सबा आजाद ने 'अल्फा मेल' को बताया पितृसत्ता का शब्द, बोलीं- 'हूज योर गाइनेक?' सीजन 2 में लौट रही हूँ

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सबा आजाद ने 'अल्फा मेल' को बताया पितृसत्ता का शब्द, बोलीं- 'हूज योर गाइनेक?' सीजन 2 में लौट रही हूँ

सारांश

सबा आजाद ने 'अल्फा मेल' को पितृसत्ता का औज़ार बताकर खारिज किया और महिलाओं के दोहरे मानदंड पर बेबाक राय रखी। साथ ही 'हूज योर गाइनेक?' सीजन 2 में डॉ. विधुशी कोठारी के रूप में वापसी की पुष्टि की।

मुख्य बातें

अभिनेत्री सबा आजाद ने 'अल्फा मेल' की अवधारणा को पितृसत्तात्मक विचारधारा की उपज बताते हुए इससे असहमति जताई।
उनका कहना है कि कमज़ोरी को 'कम मर्दाना' मानने की सोच पुरानी और गलत है।
सबा ने बताया कि भारत के कई हिस्सों में महिलाओं को आज भी स्वतंत्र रूप से काम करने या फैसले लेने का अधिकार नहीं मिलता।
वे जल्द ही वेब सीरीज़ 'हूज योर गाइनेक?' के दूसरे सीजन में डॉ.
विधुशी कोठारी के किरदार में वापसी करेंगी।
उन्होंने कहा कि शो की सफलता के बाद लेखकों और अभिनेताओं की जिम्मेदारी बराबर होती है — कहानी में निरंतरता बनाए रखना ज़रूरी है।

अभिनेत्री सबा आजाद ने 'अल्फा मेल' की अवधारणा को सिरे से खारिज करते हुए इसे पितृसत्तात्मक विचारधारा की उपज करार दिया है। उनका कहना है कि यह शब्द जानबूझकर पुरानी पितृसत्तात्मक सोच को जीवित रखने के लिए गढ़ा गया है, और वे इससे बिल्कुल सहमत नहीं हैं। यह बयान उन्होंने अपनी आगामी वेब सीरीज़ 'हूज योर गाइनेक?' के दूसरे सीजन की प्रचार गतिविधियों के दौरान दिया।

अल्फा मेल पर सबा का सीधा रुख

सबा आजाद ने एक विशेष बातचीत में साफ शब्दों में कहा, 'सच कहूं तो मुझे 'अल्फा मेल' का कॉन्सेप्ट समझ नहीं आता। मुझे लगता है कि यह पितृसत्ता द्वारा बनाया गया एक शब्द है ताकि पितृसत्तात्मक विचार जिंदा रहें। मैं इसे बिल्कुल भी नहीं मानती।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनके परिवार और मित्र मंडली में कई उत्कृष्ट पुरुष हैं, फिर भी 'अल्फा' शब्द का वास्तविक अर्थ उनकी समझ से परे है।

कमज़ोरी और मर्दानगी की पुरानी परिभाषा पर सवाल

सबा ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कमज़ोरी को 'कम मर्दाना' मानने की सोच न केवल पुरानी है, बल्कि बुनियादी तौर पर गलत भी है। उनके अनुसार इस तरह की सोच समाज में लैंगिक असमानता को और गहरा करती है।

महिलाओं की स्थिति पर गहरी चिंता

अभिनेत्री ने देश में महिलाओं की वास्तविक स्थिति पर भी अपने विचार साझा किए। उनका कहना है कि भारत के कई हिस्सों में महिलाओं को आज भी स्वतंत्र रूप से काम करने या अपने फैसले खुद लेने का अधिकार नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि शहरी परिवेश में रहने वाले लोगों को यह सच्चाई कम दिखती है, लेकिन यह वास्तविकता आज भी मौजूद है। 'अगर महिलाएं काम करती हैं तो उन पर सवाल उठते हैं, और अगर नहीं करतीं तो उन्हें जज किया जाता है' — यह दोहरा मानदंड उनकी चिंता का केंद्र है।

'हूज योर गाइनेक?' सीजन 2 में वापसी

सबा आजाद जल्द ही वेब सीरीज़ 'हूज योर गाइनेक?' के दूसरे सीजन में डॉ. विधुशी कोठारी के किरदार में दर्शकों के सामने लौटेंगी। उन्होंने बताया कि किसी शो के सफल होने पर सभी की जिम्मेदारी बराबर रहती है — एक्टर्स, लेखक और निर्देशक सभी मिलकर एक बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा होते हैं।

लेखकों और अभिनेताओं की साझा जिम्मेदारी

सबा ने लेखकों की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया। उनके अनुसार, शो के सफल होने पर दर्शकों की अपेक्षाएं बढ़ जाती हैं, और ऐसे में कहानी में निरंतरता बनाए रखना अनिवार्य हो जाता है। उन्होंने कहा कि अभिनेताओं को अपने किरदार में वही ईमानदारी, खूबियाँ और कमियाँ दिखानी चाहिए जिन्हें दर्शकों ने पहले सीजन में पसंद किया था। यह सीजन 2 उनके लिए उस भरोसे को बरकरार रखने की परीक्षा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि उनकी पहुँच करोड़ों दर्शकों तक होती है। हालाँकि, असली सवाल यह है कि क्या यह बयानबाज़ी उन कहानियों में भी दिखती है जो परदे पर पेश की जाती हैं — या यह केवल प्रचार के दौरान की बौद्धिक मुद्रा है। 'हूज योर गाइनेक?' जैसे शो महिला स्वास्थ्य और स्वायत्तता पर बात करते हैं, इसलिए सबा का यह रुख उनके किरदार के साथ सुसंगत भी लगता है।
RashtraPress
17 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सबा आजाद ने 'अल्फा मेल' की अवधारणा पर क्या कहा?
सबा आजाद ने कहा कि 'अल्फा मेल' का कॉन्सेप्ट उन्हें समझ नहीं आता और यह पितृसत्ता द्वारा गढ़ा गया शब्द है ताकि पितृसत्तात्मक विचार जिंदा रहें। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस अवधारणा से बिल्कुल सहमत नहीं हैं।
'हूज योर गाइनेक?' सीजन 2 में सबा आजाद कौन सा किरदार निभाएंगी?
सबा आजाद वेब सीरीज़ 'हूज योर गाइनेक?' के दूसरे सीजन में डॉ. विधुशी कोठारी के किरदार में वापसी करेंगी। यह वही भूमिका है जिसे दर्शकों ने पहले सीजन में खूब पसंद किया था।
सबा आजाद ने महिलाओं की स्थिति पर क्या कहा?
सबा का कहना है कि भारत के कई हिस्सों में महिलाओं को आज भी स्वतंत्र रूप से काम करने या अपने फैसले खुद लेने का अधिकार नहीं मिलता। उन्होंने बताया कि काम करने पर सवाल और न करने पर भी आलोचना — यह दोहरा मानदंड आज भी मौजूद है।
सबा आजाद के अनुसार किसी सफल शो में अभिनेताओं की जिम्मेदारी क्या होती है?
सबा का मानना है कि शो की सफलता के बाद सभी की जिम्मेदारी बराबर होती है। अभिनेताओं को अपने किरदार में वही ईमानदारी और खूबियाँ बनाए रखनी चाहिए जो दर्शकों ने पहले सीजन में पसंद की थीं, और लेखकों को कहानी में निरंतरता सुनिश्चित करनी होती है।
राष्ट्र प्रेस
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