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ममता दीदी ने सभी धर्म-वर्ग के लोगों के लिए काम किया: सायंतिका बनर्जी का बड़ा बयान

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ममता दीदी ने सभी धर्म-वर्ग के लोगों के लिए काम किया: सायंतिका बनर्जी का बड़ा बयान

सारांश

बरानगर से टीएमसी उम्मीदवार सायंतिका बनर्जी ने दूसरे चरण की वोटिंग से पहले कहा — ममता दीदी ने हिंदू, मुस्लिम, सिख सभी के लिए बिना भेदभाव काम किया। एसआईआर मामले में सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई का जिक्र किया। टीएमसी सांसदों ने भाजपा के 50 से नीचे जाने का दावा किया।

मुख्य बातें

सायंतिका बनर्जी ने कहा कि ममता बनर्जी ने हिंदू, मुस्लिम, सिख सभी के साथ बिना भेदभाव काम किया।
एसआईआर मामले में ममता बनर्जी अकेले सुप्रीम कोर्ट तक लड़ने गईं, कोई अन्य दल साथ नहीं था।
राजद नेता तेजस्वी यादव ने बरानगर में टीएमसी के लिए प्रचार किया; सायंतिका ने आभार जताया।
टीएमसी सांसद सायोनी घोष का दावा — इस बार भाजपा 50 सीटों से नीचे रहेगी।
2021 में भाजपा ने 200 पार का नारा दिया था लेकिन केवल 77 सीटें जीती थीं।
टीएमसी ने प्रवासी मतदाताओं को वोट-बैंक नहीं बल्कि वैध नागरिक बताया।

कोलकाता, 25 अप्रैल 2025पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण की मतदान प्रक्रिया से ठीक पहले बरानगर विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की उम्मीदवार सायंतिका बनर्जी ने राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल का जोरदार बचाव किया। उन्होंने कहा कि दीदी ने धर्म, जाति या राजनीतिक विचारधारा का भेद किए बिना हर वर्ग के लिए काम किया है।

सायंतिका बनर्जी का मुख्य बयान — भेदभाव नहीं, सिर्फ काम

सायंतिका बनर्जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ममता दीदी ने कभी यह नहीं देखा कि कोई व्यक्ति भाजपा, टीएमसी या सीपीआई (एम) का समर्थक है। उन्होंने यह भी नहीं देखा कि कोई मुस्लिम है, हिंदू है या सिख है। उनका काम सबके लिए एक समान रहा है।

उन्होंने कहा, "सिर्फ एक ही व्यक्ति ने सचमुच काम किया है और वह हैं ममता दीदी।" उनका मानना है कि जनता काम के आधार पर मतदान करेगी और इस बार भी टीएमसी को भारी समर्थन मिलेगा।

एसआईआर विवाद और सुप्रीम कोर्ट का संदर्भ

सायंतिका बनर्जी ने एसआईआर (Special Intensive Revision) मामले का जिक्र करते हुए कहा कि जब मतदाता सूची से नाम हटाने का संकट आया, तब ममता बनर्जी अकेली सुप्रीम कोर्ट तक लड़ने गईं। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता जानती है कि कौन नाटक कर रहा है और कौन जरूरत के वक्त साथ खड़ा रहा।

उन्होंने यह भी कहा कि "बंगाली भाषा बोलने वाले घुसपैठिये नहीं हो सकते।" यह बयान भाजपा के उस दावे के जवाब में आया जिसमें बांग्लादेशी घुसपैठियों को मतदाता सूची में शामिल होने का आरोप लगाया गया था। जिनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है, वे वैध मतदाता हैं — यह उनका स्पष्ट रुख रहा।

तेजस्वी यादव के समर्थन पर आभार, बिहारी मतदाताओं पर संदेश

राजद नेता तेजस्वी यादव द्वारा बरानगर में प्रचार करने पर सायंतिका बनर्जी ने आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव एक मजबूत राजनीतिक हस्ती हैं और उनके पिता लालू प्रसाद यादव भी देश के जाने-माने नेता हैं।

उन्होंने बिहार से आए प्रवासी मजदूरों के संदर्भ में कहा कि "अगर किसी के पास वैध वोटर आईडी है और वह रोजी-रोटी के लिए यहां काम कर रहा है तो इसमें कोई दिक्कत नहीं।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि टीएमसी किसी को वोट-बैंक की नजर से नहीं देखती।

