उत्तर प्रदेश के विकास के लिए पं. गोविंद बल्लभ पंत के योगदान पर मुख्यमंत्री योगी का नज़र
सारांश
Key Takeaways
- पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने उत्तर प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
- उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया और वकालत छोड़ दी।
- उन्हें 1957 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके कार्यों को आज के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया।
- उनकी सोच आज भी उत्तर प्रदेश के विकास में मार्गदर्शन करती है।
लखनऊ, 7 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश के पूर्व गृह मंत्री और उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री, भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत की पुण्यतिथि पर शनिवार को श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री ने लोकभवन में उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करते हुए उन्हें भारत मां का महान सपूत, प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, कुशल अधिवक्ता और योग्य प्रशासक बताया। उन्होंने कहा कि पं. गोविंद बल्लभ पंत के कार्य हमें प्रेरित करते हैं और हमारा मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल में उत्तर प्रदेश के विकास और सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि पंडित गोविंद बल्लभ पंत का जन्म वर्तमान उत्तराखंड में हुआ था, जो उस समय उत्तराखंड संयुक्त प्रांत का हिस्सा था। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आह्वान पर उन्होंने वकालत छोड़कर स्वाधीनता संग्राम में भाग लिया। जब देश गुलाम था, तब 1937 में उन्हें उत्तर प्रदेश के प्रीमियर के रूप में नियुक्त किया गया। उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री के रूप में पं. गोविंद बल्लभ पंत का स्मरण सभी करते हैं।
सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में पंत जी ने विकास की जो आधारशिला रखी और जो दृष्टिकोण प्रस्तुत किया, उसका अनुसरण करते हुए उत्तर प्रदेश आज भारत की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। आज जो कुछ भी उत्तर प्रदेश कर पा रहा है, उसके पीछे पं. गोविंद बल्लभ पंत की सोच है। उन्होंने गृह मंत्री के रूप में देश को अमूल्य सेवाएं प्रदान कीं।
राजभाषा हिंदी के प्रोत्साहन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। देश की स्वतंत्रता में उनके योगदान और उत्तर प्रदेश तथा देश की सेवा के लिए उन्हें 1957 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया। पं. गोविंद बल्लभ पंत के कार्य आज भी हमारे लिए मार्गदर्शन का स्रोत बने हुए हैं।