मैथिलीशरण गुप्त की 140वीं जयंती: CM योगी सहित 6 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने किया नमन
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रकवि और पद्म भूषण से सम्मानित मैथिलीशरण गुप्त की 140वीं जयंती पर 3 अगस्त 2026 को देशभर में श्रद्धांजलि का सिलसिला शुरू हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर इस महान कवि को याद किया। गुप्त जी का जन्म 3 अगस्त 1886 को उत्तर प्रदेश के झाँसी जिले में हुआ था।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की श्रद्धांजलि
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर पोस्ट करते हुए गुप्त जी की काव्य-पंक्तियाँ उद्धृत कीं — 'उपदेश गीता का हमारा युद्ध का ही गीत है, जीवन-समर में भी जनों को जो दिलाता जीत है।' उन्होंने लिखा कि गुप्त जी ने हिंदी साहित्य को राष्ट्रप्रेम, भारतीय संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं की अमर वाणी दी। योगी ने कहा कि 'उनके शब्द पीढ़ियों को सत्य, त्याग और मर्यादा के पथ पर चलने की प्रेरणा देते रहेंगे।'
अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों की प्रतिक्रिया
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि गुप्त जी ने अपनी सशक्त लेखनी के माध्यम से जन-जन में देशभक्ति का भाव जागृत किया और उनकी कालजयी रचनाएँ सदैव राष्ट्र सेवा की प्रेरणा देती रहेंगी।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने एक्स पर लिखा कि गुप्त जी का साहित्य आज भी उतना ही प्रासंगिक और प्रेरणादायी है तथा उनकी रचनाएँ राष्ट्रसेवा, कर्तव्यबोध और आत्मगौरव का संदेश देती रहेंगी।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि गुप्त जी ने खड़ी बोली हिंदी को काव्य की सशक्त अभिव्यक्ति प्रदान की और अपनी लेखनी से राष्ट्रप्रेम, सामाजिक चेतना और भारतीय संस्कृति के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाया।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुप्त जी को 'राष्ट्रीय चेतना के प्रखर स्वर' बताते हुए कहा कि उनकी कालजयी रचनाएँ हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं और राष्ट्र चेतना का दीप प्रज्ज्वलित करती रहेंगी।
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक्स पर लिखा कि गुप्त जी 'हिंदी साहित्य के अमर हस्ताक्षर' हैं और उनकी रचनाएँ राष्ट्रप्रेम, संस्कृति और मानवीय मूल्यों की प्रेरणा बनकर सदैव मार्गदर्शन करती रहेंगी।
मैथिलीशरण गुप्त का साहित्यिक योगदान
गुप्त जी को महात्मा गांधी ने 'राष्ट्रकवि' की उपाधि दी थी। उनकी प्रमुख रचनाओं में 'साकेत', 'यशोधरा', 'भारत-भारती' और 'द्वापर' शामिल हैं। उन्होंने खड़ी बोली हिंदी को आधुनिक काव्य की भाषा के रूप में स्थापित करने में अग्रणी भूमिका निभाई। भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया था।
जयंती का महत्त्व
यह ऐसे समय में आया है जब हिंदी साहित्य और उसकी सांस्कृतिक विरासत को लेकर राष्ट्रीय विमर्श फिर से केंद्र में है। गौरतलब है कि गुप्त जी की रचनाएँ स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में जनचेतना जगाने का माध्यम बनी थीं — एक विरासत जो आज भी पाठ्यक्रमों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में जीवित है। उनकी 140वीं जयंती पर देश के विभिन्न हिस्सों में साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।