गुजरात: भाजपा अध्यक्ष ने कांग्रेस के विकास, आदिवासी कल्याण और शिक्षा में योगदान को बताया 'शून्य'
सारांश
Key Takeaways
- कांग्रेस पर विकास में 'शून्य' योगदान का आरोप
- आदिवासी कल्याण और शिक्षा पर भी सवाल उठाए गए
- आगामी चुनावों के लिए जनसंपर्क को बढ़ाने का आह्वान
- प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना
- स्थानीय रोजगार के अवसरों की चर्चा
दाहोद, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। गुजरात भाजपा अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा ने गुरुवार को दाहोद में बूथ कार्यकर्ताओं के सम्मेलन में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने कांग्रेस पर विकास, आदिवासी कल्याण और शिक्षा के क्षेत्र में 'शून्य' योगदान देने का आरोप लगाया और पार्टी कार्यकर्ताओं से आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए जनसंपर्क को बढ़ाने का आग्रह किया।
सभा को संबोधित करते हुए विश्वकर्मा ने कहा कि कांग्रेस का मतलब विकास के नाम पर शून्य, आदिवासियों को सहायता देने के नाम पर शून्य, और शिक्षा के नाम पर शून्य है। उन्होंने यह भी कहा कि यह पार्टी झूठे वादों और झूठ का प्रतिनिधित्व करती है।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कांग्रेस ने कभी भी गांवों और आदिवासी समुदायों को शिक्षित और प्रगतिशील बनाने की कोशिश नहीं की।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस केवल चुनावों के समय ही सक्रिय होती है। देश की जनता ने इसे तीन बार नकारा है, और गुजरात की जनता इसे 30 वर्षों से नकार रही है।
दाहोद विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में कई पार्टी नेता और पदाधिकारी मौजूद थे।
विश्वकर्मा ने कहा कि भाजपा की संगठनात्मक शक्ति सत्ता के बजाय सेवा के प्रति समर्पित कार्यकर्ताओं पर निर्भर करती है, और उन्होंने आगामी स्थानीय स्वशासन चुनावों की तैयारी करते हुए पार्टी की 'राष्ट्रवादी विचारधारा' और सरकारी पहलों को हर घर तक पहुंचाने का आह्वान किया।
आदिवासी आबादी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय जल, भूमि और जंगलों का सच्चा संरक्षक है, और देश की रक्षा में उनके बलिदान और स्वतंत्रता आंदोलन में भागीदारी के ऐतिहासिक योगदान पर प्रकाश डाला।
उन्होंने आदिवासी नेताओं की विरासत का भी उल्लेख किया और कहा कि उनकी भूमिका को कभी नहीं भुलाया जा सकता।
विश्वकर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्रीय राजनीति को वोट बैंक, जाति-आधारित और क्षेत्रीय विचारों से दूर करके विकास की दिशा में मोड़ने का श्रेय दिया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पदभार ग्रहण करने के 17 दिनों के भीतर ही नर्मदा बांध से संबंधित मंजूरी सहित कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए, और गुजरात के शहरों और गांवों में दिखाई देने वाला विकास उनके इसी नेतृत्व का परिणाम है।
दाहोद में हुए बदलावों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जहां पहले निवासी मजदूरी के लिए पलायन करते थे, वहीं अब स्थानीय रोजगार के अवसर सृजित किए जा रहे हैं।