टीएमसी नेताओं का दावा — दीदी की सुनामी, भाजपा 50 से नीचे

टीएमसी सांसद जून मालिया ने कहा कि बंगाल की जनता जानती है कि भाजपा को कैसे सबक सिखाना है। उन्होंने पहले चरण के मतदान के रुझानों का हवाला देते हुए कहा, "खेला होबे।"

टीएमसी सांसद सायोनी घोष ने कहा कि "दीदी की सुनामी" पहले चरण में ही आ चुकी है और दूसरे चरण में भी यही परिणाम देखने को मिलेगा। उन्होंने याद दिलाया कि 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 200 पार का नारा दिया था लेकिन वह 70 सीटों पर सिमट गई थी। इस बार उनका दावा है कि भाजपा 50 सीट से नीचे जाएगी।

राजनीतिक संदर्भ — बंगाल में दांव पर क्या है?

पश्चिम बंगाल में 294 विधानसभा सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। 2021 में टीएमसी ने 213 सीटें जीती थीं जबकि भाजपा को 77 सीटें मिली थीं। इस बार भाजपा ने घुसपैठ, कानून-व्यवस्था और हिंदू एकता को मुद्दा बनाया है, जबकि टीएमसी लक्ष्मीर भंडार, स्वास्थ्य साथी और कन्याश्री जैसी कल्याण योजनाओं के दम पर मैदान में है।

गौरतलब है कि बरानगर जैसे शहरी क्षेत्र में प्रवासी मजदूरों की बड़ी आबादी है, जो इस सीट के चुनावी समीकरण को सीधे प्रभावित करती है। तेजस्वी यादव का प्रचार करने आना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

आने वाले दिनों में मतगणना के नतीजे तय करेंगे कि ममता बनर्जी का "सबके लिए काम" का नैरेटिव जनता में कितना उतरा है और क्या टीएमसी लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी कर पाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि टीएमसी की उस रणनीति का हिस्सा है जो भाजपा के 'घुसपैठ और हिंदुत्व' नैरेटिव को सीधे काटती है। दिलचस्प यह है कि तेजस्वी यादव जैसे बिहारी नेता को बंगाल में उतारना दर्शाता है कि टीएमसी प्रवासी मतदाताओं को एक संगठित वोट-बैंक के रूप में देख रही है — भले ही वह खुद इस शब्द से परहेज करे। एसआईआर मामले का जिक्र करना भी सोची-समझी चाल है, क्योंकि मतदाता सूची से नाम हटाने का डर अल्पसंख्यक और प्रवासी वोटरों में गहरा है। सवाल यह है कि क्या 'काम के आधार पर वोट' का यह नैरेटिव उन शहरी मध्यवर्गीय मतदाताओं तक पहुंच पाएगा जो कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर बदलाव चाहते हैं?
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सायंतिका बनर्जी ने ममता दीदी के बारे में क्या कहा?
सायंतिका बनर्जी ने कहा कि ममता बनर्जी ने हिंदू, मुस्लिम, सिख या किसी भी राजनीतिक दल के समर्थक के साथ भेदभाव नहीं किया और सभी के लिए समान रूप से काम किया। उन्होंने कहा कि जनता काम के आधार पर वोट देगी।
एसआईआर मामले में ममता बनर्जी ने क्या किया?
एसआईआर (Special Intensive Revision) मामले में जब मतदाता सूची से नाम हटाने का विवाद उठा, तब ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट तक लड़ने गईं। सायंतिका बनर्जी के अनुसार उस वक्त कोई अन्य दल उनके साथ नहीं खड़ा था।
तेजस्वी यादव बरानगर में प्रचार करने क्यों आए?
राजद नेता तेजस्वी यादव ने बरानगर में टीएमसी के समर्थन में प्रचार किया। इसका कारण यह माना जा रहा है कि इस क्षेत्र में बिहार से आए बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर रहते हैं जो वैध मतदाता हैं।
टीएमसी का दावा है कि भाजपा को इस बार कितनी सीटें मिलेंगी?
टीएमसी सांसद सायोनी घोष ने दावा किया कि इस बार भाजपा 50 सीटों से नीचे रहेगी। उन्होंने 2021 का उदाहरण दिया जब भाजपा ने 200 पार का नारा दिया था लेकिन केवल 77 सीटें जीत पाई थी।
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में दूसरे चरण की वोटिंग कब है?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण की वोटिंग 25 अप्रैल 2025 के आसपास निर्धारित है। बरानगर सहित कई विधानसभा क्षेत्र इस चरण में शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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