई है कि ट्रस्ट वित्त वर्ष 2021–22 से 2025–26 के बीच जमा हुए चंदे और किए गए खर्च का सम्पूर्ण मद-वार ब्योरा नोटिस मिलने के तीन दिनों के भीतर सार्वजनिक करे।
नोटिस में क्या माँगा गया है
अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के अनुसार, नोटिस में जिन दस्तावेज़ों की माँग की गई है उनमें ऑडिट की गई बैलेंस शीट, आय-व्यय का विवरण, ऑडिटर की रिपोर्ट, ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई भूमि का ब्योरा, बैंक खाते का विवरण और एफसीआरए (FCRA) के तहत प्राप्त विदेशी चंदे की जानकारी शामिल है। यह माँग उस पृष्ठभूमि में आई है जब जमीन खरीद, ऑडिट न होने और खर्च में पारदर्शिता की कमी को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
नोटिस में भारतीय ट्रस्ट अधिनियम, 1882; आयकर अधिनियम, 1961; उत्तर प्रदेश पब्लिक ट्रस्ट्स अधिनियम और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 का हवाला दिया गया है। ये कानून सार्वजनिक धार्मिक ट्रस्ट के ट्रस्टियों पर उचित लेखांकन और सूचना-प्रकटीकरण की कानूनी जिम्मेदारी डालते हैं।
अधिवक्ता और सांसद का पक्ष
सर्वोच्च न्यायालय में अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत ने कहा, 'यह नोटिस पूरी तरह से जनहित में जारी किया गया है, न कि किसी राजनीतिक, पक्षपाती या व्यक्तिगत मकसद से।' उन्होंने आगे कहा, 'ट्रस्ट के पास भारत और विदेशों में लाखों भक्तों की ओर से दिए गए सार्वजनिक चंदे की जिम्मेदारी है। जहाँ जनता का पैसा शामिल हो, वहाँ पारदर्शिता और जवाबदेही कोई एहसान नहीं, बल्कि हर दानदाता और आम जनता के प्रति एक दायित्व है।'
सांसद सुधाकर सिंह ने कहा, 'मेरी चिंता बस यह सुनिश्चित करने की है कि भक्तों की ओर से नेक नीयत से दिए गए फंड का हिसाब-किताब पारदर्शी तरीके से हो।' उन्होंने जोड़ा, 'आयकर अधिनियम की धारा 80जी के तहत पंजीकृत और जनता के धन की जिम्मेदारी संभालने वाले ट्रस्ट का यह फर्ज है कि वह जनता को स्पष्ट और सत्यापित हिसाब-किताब दे।' उन्होंने उम्मीद जताई कि ट्रस्टी इसे टकराव का मामला मानने के बजाय आवश्यक पारदर्शिता के साथ जवाब देंगे।
न्यायिक आधार: मद्रास हाई कोर्ट का हवाला
नोटिस में मद्रास उच्च न्यायालय के हालिया फैसले — आर. थिरुमुरुगन बनाम आर. थेन्नारासु और अन्य (21 नवंबर 2025) — का उल्लेख किया गया है। उस फैसले में न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि किसी सार्वजनिक धार्मिक संस्था को दिया गया दान ट्रस्टियों की निजी संपत्ति नहीं होता, बल्कि यह समुदाय के लाभ के लिए होता है, और समुदाय को ऑडिट तथा पारदर्शिता की माँग करने का पूरा अधिकार है। यह न्यायिक संदर्भ नोटिस को महज राजनीतिक दबाव से अलग करता है।
आगे क्या हो सकता है
नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो मामले को उचित कानूनी मंचों के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर निर्माण और ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन को लेकर विभिन्न हलकों में पारदर्शिता की माँग पहले से उठती रही है। अब ट्रस्ट की प्रतिक्रिया — या उसका अभाव — इस विवाद की अगली दिशा तय करेगी।