एसआईआर विवाद: चुनाव आयोग के प्रेस नोट पर कांग्रेस का पलटवार, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने 26 सितंबर 2026 को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर चुनाव आयोग के उसी दिन जारी प्रेस नोट को 'रक्षात्मक और अधूरा' करार देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे या उन पर अभियोजन की मांग की। एक अखबार के खुलासे और देशभर में विरोध-प्रदर्शनों के बीच आए इस बयान ने मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया पर राजनीतिक संग्राम को नई धार दे दी है।
प्रेस नोट पर कांग्रेस की आपत्तियाँ
जयराम रमेश ने कहा कि आयोग का प्रेस नोट 'न तो खबर का सीधे तौर पर खंडन करता है और न ही उसके निष्कर्षों को निराधार बताता है।' उनके अनुसार प्रेस नोट के पैरा 3(i) और 3(ii) में मामले को हल्का करने की महज रक्षात्मक कोशिश की गई है।
कांग्रेस के अनुसार, गोवा में पकड़े जाने के बाद आयोग ने स्वीकार किया कि हटाए गए 97 में से 81 मतदाताओं के लिए फॉर्म-6 भरकर उन्हें वापस जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई है। पार्टी ने तीखे शब्दों में कहा, 'दूसरे शब्दों में आप एक टूटी और भ्रष्ट व्यवस्था से मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करते हैं और पकड़े जाने पर कहते हैं कि उन्हें वापस जोड़ा जा रहा है।'
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला — कांग्रेस का तर्क
जयराम रमेश ने कहा कि चुनाव आयोग अपने कदमों को 27 मई 2026 के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की आड़ देकर उचित ठहरा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि यह आदेश 'हालिया खुलासों से बहुत पहले का है' और यह सीईसी को मतदाताओं के नाम दुर्भावनापूर्ण तरीके से हटाने, अक्षमता के कारण नागरिकों को वोटर लिस्ट से बाहर करने और पूरे परिवारों को हुई परेशानी, खर्च व समय की बर्बादी से नहीं बचा सकता।
राज्यवार असमानता का सवाल
कांग्रेस ने पूछा कि आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र में दावा-आपत्ति की समय-सीमा बढ़ाई, लेकिन कर्नाटक, तेलंगाना, बिहार और पश्चिम बंगाल के उन मतदाताओं का क्या होगा जिनके नाम कथित तौर पर एक व्यक्ति के भ्रष्टाचार के चलते हटाए गए? पार्टी ने इन राज्यों के मतदाताओं के लिए भी समान राहत की माँग की।
इसके अलावा, कांग्रेस ने आरोप लगाया कि जुलाई 2026 के मध्य से फॉर्म-6 में 'पूरी तरह अवैध बदलाव' किए गए — जो संसद की जानकारी और अनुमति के बिना थे — जिसने युवा मतदाताओं पर माता-पिता व दादा-दादी का विवरण खोजने का 'अनुचित बोझ' डाला।
जेन जी वोटर्स और केंद्रीकरण पर चिंता
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रेस नोट 'जेन जी वोटर्स' को जानबूझकर निशाना बनाने के सवालों का जवाब नहीं देता। पार्टी का कहना है कि ईसीआईनेट पोर्टल की समीक्षा के लिए विशेषज्ञों को शामिल करने का प्रस्ताव 'निरर्थक सुरक्षा उपाय' है, क्योंकि असली चिंता तकनीकी कमज़ोरी की नहीं, बल्कि उस केंद्रीकरण की है जो जमीनी स्तर पर मतदाताओं को जोड़ने से रोकता है। कांग्रेस के अनुसार, यह कदम दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों की चिंताओं की पुष्टि करता है।
कांग्रेस की माँगें और आगे की राह
जयराम रमेश ने पाँच बिंदुओं पर जवाब माँगा — सीईसी द्वारा एकतरफा फैसले, विपक्ष के प्रति कथित पक्षपात, 'वोट चोरी' में भागीदारी के आरोप, युवा मतदाताओं के नामांकन में बाधा डालना और लापरवाही से उजागर हुए भ्रष्टाचार। कांग्रेस ने मांग की कि एसआईआर प्रक्रिया को 'तुरंत निलंबित' किया जाए।
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब देशभर में मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर विपक्षी दलों का आंदोलन तेज़ हो रहा है। गौरतलब है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर विवाद नई बात नहीं है — पिछले चुनाव चक्रों में भी नामों के गलत तरीके से हटाए जाने की शिकायतें उठी हैं, लेकिन इस बार खुलासे और संस्थागत प्रतिक्रिया दोनों ने मामले को राष्ट्रीय बहस का केंद्र बना दिया है। आने वाले दिनों में सर्वोच्च न्यायालय और संसदीय मंचों पर इस मुद्दे पर और दबाव देखने को मिल सकता है।