क्या बिहार में महानाटक में माता अहिल्याबाई होल्कर का चरित्र जीवंत हुआ?

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क्या बिहार में महानाटक में माता अहिल्याबाई होल्कर का चरित्र जीवंत हुआ?

सारांश

बिहार में मातृ अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती पर एक भव्य महानाटक का आयोजन हुआ। उपमुख्यमंत्री विजय सिंन्हा ने माता का नमन किया और उनकी प्रेरणाओं पर प्रकाश डाला। यह नाटक युवा पीढ़ी को हमारी संस्कृति से जोड़ने का एक प्रयास है। जानिए इस महाकाव्य में क्या खास बात थी।

Key Takeaways

  • महानाटक ने माता अहिल्याबाई होल्कर के जीवन को जीवंत किया।
  • उपमुख्यमंत्री ने उन्हें नमन कर संस्कृति के प्रति सम्मान प्रकट किया।
  • नाटक ने नई पीढ़ी को प्रेरणा देने का कार्य किया।
  • महानाटक एक सशक्त माध्यम है संदेश पहुंचाने के लिए।
  • माता अहिल्या की कहानी आज भी प्रेरणादायक है।

पटना, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। माता अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती के अवसर पर प्रेमचंद रंगशाला, बिहार संगीत नाटक अकादमी द्वारा ‘कर्मयोगिनी माता अहिल्या’ शीर्षक से एक महानाटक का प्रस्तुतीकरण हुआ। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय सिंन्हा ने माता अहिल्या के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उन्हें नमन किया और दीप प्रज्वलित किया।

बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिंन्हा ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि माता अहिल्याबाई हमारी सनातन संस्कृति की प्रेरणा का स्रोत और शक्ति हैं, जो नई पीढ़ी को आज भी प्रेरित करती हैं। हम उन्हें नमन करते हैं। उनके महानाटक युवा पीढ़ी को प्रेरणा प्रदान करते हैं और 21वीं सदी का भारत बनाने में सहायक होते हैं।

उन्हें यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी माता अहिल्याबाई के कई प्रेरणादायक कार्यों को अपने राजनीतिक जीवन में उतारा है। हम इनको नमन करते हैं।

इस कार्यक्रम में सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र (सीसीआरटी) के अध्यक्ष डॉ. विनोद नारायण इंदुरकर ने कहा कि सीसीआरटी ने यह सुनिश्चित किया था कि हमारे महापुरुषों की कहानी देश और बच्चों तक पहुंचे। नाटक जैसे संवाद, ड्रामा और संगीत का माध्यम लोगों तक संदेश पहुंचाने का एक सशक्त तरीका है।

उन्होंने कहा कि यह 300 साल पुरानी कहानी है। उस समय की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों का सामना कैसे किया गया, यह सब नाटक में प्रदर्शित किया गया है।

माता अहिल्याबाई ने राजनीति के साथ-साथ धार्मिक कार्यों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कई भव्य मंदिरों का निर्माण कराया, इसलिए उन्हें कर्मयोगिनी कहा जाता है।

महानाटक में छोटी अहिल्याबाई का किरदार निभाने वाली जानवी सिंह ने बताया कि इस भूमिका को निभाना उनके लिए गर्व की बात है। हमने इस नाटक का मंचन देश के पांच विभिन्न शहरों में किया है। छोटी अहिल्या को नटखट और चुलबुली दिखाया गया है, जबकि बड़ी अहिल्या को शांत और गंभीर।

जानवी ने कहा कि इस किरदार से उन्हें यह समझ में आया कि कैसे उन्होंने कम उम्र में बड़ी जिम्मेदारियों को निभाया।

बड़ी अहिल्याबाई का किरदार निभाने वाली शारा शर्मा ने कहा कि इस किरदार को निभाना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयाँ आएं, लोगों के साथ मिलकर रहना बहुत महत्वपूर्ण है।

Point of View

बल्कि हमारी संस्कृति और इतिहास के प्रति सम्मान प्रकट करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। उपमुख्यमंत्री विजय सिंन्हा की बातें इस बात की पुष्टि करती हैं कि भारत की बहुमूल्य धरोहर को आज की पीढ़ी के समक्ष लाना आवश्यक है।
NationPress
22/01/2026

Frequently Asked Questions

महानाटक में कौन-कौन से पात्र शामिल हैं?
महानाटक में माता अहिल्याबाई होल्कर की भूमिका में जानवी सिंह और बड़ी अहिल्याबाई की भूमिका में शारा शर्मा शामिल हैं।
उपमुख्यमंत्री ने माता अहिल्याबाई के बारे में क्या कहा?
उपमुख्यमंत्री विजय सिंन्हा ने कहा कि माता अहिल्याबाई हमारी संस्कृति की प्रेरणा हैं जो नई पीढ़ी को प्रेरित करती हैं।
नाटक का उद्देश्य क्या है?
नाटक का उद्देश्य माता अहिल्याबाई के महान कार्यों को प्रस्तुत करना और नई पीढ़ी को हमारी संस्कृति से जोड़ना है।
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