यूपी में आयुष्मान योजना पर बड़ी कार्रवाई: 100 अस्पतालों का भुगतान रोका, 100 निलंबित
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत निर्धारित मानकों का पालन न करने वाले निजी अस्पतालों के विरुद्ध 15 मई 2025 को कड़ी कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 100 निजी अस्पतालों का भुगतान तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है, जबकि करीब 100 अन्य अस्पतालों को योजना से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई यह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है कि आर्थिक रूप से कमजोर लाभार्थियों को केवल मानक-आधारित और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएँ ही मिलें।
मुख्य घटनाक्रम
स्टेट हेल्थ एजेंसी (साचीज) की मुख्य कार्यकारी अधिकारी अर्चना वर्मा ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना देश के वंचित वर्गों को निशुल्क और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने की एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि इसे अधिक प्रभावी, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए समय-समय पर सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।
सरकार ने अस्पताल इम्पैनलमेंट मॉड्यूल (HEM) पोर्टल के माध्यम से सूचीबद्ध अस्पतालों का सत्यापन शुरू किया। नई व्यवस्था के तहत अस्पतालों के लिए 35 अनिवार्य मानकों को पूरा करना ज़रूरी किया गया है, जिनमें पंजीकरण प्रमाणपत्र, फायर सेफ्टी एनओसी, आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर, चिकित्सकों की शैक्षणिक योग्यता और HFR पंजीकरण शामिल हैं।
किन जिलों के अस्पताल प्रभावित
जिन अस्पतालों ने निर्धारित समयसीमा में प्रक्रिया पूरी नहीं की, उनमें आगरा, अलीगढ़, प्रयागराज, लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ, कानपुर नगर, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर सहित प्रदेश के कुल 46 से अधिक जिलों के करीब 200 निजी चिकित्सालय शामिल हैं। नेशनल हेल्थ अथॉरिटी और साचीज की ओर से इन अस्पतालों को ई-मेल, दूरभाष, पत्राचार और वर्चुअल बैठकों के ज़रिये बार-बार सहायता दी गई, इसके बावजूद इन्होंने प्रक्रिया पूरी नहीं की।
गौरतलब है कि 95 प्रतिशत से अधिक सूचीबद्ध अस्पताल HEM 2.0 पोर्टल पर सफलतापूर्वक माइग्रेट हो चुके हैं। शेष अस्पतालों को कई अवसर दिए जाने के बाद भी अनुपालन न करने पर यह दंडात्मक कार्रवाई की गई।
सरकार की प्रतिक्रिया और नई व्यवस्था
योगी सरकार ने सभी सूचीबद्ध अस्पतालों को NABH गुणवत्ता प्रमाणन प्राप्त करने के लिए भी निर्देश जारी किए हैं। राज्य और जिला स्तर पर अस्पतालों की नियमित ऑडिट और मॉनिटरिंग कराई जा रही है। इसके अतिरिक्त, मरीजों के उपचार को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ABDM सक्षम HMIS प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (EHR) प्रणाली को भी चरणबद्ध तरीके से लागू कर रही है, जिससे मरीजों का स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा। चिकित्सकों की डिग्री या विवरण के अनुचित उपयोग की शिकायतों पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
आम जनता पर असर
यह कार्रवाई उन लाखों लाभार्थियों के हित में की गई है जो आयुष्मान भारत योजना के तहत निशुल्क इलाज के पात्र हैं। निलंबित और भुगतान-रोके गए अस्पतालों में भर्ती मरीजों को अब अन्य सूचीबद्ध अस्पतालों में रेफर किया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब स्वास्थ्य योजनाओं में फर्जी दावों और गुणवत्ताहीन सेवाओं की शिकायतें देशभर में बढ़ी हैं।
क्या होगा आगे
निलंबित अस्पतालों को मानकों का पूर्ण अनुपालन करने के बाद पुनः सूचीबद्ध किए जाने का अवसर दिया जा सकता है। राज्य स्तर से अस्पतालों को पोर्टल संचालन और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के लिए नियमित प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि योजना के अंतर्गत प्रत्येक लाभार्थी को बिना किसी समझौते के गुणवत्तापूर्ण इलाज मिले।