महिला सुरक्षा पर जीरो टॉलरेंस: निशीथ प्रमाणिक बोले — अन्याय करने वाले को सजा मिलेगी
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री निशीथ प्रमाणिक ने 16 मई 2025 को सिलीगुड़ी में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने हिंसा और महिलाओं के विरुद्ध अपराध के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी मामले में अन्याय करने वाले को कड़ी सजा मिले।
महिला सुरक्षा और पुलिस को खुली छूट
प्रमाणिक ने कहा कि चाहे महिलाओं की गरिमा का प्रश्न हो या सामान्य हिंसा का — सरकार ने किसी भी समझौते से इनकार किया है। उन्होंने बताया कि पुलिस को पूरी छूट दी गई है कि जहाँ भी गुंडागर्दी या हिंसा की कोशिश हो, वह तत्काल कार्रवाई करे। उनके अनुसार, कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस किसी भी दबाव में नहीं आएगी।
तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला
तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर निशाना साधते हुए प्रमाणिक ने कहा कि 'TMC अब इतिहास बन चुकी है।' उन्होंने दावा किया कि जनता ने TMC को पूरी तरह नकार दिया है और अब सरकार का एकमात्र एजेंडा विकास है। उन्होंने कहा, 'अब ध्यान सिर्फ विकास पर होना चाहिए, और हम विकास पर ही ध्यान देंगे।'
अभिषेक बनर्जी के खिलाफ एफआईआर पर भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया
TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के विरुद्ध दर्ज एफआईआर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद राजू बिस्टा ने कहा कि TMC सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की वजह से अभिषेक बनर्जी अब तक कानून से बचे हुए थे। उन्होंने कहा, 'हम बदले की भावना से काम नहीं करेंगे, लेकिन जिसने जनता का पैसा खाया है और भ्रष्टाचार किया है, उसके खिलाफ कानून अपना काम करेगा।' BJP सांसद जगन्नाथ सरकार ने भी कहा कि यह एफआईआर पहले ही दर्ज हो जानी चाहिए थी, और इस तरह की 'धमकी भरी भाषा' किसी के लिए भी उचित नहीं है।
TMC सदस्यों के BJP में शामिल होने पर रोक
मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने स्पष्ट किया कि 4 मई से कुछ TMC सदस्यों को BJP का झंडा थामे और मिठाइयाँ बाँटते देखा गया है। हालाँकि, राज्य BJP अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के निर्देश के अनुसार, अगले कम से कम एक महीने तक TMC सदस्यों को BJP में शामिल नहीं किया जाएगा। यह निर्णय पार्टी की आंतरिक अनुशासन प्रक्रिया के तहत लिया गया है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद कानून-व्यवस्था और राजनीतिक पुनर्गठन दोनों मोर्चों पर सरकार की परीक्षा हो रही है। गौरतलब है कि महिला सुरक्षा का मुद्दा राज्य में पिछले कई वर्षों से संवेदनशील बना हुआ है। नई सरकार के शुरुआती कदम यह संकेत देते हैं कि वह इस मुद्दे को प्राथमिकता देने का इरादा रखती है।