गोदावरी प्रदूषण पर पवन कल्याण का एक्शन: ₹416 करोड़ की योजना, रोज़ 55 MLD सीवेज का ऑडिट आदेश
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं पर्यावरण मंत्री पवन कल्याण ने 26 मई 2025 को राजमहेन्द्रवरम में गोदावरी नदी के प्रदूषित हिस्सों का स्थलीय निरीक्षण करने के बाद अधिकारियों को नदी में गिरने वाले समस्त प्रदूषकों और अपशिष्ट जल का व्यापक ऑडिट कराने का आदेश दिया। आंकड़ों के अनुसार, प्रतिदिन लगभग 55 मिलियन लीटर (55 MLD) अनुपचारित सीवेज गोदावरी में प्रवाहित हो रहा है — एक स्थिति जिसे उन्होंने तत्काल सुधार की माँग करने वाला बताया।
मुख्य घटनाक्रम
पवन कल्याण ने सोमवार सुबह 6 बजे नाव से यात्रा प्रारंभ कर राजमहेन्द्रवरम पुष्कर घाट से कोटिलिंगला घाट तक गोदावरी के प्रदूषित खंडों का प्रत्यक्ष मुआयना किया। चिंतालम्मा घाट पर उन्होंने उस स्थान का निरीक्षण किया जहाँ राजमहेन्द्रवरम का सीवेज 'नल्ला चैनल' के माध्यम से सीधे नदी में मिलता है।
उन्होंने वहाँ तैनात कर्मचारियों से संवाद किया, जल-शुद्धिकरण की वर्तमान प्रक्रियाओं की जानकारी ली और कचरा-पृथक्करण की व्यवस्था का भी जायज़ा लिया। अधिकारियों ने उन्हें नदी तट पर जारी सौंदर्यीकरण कार्यों की प्रगति से अवगत कराया।
ऑडिट और रिपोर्ट का आदेश
पूर्वी गोदावरी जिले के अधिकारियों को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है, जिसमें अब तक उठाए गए कदमों का लेखा-जोखा और आगे की ठोस कार्ययोजना शामिल हो। पवन कल्याण ने स्पष्ट किया कि प्रदूषण स्रोतों की पहचान के बिना दीर्घकालिक समाधान संभव नहीं है — इसीलिए व्यापक ऑडिट अनिवार्य है।
उन्होंने कहा, "हमें ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि बिना शुद्ध किए सीवेज को सीधे गोदावरी में छोड़ा जा रहा है। सीवेज के शुद्धिकरण की प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक और सही तरीके से होनी चाहिए।"
₹416 करोड़ की केंद्रीय निधि और नए ट्रीटमेंट प्लांट
राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना के अंतर्गत केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा आवंटित ₹416 करोड़ में से ₹95 करोड़ के लिए प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है। पवन कल्याण ने निर्देश दिया कि इस राशि का उपयोग आधुनिक तकनीक से सुसज्जित नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) स्थापित करने में किया जाए।
उन्होंने जोर दिया कि गोदावरी में केवल पूर्णतः शुद्धिकृत जल ही प्रवाहित किया जाए — ऐसा जल जो किसी भी प्रकार के सीवेज से मुक्त हो।
गोदावरी पुष्करम 2026 की तैयारी
पवन कल्याण ने पुष्करम के लिए जारी निर्माण एवं विकास कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंध्र प्रदेश की गठबंधन सरकार अगले वर्ष होने वाले गोदावरी पुष्करम को 'प्रदूषण-मुक्त गोदावरी' की मुख्य थीम के अंतर्गत आयोजित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
यह ऐसे समय में आया है जब पुष्करम जैसे धार्मिक आयोजनों में लाखों श्रद्धालु नदी में स्नान करते हैं और प्रदूषित जल से स्वास्थ्य जोखिम की चिंताएँ बढ़ती रही हैं। गौरतलब है कि गोदावरी प्रदूषण की समस्या कई वर्षों से लंबित है और यह पहली बार है जब किसी वरिष्ठ मंत्री ने स्वयं स्थलीय निरीक्षण कर ऑडिट का आदेश दिया है।
आगे की राह
पूर्वी गोदावरी जिले के अधिकारियों को शीघ्र विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। नए ट्रीटमेंट प्लांटों की स्थापना और शेष ₹321 करोड़ की स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है। नदी तट सौंदर्यीकरण के कार्य भी पुष्करम से पहले पूरे करने का लक्ष्य है।