यूपी के 184 निजी अस्पताल आयुष्मान योजना से बाहर, फायर एनओसी समेत मानक पूरे न करने पर कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के 184 निजी अस्पतालों को आयुष्मान भारत योजना से डी-इम्पैनल कर दिया गया है — अर्थात इन अस्पतालों में अब पात्र मरीजों को कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं मिलेगी। 12 अगस्त को सामने आई इस कार्रवाई का आधार नए सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों के तहत कराया गया विस्तृत सत्यापन है, जिसमें इन अस्पतालों ने अनिवार्य शर्तें पूरी नहीं कीं। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने स्पष्ट किया कि मरीजों की सुरक्षा किसी भी कीमत पर सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मुख्य घटनाक्रम
केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत योजना से संबद्ध अस्पतालों के लिए सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों को पहले की तुलना में कहीं अधिक सख्त किया है। इसके तहत उत्तर प्रदेश में सभी संबद्ध अस्पतालों के दस्तावेज़ों और व्यवस्थाओं का गहन सत्यापन कराया गया। अस्पतालों से फायर एनओसी, बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट प्रमाणपत्र सहित अन्य अनिवार्य अभिलेख प्रस्तुत करने को कहा गया था।
गौरतलब है कि यह सत्यापन अभियान मार्च 2026 से चल रहा था और अस्पतालों को बार-बार नोटिस व अवसर दिए गए। इसके बावजूद 184 अस्पताल निर्धारित समय-सीमा में मानक पूरे नहीं कर सके, जिसके बाद नियमानुसार उन्हें योजना से बाहर किया गया।
सरकार की प्रतिक्रिया
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा, 'डी-इम्पैनल की कार्रवाई का मकसद अस्पतालों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा, पारदर्शिता और गुणवत्तापूर्ण इलाज सुनिश्चित करना है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फायर एनओसी जैसे मरीजों की जान से सीधे जुड़े मानकों में कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग का संदेश साफ है — योजना में केवल वही अस्पताल बने रहेंगे जो सभी निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन करते हों।
आम जनता पर असर
इन 184 अस्पतालों में पंजीकृत या इलाज करा रहे आयुष्मान भारत के लाभार्थियों को अब कैशलेस सुविधा के लिए किसी अन्य सूचीबद्ध अस्पताल में जाना होगा। यह स्थिति विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रहने वाले उन मरीजों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है, जहाँ विकल्प सीमित हैं। हालाँकि सरकार का तर्क है कि मानकहीन अस्पतालों में इलाज से मरीजों को होने वाला जोखिम इससे कहीं अधिक गंभीर है।
दोबारा इम्पैनलमेंट की राह
डी-इम्पैनल किए गए अस्पतालों के लिए पुनः योजना से जुड़ने का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। यदि ये अस्पताल भविष्य में सभी अनिवार्य शर्तें पूरी कर लेते हैं और आवश्यक दस्तावेज़ उपलब्ध करा देते हैं, तो वे नियमानुसार पुनः इम्पैनलमेंट के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनके आवेदन और व्यवस्थाओं का नए सिरे से सत्यापन किया जाएगा।
क्या होगा आगे
यह कार्रवाई देशभर में आयुष्मान भारत योजना की गुणवत्ता निगरानी को कड़ा करने की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सत्यापन अभियान नियमित रूप से होने चाहिए ताकि योजना का लाभ वास्तव में ज़रूरतमंद मरीजों तक सुरक्षित ढंग से पहुँचे। स्वास्थ्य विभाग ने संकेत दिया है कि शेष संबद्ध अस्पतालों की निगरानी भी जारी रहेगी।